{"_id":"5b5f65bf4f1c1bed5e8b6354","slug":"punjab-government-recommends-cbi-inquiry-into-kotakpura-bahabalkalan-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोटकपुरा, बहबलकलां फायरिंग के आरोपियों पर केस दर्ज, सीबीआई जांच की सिफारिश ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोटकपुरा, बहबलकलां फायरिंग के आरोपियों पर केस दर्ज, सीबीआई जांच की सिफारिश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Jul 2018 09:40 AM IST
विज्ञापन
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जस्टिस (रिटायर्ड) रणजीत सिंह आयोग की सिफारिशों को मंजूर करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बरगाड़ी बेअदबी मामले के बाद कोटकपूरा और बहबल कलां में फायरिंग की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करने का एलान किया है। इसके अलावा इन घटनाओं के आरोपियों के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है।
सोमवार को पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने 14 अक्तूबर, 2015 को कोटकपूरा और बहबल कलां में पुलिस गोलीकांड के पीड़ितों के लिए मुआवजे और नौकरियों का भी एलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयोग की सिफारिश के मुताबिक मुआवजा राशि बढ़ाने का फैसला लिया है। सरकार द्वारा आयोग की रिपोर्ट स्वीकार करने से पहले इसे एडवोकेट जनरल अतुल नंदा द्वारा कानूनी तौर पर जांचा गया है।
एक करोड़ रुपये की मुआवजा राशि
मुख्यमंत्री ने बताया कि जस्टिस रणजीत सिंह आयोग द्वारा फायरिंग की घटनाओं के दोनों मृतकों के परिवारों के लिए 75-75 लाख रुपये मुआवजे की सिफारिश की गई है। इसे देखते हुए मुआवजा राशि को बढ़ाकर सरकार ने एक करोड़ रुपये कर दिया है। वहीं, गंभीर रूप से जख्मी हुए बेअंत सिंह के लिए आयोग ने 35 लाख रुपये मुआवजा राशि तय की थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने कहा कि इनके परिवारों के एक-एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। इनके अलावा अजीत सिंह जोकि जीवन भर के लिए अपाहिज हो गए हैं, के लिए मुआवजा 40 लाख रुपये से बढ़ाकर 60 लाख रुपये किया गया है। अजीत सिंह के इलाज पर आने वाले खर्चा उठाने के साथ-साथ देखभाल के लिए एक अटेंडेंट भी सरकार द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा। गोलीबारी में जख्मी हुए व्यक्तियों को भी 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला किया गया है।
आयोग की रिपोर्ट में कई पुलिस अफसरों के नाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग ने जिन व्यक्तियों पर इन घटनाओं में शामिल होने की शंका व्यक्त की है, उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 307 के अधीन केस दर्ज करने के बाद इसकी जांच सीबीआई को इसलिए दी गई है ताकि निष्पक्ष और उद्देश्यपूर्ण जांच को यकीनी बनाया जा सके। आयोग ने अपनी पहली रिपोर्ट में कोटकपूरा के तत्कालीन एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश की थी।
कुछ पुलिस अधिकारी बेअदबी की घटनाओं के अलावा कोटकपूरा और बहबल कलां में बल प्रयोग करने संबंधी दर्ज मामलों की योग्य और निष्पक्ष जांच न करने के जिम्मेदार पाए गए हैं। आयोग द्वारा खासतौर पर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, सब इंस्पेक्टर अरियारजीत सिंह और एसपी बिक्रमजीत सिंह का जिक्र करते उनके नाम पुलिस स्टेशन बाजाखाना में दर्ज एफआईआर नंबर 130 में शामिल करने की भी सिफारिश की है।
