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Punjab: अकाली नेता बिक्रम मजीठिया की मुश्किलें बढ़ीं, ड्रग्स रैकेट केस की जांच सरकार ने अब ईडी के हवाले की

Wed, 11 Sep 2024 09:42 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Wed, 11 Sep 2024 09:42 PM IST
सार

मार्च 2013 में कनाडा के एनआरआई अनूप सिंह काहलों को फतेहगढ़ साहिब से गिरफ्तार किया गया था। इसी के बाद हजारों करोड़ के इंटरनेशनल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था। दरअसल, इस मामले के तार बिक्रम मजीठिया से उस वक्त जुड़े जब पंजाब पुलिस के बर्खास्त डीएसपी जगदीश भोला को पकड़ा गया।

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Punjab government handed over the investigation of Majithia related drug racket case to ED
बिक्रम मजीठिया - फोटो : संवाद

विस्तार

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की ड्रग्स रैकेट केस में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पंजाब सरकार ने मामले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंप दी है। ईडी ने मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से केस की स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है।

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एसआईटी के अधिकारियों के मुताबिक भोला ड्रग मामले में मुकदमे का सामना कर रहे अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से अब तक एसआईटी की पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, उन पर डिटेल रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा मजीठिया पर इस केस में जब एफआईआर दर्ज की गई थी, गवाहों के बयान, जांच में सामने आए 284 बैंक खातों के विवरण, उनके परिवार की फर्मों और सदस्यों के आरओसी रिकॉर्ड और आईटीआर की प्रतिलिपि और मनी लॉन्डि्रंग में इस्तेमाल हुए फंड के बैंक डिटेल्स सहित दस्तावेज मांगे हैं। बताया जा रहा है अब ईडी मजीठिया को समन जारी कर जल्द ही इस केस में पूछताछ के लिए तलब करेगी।

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झूठे केस में बदनाम करने की साजिश: मजीठिया

मामले को ईडी को सौंपे जाने के बाद बिक्रम सिंह मजीठिया ने वीडियो जारी कर कहा कि बीते 11 साल में अब तक पांच एसआईटी गठित की जा चुकी है। उनके खिलाफ एसआईटी को कोई सुराग नहीं मिला है। यहां तक कि उनके खिलाफ जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें भी सरकार ने अब तक कोर्ट में चालान पेश नहीं किया है। 

मजीठिया ने कहा कि मौजूदा सरकार की गठित की एसआईटी जब मामले की तहकीकात में उनके खिलाफ कोई सुराग जुटाने में नाकाम साबित हो गई, तो अब उन्हें इस झूठे केस में बदनाम करने की साजिश रचते हुए सरकार ने यह केस ईडी को सौंप दिया है।

2013 में सामने आया था मामला

मार्च 2013 में कनाडा के एनआरआई अनूप सिंह काहलों को फतेहगढ़ साहिब से गिरफ्तार किया गया था। इसी के बाद हजारों करोड़ के इंटरनेशनल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था। दरअसल, इस मामले के तार बिक्रम मजीठिया से उस वक्त जुड़े जब पंजाब पुलिस के बर्खास्त डीएसपी जगदीश भोला को पकड़ा गया। बर्खास्त डीएसपी जगदीश भोला ने रैकेट में मजीठिया के शामिल होने का आरोप लगाया था। भोला से पूछताछ के बाद अमृतसर की फार्मा कंपनी के बिट्टू औलख और जगदीश चहल को भी गिरफ्तार किया गया था। चहल ने कथित रूप से पूछताछ में बताया था कि कनाडा के एनआरआई सत्ता को भारत आने पर दो गनर और ड्राइवर मुहैया कराए जाते थे। यही नहीं मजीठिया पर हवाला के जरिये 70 लाख रुपयों के लेनदेन का भी आरोप लगा था।

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