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पंजाबः पुलवामा हमले के शहीदों के परिजनों को नौकरी के लिए अभी करना होगा इंतजार, जानें क्यों

Sat, 15 Jun 2019 10:21 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 15 Jun 2019 10:21 AM IST
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Punjab Government Project Under Process for Job to Pulwama Martyres
कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के परिजनों को नौकरी के लिए अभी और इंतजार करना होगा। इसकी वजह भी सामने आ गई है। दरअसल, सरकार की हाई पावर कमेटी की ओर से पुलवामा हमले में पंजाब के शहीदों के परिजनों को उनकी मनपसंद नौकरी देने की सिफारिश मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास भेज दी गई है।
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लेकिन इस साल पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए पंजाब के चार जवानों में से तीन के परिजनों को नौकरी के लिए फिलहाल कुछ ओर इंतजार करना पड़ेगा। दरअसल राज्य सरकार इन चार शहीदों के बारे में बैटल कैजुअलिटी सर्टिफिकेट जारी होने का इंतजार कर रही है। इसके आधार पर इन जवानों को शहीद का विधिवत तौर पर दर्जा भी मिलेगा और उनके परिजनों को सरकारी नौकरी की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
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इस संबंध में सीएमओ के एक अधिकारी ने बताया कि सेना की ओर से बैटल कैजुअलिटी सर्टिफिकेट जारी होने में तीन से चार माह का समय लग जाता है क्योंकि संबंधित मुख्यालय पूरे मामले की गहनता से जांच करने के बाद शहीद हुए जवान के बारे में यह सर्टिफिकेट जारी करता है, जिस पर संबंधित राज्य सरकार द्वारा शहीद के परिवार को दी जाने वाली सभी सुविधाओं को लागू करने की पहल शुरू करती है।

उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली हाई पावर कमेटी ने सात शहीदों के परिजनों के बारे में सिफारिश भेजी है लेकिन पुलवामा हमले में शहीद हुए, मोगा जिले के जैमल सिंह, तरनतारन के सुखजिंदर सिंह, गुरदासपुर के मनिंदर सिंह अत्री और रोपड़ के कुलविंदर सिंह को लेकर अभी कोई सिफारिश नहीं की जा सकी।

इन शहीदों में से सुखजिंदर सिंह, मनिंदर सिंह अत्री और जैमल सिंह के परिजनों को सरकारी नौकरी दी जानी है, जबकि कुलविंदर सिंह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे और उनकी शहादत के बाद परिवार में उनके माता-पिता ही रह गए हैं। शहीद कुलविंदर के परिवार की इस स्थिति का पता चलते ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद रोपड़ जिले में कुलविंदर के घर जाकर उनके माता-पिता से मिले थे और उनके लिए आजीवन पेंशन लागू करने की तुरंत घोषणा की थी।

इससे पहले वीरवार को हाई पावर कमेटी ने सात शहीदों के परिजनों से उनकी पसंद की नौकरी के बारे में जानकारी हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री को सिफारिश भेजी है। इनमें विंग कमांडर एमएस ढिल्लों जो अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ प्रभावित इलाके में लोगों को बचाते समय हवाई हादसे में शहीद हो गए थे, की विधवा प्रभप्रीत कौर को असिस्टेंट रजिस्ट्रार नियुक्त करने की सिफारिश की गई है

जबकि शहीद लांसनायक संदीप सिंह की विधवा गुरप्रीत कौर और गुरदासपुर के शहीद सिपाही मनदीप सिंह की विधवा राजविंदर कौर को ग्रामीण विकास विभाग में सामाजिक शिक्षा और पंचायत अफ़सर (एसईपीओ) लगाए जाने की सिफ़ारिश की गई है।

पठानकोट के शहीद गनर सुखदयाल की विधवा पल्लवी सैनी को सहकारी सभाओं में इंस्पेक्टर, तरनतारन के शहीद सिपाही मनदीप सिंह के भाई शमशेर  सिंह को नायब तहसीलदार, मोगा के शहीद सिपाही जसप्रीत सिंह के भाई कुलदीप सिंह और संगरूर के शहीद सिपाही मनदीप सिंह के भाई जगदीप सिंह को पुलिस विभाग में कांस्टेबल लगाने की सिफारिश की गई है।
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