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अन्नदाता की खुशियों पर बाढ़ का ग्रहण: 4.5 लाख एकड़ फसल बर्बाद... खेतों में रेत, मंडियां वीरान; घरों को नुकसान

Mon, 15 Sep 2025 02:54 PM IST
शाहरुख खान नितिन उपमन्यु, अमर उजाला, चंडीगढ़
नितिन उपमन्यु, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 15 Sep 2025 02:54 PM IST
सार

किसानों का संकट सिर्फ इतना नहीं है कि उनकी फसल बर्बाद हो चुकी है। इसके अलावा उनके घर भी बाढ़ में डूबने से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कुछ किसानों के घर ढह गए हैं। बचा-खुचा ढांचा भी जर्जर हो चुका है। घर का सारा सामान नष्ट हो चुका है।

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Punjab Floods Impact Lakh Acres of Paddy Crop Destroyed, Markets Empty and Homes Damaged
अमृतसर के अजनाला में पानी उतरने के बाद रेत में दबकर खराब हुई फसल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जिन खेतों में हर साल इस वक्त ट्रैक्टरों की घर्र-घर्राहट गूंजती थी, आज वहां किसानों की सिसकियां सुनाई दे रहीं हैं। जो मंडियां किसानों, आढ़तियों और पल्लेदारों की आवाज से शोर में डूबी रहती थीं, आज वहां वीरानगी छाई हुई है। 
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जिन किसानों के चेहरे फसल की आमद से खिले रहते थे, वो आज मुर्झाए हुए हैं। सोना उगलने वाले खेतों में रेत भरी हुई है। इस रेत के नीचे उनकी छह महीने की मेहनत और अरमान दबे हुए हैं। कुदरत की मार से पंजाब का अन्नदाता हताश है। उनकी खुशियों को बाढ़ का ग्रहण लग गया है।
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बाढ़ ने इस बार पंजाब में ऐसा कहर बरपाया कि 4.5 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की फसल पानी में डूब कर बर्बाद हो गई। पंजाब में मंगलवार से धान की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है लेकिन मंडियों की हालत ऐसी है कि यहां दूर-दूर तक कोई किसान नहीं दिखाई दे रहा। 
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न पल्लेदार हैं, न आढ़ती और न मजदूर। सब जैसे गायब हो गए हैं। पंजाब इस वक्त बड़ी आपदा से गुजर रहा है। धान की फसल तबाह होने से किसान बड़े आर्थिक संकट में फंसते दिख रहे हैं। सरकार ने धान की खरीद का जो लक्ष्य निर्धारित किया था वह भी पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा।

जिन खेतों में हर साल इस वक्त ट्रैक्टरों की घर्र-घर्राहट गूंजती थी, आज वहां किसानों की सिसकियां सुनाई दे रहीं हैं। जो मंडियां किसानों, आढ़तियों और पल्लेदारों की आवाज से शोर में डूबी रहती थीं, आज वहां वीरानगी छाई हुई है। 

 

जिन किसानों के चेहरे फसल की आमद से खिले रहते थे, वो आज मुर्झाए हुए हैं। सोना उगलने वाले खेतों में रेत भरी हुई है। इस रेत के नीचे उनकी छह महीने की मेहनत और अरमान दबे हुए हैं। कुदरत की मार से पंजाब का अन्नदाता हताश है। उनकी खुशियों को बाढ़ का ग्रहण लग गया है।

 

बाढ़ ने इस बार पंजाब में ऐसा कहर बरपाया कि 4.5 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की फसल पानी में डूब कर बर्बाद हो गई। पंजाब में मंगलवार से धान की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है लेकिन मंडियों की हालत ऐसी है कि यहां दूर-दूर तक कोई किसान नहीं दिखाई दे रहा। 

 

न पल्लेदार हैं, न आढ़ती और न मजदूर। सब जैसे गायब हो गए हैं। पंजाब इस वक्त बड़ी आपदा से गुजर रहा है। धान की फसल तबाह होने से किसान बड़े आर्थिक संकट में फंसते दिख रहे हैं। सरकार ने धान की खरीद का जो लक्ष्य निर्धारित किया था वह भी पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा।

किसानों पर तिहरी मार
किसानों का संकट सिर्फ इतना नहीं है कि उनकी फसल बर्बाद हो चुकी है। इसके अलावा उनके घर भी बाढ़ में डूबने से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कुछ किसानों के घर ढह गए हैं। बचा-खुचा ढांचा भी जर्जर हो चुका है। घर का सारा सामान नष्ट हो चुका है। अंदर तक मलबा घुस चुका है जिसे हटाने में काफी वक्त लगेगा। साथ ही इस पर काफी पैसा भी खर्च होगा। किसानों की आय का दूसरा साधन पशु हैं लेकिन बाढ़ में उनके पशु भी मारे गए हैं। बहुत से पशु बाढ़ में बह गए हैं। इससे उनकी यह आय भी बंद हो गई है।

अगली फसल पर भी संकट
किसानों की बड़ी चुनौती यह भी है कि उनके सामने अगली फसल का भी संकट खड़ा हो गया है। खेतों से रेत निकालकर उन्हें गेहूं के लिए तैयार करना आसान नहीं है। रेत निकालने के बाद धान के सड़े अवशेष को नष्ट करने में भी वक्त लगेगा। जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पंजाब आए थे तो उन्होंने कहा था कि किसानों की यह फसल तो बर्बाद हो ही गई है, अगली भी मुश्किल है।
 