इनके अलावा मोगा के तत्कालीन जिला पुलिस प्रमुख चरनजीत सिंह शर्मा, कांस्टेबल शमशेर सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, परमिंदर सिंह, एसएचओ लाडोवाल इंस्पेक्टर हरपाल सिंह की भूमिका की भी बारीकी से जांच करने की सिफारिश की गई है। इनके पास बहबल कलां कांड के दौरान असाल्ट रायफलें थी। यही नहीं कमांडो पुलिस की भूमिका की भी जांच की सिफारिश की गई है क्योंकि अंधाधुंध लाठीचार्ज से अनेक लोग जख्मी हो गए थे।
विज्ञापन
सोमवार को पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने 14 अक्तूबर, 2015 को कोटकपूरा और बहबल कलां में पुलिस गोलीकांड के पीड़ितों के लिए मुआवजे और नौकरियों का भी एलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयोग की सिफारिश के मुताबिक मुआवजा राशि बढ़ाने का फैसला लिया है। सरकार द्वारा आयोग की रिपोर्ट स्वीकार करने से पहले इसे एडवोकेट जनरल अतुल नंदा द्वारा कानूनी तौर पर जांचा गया है।
विज्ञापन
एक करोड़ रुपये की मुआवजा राशि
मुख्यमंत्री ने बताया कि जस्टिस रणजीत सिंह आयोग द्वारा फायरिंग की घटनाओं के दोनों मृतकों के परिवारों के लिए 75-75 लाख रुपये मुआवजे की सिफारिश की गई है। इसे देखते हुए मुआवजा राशि को बढ़ाकर सरकार ने एक करोड़ रुपये कर दिया है। वहीं, गंभीर रूप से जख्मी हुए बेअंत सिंह के लिए आयोग ने 35 लाख रुपये मुआवजा राशि तय की थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने कहा कि इनके परिवारों के एक-एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। इनके अलावा अजीत सिंह जोकि जीवन भर के लिए अपाहिज हो गए हैं, के लिए मुआवजा 40 लाख रुपये से बढ़ाकर 60 लाख रुपये किया गया है। अजीत सिंह के इलाज पर आने वाले खर्चा उठाने के साथ-साथ देखभाल के लिए एक अटेंडेंट भी सरकार द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा। गोलीबारी में जख्मी हुए व्यक्तियों को भी 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला किया गया है।
आयोग की रिपोर्ट में कई पुलिस अफसरों के नाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग ने जिन व्यक्तियों पर इन घटनाओं में शामिल होने की शंका व्यक्त की है, उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 307 के अधीन केस दर्ज करने के बाद इसकी जांच सीबीआई को इसलिए दी गई है ताकि निष्पक्ष और उद्देश्यपूर्ण जांच को यकीनी बनाया जा सके। आयोग ने अपनी पहली रिपोर्ट में कोटकपूरा के तत्कालीन एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश की थी।
कुछ पुलिस अधिकारी बेअदबी की घटनाओं के अलावा कोटकपूरा और बहबल कलां में बल प्रयोग करने संबंधी दर्ज मामलों की योग्य और निष्पक्ष जांच न करने के जिम्मेदार पाए गए हैं। आयोग द्वारा खासतौर पर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, सब इंस्पेक्टर अरियारजीत सिंह और एसपी बिक्रमजीत सिंह का जिक्र करते उनके नाम पुलिस स्टेशन बाजाखाना में दर्ज एफआईआर नंबर 130 में शामिल करने की भी सिफारिश की है।
इनके अलावा मोगा के तत्कालीन जिला पुलिस प्रमुख चरनजीत सिंह शर्मा, कांस्टेबल शमशेर सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, परमिंदर सिंह, एसएचओ लाडोवाल इंस्पेक्टर हरपाल सिंह की भूमिका की भी बारीकी से जांच करने की सिफारिश की गई है। इनके पास बहबल कलां कांड के दौरान असाल्ट रायफलें थी। यही नहीं कमांडो पुलिस की भूमिका की भी जांच की सिफारिश की गई है क्योंकि अंधाधुंध लाठीचार्ज से अनेक लोग जख्मी हो गए थे।