Punjab: टोडरमल की हवेली होगी संरक्षित, ASI के पास भेजा जाएगा प्रस्ताव, हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने दी जानकारी
टोडरमल की हवेली को पंजाब सरकार संरक्षित करेगी। यह जानकारी उसने हाईकोर्ट दी है। हाईकोर्ट ने बताया कि संरक्षण की योजना तैयार की गई है। इस प्रस्ताव को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भेजा जाएगा।
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माता गुजरी और दो साहिबजादों के अंतिम संस्कार के लिए दौलत लुटाते हुए जमीन को सोने की अशर्फियों से ढक कर खरीदने वाले टोडरमल की हवेली को संरक्षित करने के लिए पंजाब सरकार ने योजना तैयार की है। इसके तहत संरक्षण व मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजा जाएगा। पंजाब सरकार से मिली जानकारी के आधार पर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को याचिका का निपटारा कर दिया।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने बताया कि 17वीं शताब्दी में श्री गुरु गोबिंद सिंह की मां माता गुजरी और दो बेटे साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह के अंतिम संस्कार के लिए जमीन खरीदने में टोडरमल ने दौलत लुटा दी थी। जितने स्थान को खरीदा जाना था उसके लिए शर्त रखी गई थी कि उतने स्थान पर सोने के सिक्के खड़े करके रखने होंगे। टोडरमल जो पंजाब के गवर्नर नवाब वजीर खान की कोर्ट में दीवान थे उन्होंने यह शर्त मंजूर की और सोने के सिक्कों से उस स्थान को भर दिया।
इसके बाद उन्होंने तीनों के अंतिम संस्कार का इंतजाम किया। याची ने बताया कि टोडरमल जिन्होंने इतना सब किया आज उनकी ही हवेली जर्जर हालात में है। न तो पंजाब सरकार और न ही एसजीपीसी जो इसकी मालिक है, इसके रखरखाव के लिए कोई काम कर रही है। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि एसजीपीसी ने इस हवेली में निर्माण का कार्य भी आरंभ कर दिया।
याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि इस ऐतिहासिक महत्व की इमारत को संरक्षित किया जाए और इसके जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। हाईकोर्ट ने अब पंजाब सरकार को हवेली के संरक्षण के लिए एसजीपीसी के साथ हुए समझौते को पूरा करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा करते हुए याचिकाकर्ता के साथ विमर्श करना जरूरी है।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि पंजाब सरकार, एसजीपीसी और याचिकाकर्ता के बीच हवेली के संरक्षण को लेकर दिसंबर में बैठक हुई थी। इसमें तय किया गया कि संरक्षित स्मारक के संरक्षण और मरम्मत के प्रस्ताव को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के चंडीगढ़ कार्यालय भेजा जाएगा। इस कार्य की जिम्मेदारी एसजीपीसी की होगी। सरकार और एसजीपीसी के बीच आपसी समझ को प्रभावी बनाने के लिए एक समझौता किया जाएगा। नवीकरण का पूरा प्रस्ताव एसजीपीसी द्वारा एक सप्ताह के भीतर सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि हवेली में कोई नया निर्माण नहीं होगा और जो हो चुका है उसे हटा दिया जाएगा।