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Chandigarh News: बैकफुट पर पंजाब सरकार, 100 मीटर तक ही रहेगा ईको सेंसटिव जोन

Thu, 05 Dec 2024 02:16 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2024 02:16 AM IST
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Punjab government on back foot, eco sensitive zone will remain only up to 100 meters
चंडीगढ़। सुखना वन्य जीव अभयारण्य के पंजाब के हिस्से में तीन किलोमीटर के दायरे में ईको सेंसटिव जोन (ईएसजेड) बनाए जाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाएगा। ईको सेंसटिव जोन के मुद्दे पर जनता के सवालों से लगातार खुद को घिरता देख पंजाब सरकार बैकफुट पर आ गई है। अब यह प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए नहीं लाया जाएगा।
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पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि वे सुखना वन्य जीव अभयारण्य के इर्द-गिर्द 100 मीटर के दायरे में ही ईको सेंसटिव जोन बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेंगे। कटारूचक्क ने कहा कि जिन अफसरों ने ईको सेंसटिव जोन के मुद्दे पर ढंग से सरकार की ओर से पैरवी नहीं की, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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कटारूचक्क ने कहा कि इस मामले में जल्द एक 10 सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी। इसमें वन्य विभाग, निकाय विभाग, आवासीय एवं शहरी विकास विभाग के अधिकारी शामिल होंगे, ताकि ईको सेंसटिव जोन के मुद्दे पर दोबारा कानूनी सलाह के साथ सरकार अपना पक्ष तैयार कर सके। जरूरत पड़ने पर वे दोबारा लोगों के साथ बैठक बुलाएंगे।
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कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क, मंत्री डॉ. रवजोत सिंह, मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया और खरड़ से विधायक अनमोल गगन मान ने बुधवार को पंजाब भवन में सुखना वन्य जीव अभयारण्य के तीन किलोमीटर के दायरे में ईको सेंसटिव जोन बनाए जाने के मुद्दे पर जनसुनवाई रखी थी। इसमें नयागांव, कांसल, नाडा और करोरां से हजारों लोग पहुंचे थे। जनसुनवाई के दौरान रेजिडेंट्स ने मंत्री के सामने यह भी मुद्दा उठाया कि सुप्रीम कोर्ट में बीते दिनों दो बार हुई सुनवाई में पंजाब के एजी पेश नहीं हुए। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन ने इसका फायदा उठाते ईको सेंसटिव का दायरा 100 मीटर से तीन किमी तक बढ़ाए जाने को लेकर तथ्य पेश कर दिए। यहां तक कि बिना कैबिनेट की मंजूरी के पंजाब एजी ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र देकर ईको सेंसटिव जोन एक से तीन किमी तक बढ़ाए जाने का दावा कर दिया।

पुनर्गठन अधिनियम के तहत जमीन सॉयल कन्जर्वेशन के लिए दी गई थी: ओबेरॉय
जनसुनवाई में नयागांव से पहुंचे रेजिडेंट्स राइट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट हरजोत ओबेरॉय ने कहा कि पुनर्गठन अधिनियम-1966 के 48 बी के तहत चंडीगढ़ प्रशासन को जमीन सॉयल कन्जर्वेशन के लिए दी गई थी। सॉयल कन्जर्वेशन के लिए दी जमीन पर चंडीगढ़ प्रशासन ने गैर कानूनी तरीके से उसे फॉरेस्ट एरिया में अधिसूचित कर वन्य जीव अभयारण्य घोषित कर दिया, जो पूरी तरह से गलत है। पंजाब सरकार को सबसे पहले पुनर्गठन अधिनियम-1966 में संशोधन कर चंडीगढ़ प्रशासन की अधिसूचना को चुनौती देनी चाहिए, नहीं तो यह पंजाब की जमीन पर चंडीगढ़ प्रशासन के अवैध कब्जे को कानूनी मंजूरी दे देगा।

2296 एकड़ जमीन पर चंडीगढ़ का अवैध कब्जा : विनीत जोशी
पंजाब भाजपा के मीडिया प्रभारी विनीत जोशी भी जनसुनवाई में पहुंचे। सबसे पहले जोशी ने ही यह मुद्दा पंजाब सरकार के समक्ष उठाया था। उन्होंने मंत्री लाल चंद कटारूचक्क से कहा कि अगर पंजाब अब प्रस्तावित सुखना ईको सेंसटिव जोन को 3 किलोमीटर या 100 मीटर तक की भी अनुमति देता हैतो इसका मतलब यूटी की अवैध कार्रवाई को वैध करार देना होगा। इस क्षेत्र को ईको सेंसटिव जोन घोषित करने से कांसल, नाडा, नयागांव और करोरां के लोग बेघर हो सकते हैं। उन्हाेंने सरकार के मंत्रियों को सुझाव देते हुए कहा कि यह करने के बजाय पंजाब सरकार को कांसल क्षेत्र की 2296.68 एकड़ जमीन चंडीगढ़ से वापस लेने की कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।


चंडीगढ़ के कैंबवाला और खुड्डा अलीशेर में नहीं लागू होता ईको सेंसटिव जोन: सैनी
नयागांव रेजिडेंट्स की ओर से सुनवाई में पहुंचे कमलदीप सिंह सैनी ने मंत्री कटारूचक्क और विधायक अनमोल गगन मान को बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन पंजाब सरकार के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में ईको सेंसटिव जोन के दायरे को बढ़ाने को लेकर दांव पेच लगा रहा है, वहीं प्रशासन सुखना के पास पड़ते अपने दो गांवों कैंबवाला और खुड्डा अलीशेर में शून्य किलोमीटर का ईको सेंसटिव जोन घोषित कर बैठा है।
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