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पंजाब सरकार ने बिगड़ती साख बचाने को किया लाखों लोगों को परेशान ः जाखड़
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Wed, 05 Oct 2016 06:40 PM IST
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सुनील जाखड़
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस उप प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा है कि सरकार ने अपनी बिगड़ती साख बचाने को लाखों लोगों को परेशान किया। सीमा सुरक्षा बल के डायरेक्टर जनरल के बयान से सरकार की पोल खुल गई है।
उन्होंने कहा कि बीएसएफ केडीजी केके शर्मा ने स्पष्ट किया है कि उनकी ओर से सीमांत गांवों को खाली करवाने के कोई निर्देश जारी नहीं किए गए। बिना किसी तनाव या सैनिक हलचल केसरकार ने छह सीमांत जिलों के लाखों लोगों को पलायन का आदेश दे दिया। न तो उन्हें ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध कराई, न ही पलायन से पहले राहत कैंप स्थापित किए गए।
कइयों के पास वाहन जुटाने को आर्थिक साधन तक नहीं थे। हजारों विद्यार्थी एक सप्ताह तक पढ़ाई से वंचित हो गए, अब उन्हें कहा जा रहा है कि अपने स्कूलों में जाकर शिक्षा ग्रहण करें। जाखड़ ने कहा कि पहले तो सीमांत इलाकों के किसानों को धान की कटाई की सलाह दी गई।
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अब वे मंडियों में पहुंचे तो उन्हें नमी का बहाना बना कर बैरंग लौटा दिया। एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू करने का दावा खोखला निकला। सरकार अब तक धान की मिलिंग के लिए शेलरों से अनुबंध तक नहीं कर सकी। सीएम ने कैबिनेट मीटिंग में सीमांत जिलों के लिए कुछ फैसले लिए, लेकिन फाजिल्का जिले को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
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उन्होंने कहा कि बीएसएफ केडीजी केके शर्मा ने स्पष्ट किया है कि उनकी ओर से सीमांत गांवों को खाली करवाने के कोई निर्देश जारी नहीं किए गए। बिना किसी तनाव या सैनिक हलचल केसरकार ने छह सीमांत जिलों के लाखों लोगों को पलायन का आदेश दे दिया। न तो उन्हें ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध कराई, न ही पलायन से पहले राहत कैंप स्थापित किए गए।
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कइयों के पास वाहन जुटाने को आर्थिक साधन तक नहीं थे। हजारों विद्यार्थी एक सप्ताह तक पढ़ाई से वंचित हो गए, अब उन्हें कहा जा रहा है कि अपने स्कूलों में जाकर शिक्षा ग्रहण करें। जाखड़ ने कहा कि पहले तो सीमांत इलाकों के किसानों को धान की कटाई की सलाह दी गई।
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अब वे मंडियों में पहुंचे तो उन्हें नमी का बहाना बना कर बैरंग लौटा दिया। एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू करने का दावा खोखला निकला। सरकार अब तक धान की मिलिंग के लिए शेलरों से अनुबंध तक नहीं कर सकी। सीएम ने कैबिनेट मीटिंग में सीमांत जिलों के लिए कुछ फैसले लिए, लेकिन फाजिल्का जिले को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।