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'आतंकियों से निपटने को सेना की मदद लेना शर्म की बात होती'

Fri, 31 Jul 2015 11:14 AM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 31 Jul 2015 11:14 AM IST
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punjab ex-dgp kps gill reviewing gurdaspur terror attack opeartion

गुरदासपुर आतंकी हमले की घटना में पुलिस की तुलना में आर्मी की ओर से जल्द ऑपरेशन खत्म करने के दावों को पूर्व डीजीपी केपीएस गिल ने गलत करार दिया है। उनका कहना है कि कोई भी ऑपरेशन जल्द नहीं निपटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि आर्मी ने ऑपरेशन ब्लू स्टार भी दो-तीन घंटे में खत्म करने का दावा किया था, लेकिन इसमें लंबा समय लगा।

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गिल ने कहा कि आर्मी की बजाय होमगार्ड से ऑपरेशन कराना बेहतर रहता। गिल यहां प्रेस क्लब की ओर से आयोजित मीट द प्रेस कार्यक्रम में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
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उन्होंने कहा कि पुलिस को बेहतर प्रशिक्षण व आधुनिक हथियारों से लैस करना जरूरी है। ऑपरेशन के लिए आर्मी की जरूरत को दरकिनार करते हुए कहा कि तीन आतंकियों के लिए आर्मी की सहायता लेने की बात करना अपने आप में शर्म की बात है।
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गिल ने कहा कि हर ऑपरेशन योजनाबद्ध तरीके से होता है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के खात्मे का अभियान शुरू करने से पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और एक अन्य मंत्री के साथ मंत्रणा हुई थी, तभी आतंकवाद खत्म हो सका।

निजी हित छोड़कर फोर्स को प्रोत्साहित करना चाहिए

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गिल ने कहा कि गुरदासपुर के दीनानगर जैसी घटनाओं को किसी राज्य विशेष से न जोड़कर राष्ट्रीय चुनौती के तौर पर देखा जाना चाहिए। विभिन्न राजनीतिक दलों को ऐसे मौकों पर निजी हित छोड़ फोर्स को प्रोत्साहित करना चाहिए।

गिल ने कहा कि पंजाब पुलिस के पास तो 303 राइफल हैं, अन्य कई राज्यों में पुराने हथियारों से काम चल रहा है। पंजाब में एलएमजी 1989 में लाई गई।

पंजाब पुलिस को यह इसलिए नहीं दी गई कि पुलिस आतंकी और आम आदमी में फर्क तय नहीं कर पाएगी। गिल ने कहा कि पुलिस एक्सपर्ट है, लेकिन पुलिस के हाथ बांधने वाले नेता एक-दूसरे पर घोटालों का आरोप लगाने को ही तरजीह देते हैं। आईबी एलर्ट के बावजूद घुसपैठ के मामले पर गिल ने किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया।

हालांकि उनका कहना है कि सूचना केवल एलर्ट तक नहीं सिमटनी चाहिए, बल्कि लगातार गतिविधियों की जानकारी भी राज्यों से साझा की जानी चाहिएं, ताकि सही समय पर सही कार्रवाई हो सके। उन्होंने कहा कि सीमा पर फेंसिंग और लाइट का सुझाव उन्होंने सरकार को भेजा था। फेंसिंग हो चुकी है, लेकिन लाइट नहीं लगी।

पंजाब में पुनर्जीवित नहीं हो सकता आतंकवाद

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पंजाब में आतंकवाद दोबारा पनपने की संभावनाओं से इनकार करते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि हालांकि पाकिस्तान में मौजूद खालिस्तानियों के आका दोबारा आतंकवाद का बीज बोने का दवाब बना रहे हैं, लेकिन पंजाब के लोग अमन पसंद हैं। वे बहाल हुई खुशहाली नहीं खोना चाहते।

दविंदरपाल भुल्लर व खेड़ा की पंजाब में शिफ्टिंग के बाद आतंकवाद दोबारा पनपने की संभावना पर उन्होंने कहा कि दगे हुए कारतूस कुछ नहीं कर पाएंगे। हालांकि उन्होंने इन दोनों कैदियों को अमृतसर जेल में शिफ्ट करने पर चिंता जताई।

कहा कि अमृतसर जेल शुरू से ही विवादों में रही है। जेल स्टाफ की मिलीभगत से कई कारनामे सामने आए। निहंग सिंह अजीत सिंह पूहला की हत्या भी इसी जेल में हुई थी।

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