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पंजाब सरकार को फटकार: हाईकोर्ट ने कहा-मुआवजे के बावजूद जमीन न देने वालों से सख्ती से निपटें
Wed, 28 Aug 2024 07:20 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 28 Aug 2024 07:20 AM IST
सार
पंजाब में जमीन पर कब्जा न मिलने की वजह से 10 राष्ट्रीय राजमार्ग के 391 किलोमीटर क्षेत्र के 13,190 करोड़ की लागत के प्रोजेक्ट रुके पड़े हैं।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जमीन पर कब्जा न मिलने की वजह से नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के रुके प्रोजेक्टों को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
साथ ही डीजीपी को आदेश दिया कि जा लोग मुआवजा जारी होने के बावजूद जमीन पर कब्जा लेने में बाधा बन रहे हैं उनके खिलाफ सख्ती से निपटने की व्यवस्था करें। कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर कब्जा दिलाने से जुड़ी रिपोर्ट सौंपने का मुख्य सचिव को भी दिया है।
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हाईकोर्ट ने गत वर्ष अक्तूबर में आदेश दिया था कि एनएचएआई संबंधित अधिकारी को अधूरी/लंबित परियोजनाओं की सूची उपलब्ध कराए और मुख्य सचिव सक्षम प्राधिकारी को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश जारी करें। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि दो महीने के भीतर जमीन का कब्जा एनएचएआई को दिलाया जाए।
अब हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर एनएचएआई ने बताया है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद पंजाब में भूमि का कब्जा नहीं दिलाया जा रहा है। हाईकोर्ट को बताया गया कि 34193 करोड़ की लागत के 897 किलोमीटर दूरी वाले 26 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए अभी तक 100 प्रतिशत भूमि का कब्जा नहीं मिला है। साथ ही 13190 करोड़ की लागत वाले 391 किलोमीटर के 10 राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट के लिए अभी 80 प्रतिशत भूमि प्राप्त नहीं हुई है। भूमि की अनुपलब्धता के कारण कुछ अनुबंध रद्द भी करने पड़े हैं और इसके लिए ठेकेदार को ठेके की राशि का एक प्रतिशत भुगतान भी करना पड़ा है। इसके साथ ही बहुत से ऐसे मामले हैं जिनके लिए भूमि मुआवजा तय किया जा चुका है और सरकार को 4104 करोड़ रुपये जमा करवाने के बावजूद भूमि का कब्जा नहीं दिया गया है।
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साथ ही डीजीपी को आदेश दिया कि जा लोग मुआवजा जारी होने के बावजूद जमीन पर कब्जा लेने में बाधा बन रहे हैं उनके खिलाफ सख्ती से निपटने की व्यवस्था करें। कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर कब्जा दिलाने से जुड़ी रिपोर्ट सौंपने का मुख्य सचिव को भी दिया है।
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एनएचएआई ने लगाई थी याचिका
एनएचएआई ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए भारतमाला परियोजना के तहत मेमदपुर (अंबाला)- बनूड़ (आईटी सिटी चौक)- खरड़ (चंडीगढ़) गलियारे के लिए भूमि के संबंध में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को चुनौती दी थी। बताया था कि भूमि न मिलने से दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे, लुधियाना रूपनगर से खरड़ हाईवे व लुधियाना-बठिंडा हाईवे का कार्य लंबित हैं।हाईकोर्ट ने गत वर्ष अक्तूबर में आदेश दिया था कि एनएचएआई संबंधित अधिकारी को अधूरी/लंबित परियोजनाओं की सूची उपलब्ध कराए और मुख्य सचिव सक्षम प्राधिकारी को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश जारी करें। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि दो महीने के भीतर जमीन का कब्जा एनएचएआई को दिलाया जाए।
अब हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर एनएचएआई ने बताया है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद पंजाब में भूमि का कब्जा नहीं दिलाया जा रहा है। हाईकोर्ट को बताया गया कि 34193 करोड़ की लागत के 897 किलोमीटर दूरी वाले 26 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए अभी तक 100 प्रतिशत भूमि का कब्जा नहीं मिला है। साथ ही 13190 करोड़ की लागत वाले 391 किलोमीटर के 10 राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट के लिए अभी 80 प्रतिशत भूमि प्राप्त नहीं हुई है। भूमि की अनुपलब्धता के कारण कुछ अनुबंध रद्द भी करने पड़े हैं और इसके लिए ठेकेदार को ठेके की राशि का एक प्रतिशत भुगतान भी करना पड़ा है। इसके साथ ही बहुत से ऐसे मामले हैं जिनके लिए भूमि मुआवजा तय किया जा चुका है और सरकार को 4104 करोड़ रुपये जमा करवाने के बावजूद भूमि का कब्जा नहीं दिया गया है।