Direct Paddy sowing: पंजाब में धान की सीधी बिजाई का 30 लाख एकड़ लक्ष्य तय, किसानों को जागरूक करेंगे तीन हजार अधिकारी
पानी के कम उपभोग और कम खर्चे वाली इस तकनीक को उत्साहित करने को किसानों के लिए 450 करोड़ रुपये की राशि रखी गई है। इस खरीफ सीजन के दौरान राज्य के किसान बासमती समेत 30 लाख हेक्टेयर (75 लाख एकड़) क्षेत्रफल में धान की फसल लगाएंगे।
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पंजाब में सरकार ने धान की सीधी बिजाई का 30 लाख एकड़ (12 लाख हेक्टेयर) क्षेत्रफल का लक्ष्य तय किया है। साथ ही किसानों को जागरूक करने के लिए राज्य में 3000 अधिकारियों की तैनाती कर दी है। सरकार के इस फैसले से भूजल को 15 से 20 प्रतिशत बचाने में मदद मिलेगी। इस तकनीक से खेती के लिए सरकार की ओर से किसानों को 1500 रुपये प्रति एकड़ की मदद भी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से हिदायत दी गई है कि इस साल धान की रिवायती बुवाई के बजाय लगभग 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल को डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (डीएसआर) तकनीक से की जाए। यह विधि जमीन में पानी के रिसने में सुधार करने के साथ-साथ खर्चे घटाती है और मिट्टी की सेहत में सुधार भी करती है। इससे धान और गेहूं की उपज में भी 5-10 प्रतिशत विस्तार होगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार पानी के कम उपभोग और कम खर्चे वाली इस तकनीक को उत्साहित करने को किसानों के लिए 450 करोड़ रुपये की राशि रखी गई है। इस खरीफ सीजन के दौरान राज्य के किसान बासमती समेत 30 लाख हेक्टेयर (75 लाख एकड़) क्षेत्रफल में धान की फसल लगाएंगे। आंकड़ों से अनुसार पिछले साल 15 लाख एकड़ (6 लाख हेक्टेयर) क्षेत्रफल में डीएसआर द्वारा धान की काश्त की गई थी। इस साल 30 लाख एकड़ का लक्ष्य निश्चित किया गया है। किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए कृषि, बागबानी, मंडी बोर्ड, जल और मृदा संरक्षण सहित अलग-अलग विभागों के करीब 3000 अधिकारियों, कर्मचारियों को तैनात किया है। इसके अलावा कृषि विभाग की तरफ से 5-7 गांवों के कलस्टर बनाकर गांव स्तरीय प्रशिक्षण कैंप भी लगाए जा रहे हैं।
मुफ्त मिलेगी चूहों को नियंत्रित करने वाली दवाई
कुछ क्षेत्रों में सीधी बुआई वाले धान की फसल को चूहों की तरफ से नुकसान पहुंचाने की रिपोर्टों के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को चूहों को कंट्रोल करने वाली कीटनाशक दवाएं किसानों को मुफ्त मुहैया करवाने के निर्देश दिए हैं। उस गांव का संबंधित ड्यूटी अफसर जरूरतमंद किसानों को कीटनाशक (ब्रोमोडीलोन/जिंकफास्फाईड) वितरित करेगा।
क्यों चिंतित है सरकार
राज्य में धान लगाने के रिवायती ढंग से भूजल में चिंताजनक गिरावट को रोकने के लिए तुरंत प्रयासों की जरूरत है। इस समय पर भूजल की 86 सेंटीमीटर प्रति साल की दर से आ रही गिरावट के कारण आने वाले 15-20 साल में राज्य के पास भूजल नहीं रहेगा।
डीएसआर तकनीक फसली चक्र के दौरान रिवायती विधि करने के मुकाबले लगभग 15-20 प्रतिशत पानी की बचत करने में मदद करती है। इस बार किसान बढ़चढ़ कर इस तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं। - गुरविंदर सिंह, निदेशक कृषि विभाग, पंजाब