धान में नमी की मात्रा में राहत की मांग
सरकार ने मंडियों में धान की खरीद के लिए नमी की मात्रा 17 प्रतिशत निर्धारित की है। किसान संगठनों की मांग है कि उन्हें इसमें राहत दी जाए, क्योंकि बची-खुची फसल को इतने कम समय में सुखाना काफी मुश्किल है। फसल सुखाने के लिए उनके पास जगह भी नहीं है। दूसरा लगातार बारिश के कारण पर्याप्त धूप भी नहीं मिल पाई है।

केस स्टडी-1
चार एकड़ में फसल बर्बाद, तीन लाख का नुकसान

पटियाला। पटियाला में भी पानी की मार से फसलों का काफी नुकसान हुआ है जिससे किसान बुरी तरह निराश हैं। पटियाला के गांव रायमल माजरी के किसान सोनी सिद्धू ने बताया कि उनकी करीब चार एकड़ की धान की फसल पानी से पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। पानी निकल जाने के बाद फसल में फंगस लग गई है। बेटों की तरह पाली फसलों को इस तरह से खराब हो जाने से उन्हें तीन लाख का नुकसान हुआ है। अब सरकार से उम्मीद है कि वह उन जैसे प्रभावित किसानों की सुध ले और जल्द से जल्द मुआवजा दे।

किसान ने बताया कि इस समय खेतों की मिट्टी काफी गीली है। इसलिए फिलहाल 15 से 16 दिन तक इस मिट्टी में कुछ और बोया नहीं जा सकेगा। इसके बाद बर्बाद हुई फसलों की वाही करके मक्की लगाने की योजना बनाई है। उधर, प्रशासन ने 16 सितंबर से शुरू होने जा रही धान की खरीद के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला फूड एंड सिविल सप्लाई अधिकारी रविंदर कौर के मुताबिक जिले में धान की खरीद के लिए करीब 109 मंडियां तैयार की गई हैं।

जरूरत पड़ने पर करीब 80 अस्थायी खरीद केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। पंजाब के अन्य जिलों की अपेक्षा पटियाला जिले में बाढ़ से फसलों को नुकसान कम हुआ है। इसलिए मंडियों में इस बार 14.86 लाख मीट्रिक टन धान की आवक होने की उम्मीद है। खरीद के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। इसके तहत बारदाने का प्रबंध करने के साथ-साथ बिकी धान की लिफ्टिंग के लिए टेंडर भी हो चुके हैं। मंडियों में किसानों के लिए पीने के पानी, शौचालय व लाइट की पूरी व्यवस्था की गई है।

केस स्टडी-2
न मंडियां तैयार न फसल

जगरांव। धान की फसल को लेकर किसान बलवीर सिंह व मनदीप सिंह का कहना है कि कि चाहे सरकार ने इस बार 15 दिन पहले ही फसल मंडी में लेकर आने को कह दिया है लेकिन अभी तक किसानों की फसलें पूरी तरह तैयार ही नहीं हुईं। दूसरे अगर मौसम सही रहा तो पंद्रह दिन के बाद ही फसल पक सकेगी। उन्होंने कहा पहले भी अक्तूबर में फसल तैयार ही होती है। किसानों का भी यह तर्क है कि हद से ज्यादा बारिश के कारण फसल भी सूखी नहीं है। अभी भी बारिश का सिलसिला जारी है।

ऐसे में फसल पकने में अभी पंद्रह दिन का वक्त और लग सकता है। ऐसे में मंडियों में 16 सितंबर से फसल का पहुंचना मुश्किल है। लुधियाना प्रशासन ने खरीद के इंतजाम पुख्ता होने का दावा किया है लेकिन अभी तक न मंडियां तैयार हैं और न ही फसल। सड़कों की हालत खस्ता है और अभी तक सड़कें बनाने का काम पूरा नहीं हुआ है। इन्फ्रास्ट्रक्चर भी पूरा नहीं है। जिले में धान की खरीद के लिए 108 मंडियां बनाई गई हैं।
 

मंडियां शुरू करने के लिए पांच दिवसीय विशेष अभियान शुरू
कृषि और किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि सरकार ने बाढ़ प्रभावित सभी अनाज मंडियों को दोबारा शुरू करने के लिए विशेष पांच दिवसीय अभियान शुरू किया है। अभियान का उद्देश्य जमा पानी और गाद को साफ कर सभी मंडियों को खरीद सीजन के लिए पूरी तरह से कार्यशील बनाना है ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

विशेष अभियान उन जिलों पर केंद्रित है जहां मंडियां ज्यादा प्रभावित हैं। उन्होंने पंजाब मंडी बोर्ड के अधिकारियों और सभी जिला मंडी अधिकारियों (डीएमओ) को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से इन प्रयासों की निगरानी करें और सुनिश्चित करें कि सभी प्रभावित मंडियां 19 सितंबर तक पूरी तरह से बहाल और कार्यशील हो जाएं। हमारी सरकार इस सीजन के लिए पूरी तरह तैयार है। हम हाल ही में आए बाढ़ कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों से पूरी तरह परिचित हैं।

अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े। हमारे किसानों की आजीविका की सुरक्षा और बेहतर खरीद प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। 16 सितंबर से शुरू होने वाले खरीद सीजन के लिए प्रदेश की 1800 अनाज मंडियों में पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं। किसानों को समय पर खरीद और तुरंत भुगतान की सुविधा दी जाएगी।
-इनपुट: राजिंदर शर्मा, रिंपी गुप्ता, पंकज शर्मा, अतुल कुमार।
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