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कनाडा से आएगी अफीम से जुड़े नशे छुड़ाने की तकनीक, कैप्टन ने मंत्री चन्नी को सौंपी जिम्मेदारी

Tue, 12 Feb 2019 12:18 PM IST
खुशबू गोयल हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 12 Feb 2019 12:18 PM IST
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Punjab Government will take help of canada campaign to demolish drugs addiction
DRUGS - फोटो : SELF
पंजाब को नशामुक्त करने की मुहिम में जुटी राज्य सरकार ने सिंथेटिक नशों के अलावा पारंपरिक नशे की रोकथाम का भी बीड़ा उठा लिया है। इसके तहत सरकार अब सूबे में अफीम व अफीम से उत्पन्न होने वाले नशे की रोकथाम के लिए कनाडा के राज्य अल्बर्टा के ओपिओयड नियंत्रण कार्यक्रम का सहारा लेगी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस विषय पर अल्बर्टा राज्य से तालमेल बिठाने का जिम्मा कैबिनेट मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को सौंपा है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में फैसला हाल ही में उस समय लिया जब राज्य के तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में परस्पर सहयोग का एक समझौता अल्बर्टा सरकार के साथ किया।
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इसी मौके पर यह बात सामने आई कि अफीम और ओपिओयड के कारण हर रोज दो लोगों की मौत झेल रह अल्बर्टा राज्य ने एक मंत्री के नेतृत्व में ओपिओयड इमरजेंसी रिस्पांस कमिशन का गठन किया है। यह कमीशन अफीम से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ-साथ नशेड़ियों के इलाज, नशे की रोकथाम, सप्लाई चेन तोड़ने और हालात पर निरंतर नजर रखने की व्यवस्था को नियंत्रित करता है। अल्बर्टा राज्य की अफीम पर विभिन्न रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि 2016 में वहां 358 लोगों की ओपिओयड के ओवरडोज से मौत हुई, जबकि 2017 में यह आंकड़ा 687 व्यक्ति तक पहुंच गया।
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वर्ष 2018 के पहले क्वार्टर मे ही अल्बर्टा राज्य में 158 लोग अफीम और ओपिओयड नशों के कारण जान गंवा चुके हैं। पंजाब में सिंथेटिक नशों के साथ-साथ ओपिओयड (हेरोइन, मोरफिन आदि) के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से विशेष तौर पर एसआईटी गठित कर अभियान चलाया गया है। लेकिन इस दौरान प्रदेश में अफीम की खेती की अनुमति दिए जाने की मांग भी जोर पकड़ रही है। पंजाब में साल 1955 तक अफीम की खेती होती थी लेकिन उसके बाद 1985 में जब एनडीपीएस एक्ट आया तो इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हालांकि सूबे में अफीम का नशा जानलेवा साबित नहीं हुआ था लेकिन बैन लगाए जाने के बाद सबसे पहले शराब की खपत बढ़ी, फिर स्मैक, हेरोइन और दूसरे केमिकल नशे शुरू हो गए। ये सभी ऐसे नशे हैं, जिनका निरंतर सेवन करने वाला दो-चार साल ही जीवित रहता है।
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पंजाब में अफीम की खपत सबसे ज्यादा
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स)  के एक सर्वे के अनुसार, पंजाब में नशे की वार्षिक खपत 7,500 करोड़ से अधिक की है और प्रदेश में 8.60 लाख लोग विभिन्न नशों के आदी हैं। एम्स की ओर से पंजाब के 10 प्रमुख शहरों में नशों पर सर्वेक्षण में यह खुलासा भी हुआ कि प्रदेश में अफीम की खपत दुनिया में सबसे ज्यादा हो रही है। पंजाब में पहुंचने वाले नशों की खपत का इस्तेमाल 76 फीसदी 18-35 साल के नौजवान कर रहे हैं, जबकि 56 फीसदी खपत देहाती क्षेत्रों में, 27 फीसदी मजदूरों में और 15 फीसदी अमीर व्यक्ति कर रहे हैं।
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