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राजस्थान शिक्षा बोर्ड ने महाराणा प्रताप से जुड़े तथ्यों से की छेड़छाड़, पंजाब के राज्यपाल ने दर्ज कराया विरोध

Sat, 04 Jul 2020 02:07 AM IST
ajay kumar रघु आदित्य, अमर उजाला, चंडीगढ़
रघु आदित्य, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 04 Jul 2020 02:07 AM IST
सार

  • किताबों में गलत इतिहास पढ़ाने पर पंजाब के राज्यपाल ने लिखा राजस्थान के राज्यपाल को पत्र
  • कहा- हाई लेवल कमेटी बनाएं और इतिहास का उपहास उड़ाने वाली इन गलतियों को सुधरवाएं

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Punjab governor writes letter to Governor of Rajasthan regarding Tampering with history in textbook
पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

राजस्थान के गौरवशाली इतिहास से छेड़छाड़ को लेकर एकबार फिर क्षत्रिय समाज उद्धेलित है। इस बार विरोध राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 2017 से चली आ रही कक्षा दसवीं व बाहरवीं की इतिहास की पुस्तकों में किए गए त्रुटिपूर्ण बदलाव का है। आरोप यह है कि इनमें हल्दीघाटी के युद्ध से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। इस युद्ध में अकबर की सेना से महाराणा प्रताप की पराजय होना साबित किया गया है, जबकि तीन साल से चल रही इन पाठ्य पुस्तकों में इतिहासकारों के हवाले से हल्दीघाटी युद्ध में अकबर की सेना की असफलता वर्णित की गई थी।

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इस ताजा विवाद में अब पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर भी विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र को पत्र लिखकर मांग की है कि वे इतिहासकारों और शिक्षाविदों की एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाएं और इतिहास का उपहास उड़ाने वाली इन गलतियों को सुधरवाएं।
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बदनौर ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा दसवीं व बाहरवीं की इतिहास की पुस्तकों में मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह को बनवीर का हत्यारा बताने और महाराणा प्रताप-अकबर के बीच हुए विश्व प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध के ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़मरोड़ कर प्रकाशित करने पर गंभीर नाराजगी जताई है। राज्यपाल बदनौर खुद राजस्थान में एक रजवाड़े के मुखिया हैं।

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राज्यपाल कलराज मिश्र को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि इतिहास की इन पुस्तकों में हम अपने बच्चों को गलत जानकारी दे रहे हैं। जैसा कि मुझे बताया गया है, कक्षा-10वीं की पुस्तक के अध्याय राजस्थान का इतिहास और संस्कृति में महाराणा उदयसिंह द्वितीय को बनवीर का हत्यारा दर्शाया गया है और यह साबित किया गया है कि महाराणा उदयसिंह ने यह कृत्य मेवाड़ पर कब्जा करने के लिए किया था। जबकि सही तथ्य यह है कि असली साजिश बनवीर ने रची थी। इसी तरह विश्व प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध के तथ्यों को भी गलत लिखा गया है। मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप और उदयसिंह द्वितीय के बारे में प्रकाशित इन गलत तथ्यों के चलते मेवाड़ के लोगों में भारी आक्रोश है।

महाराणा के बारे में गलत क्यों पढ़ाया जा रहा?
मेवाड़ के कई जनप्रतिनिधि भी इस बदलाव के विरोध में उतर आए हैं। उनका कहना है कि महाराणा प्रताप के बारे में गलत क्यों पढ़ाया जा रहा है? यह सीधा-सीधा मातृभूमि की आन-बान-शान के लिए अपने प्राण देने वाले महाराणा प्रताप और महाराणा उदयसिंह की छवि को खराब करने का प्रयास है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इन पुस्तकों में से महाराणा प्रताप के पुत्र द्वारा अब्दुल रहीम के परिवार की स्त्रियों को बंदी बनाकर लाने पर महाराणा के नाराज होने तथा उन्हें वापस सकुशल शिविर में छोड़कर आने के आदेश के प्रसंग को भी हटा दिया गया है।

पंजाब में हो रहा है महाराणा प्रताप पर शोध
बदनौर ने राजस्थान के राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि महान योद्धा महाराणा प्रताप राष्ट्रीय गौरव हैं। उनकी जयंती पर पंजाब में राज्यस्तरीय महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। मेरी अनुशंसा पर पंजाब सरकार ने 2017 में पंजाबी विवि पटियाला में महाराणा प्रताप चेयर स्थापित की है। यहां महाराणा प्रताप पर शोध हो रहा है। पंजाब-राजस्थान के इतिहासकार अपने तथ्यों का आदान-प्रदान करने के लिए इस मंच का उपयोग कर सकते हैं। मुझे चिंता यह है कि ऐतिहासिक तथ्य गलत पढ़ाए जाएंगे तो बच्चे महाराणा प्रताप के जीवन से क्या प्रेरणा लेंगे?

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