संगरूर के सियासी समीकरण: बागियों से परेशान कई दल, ढींडसा की पार्टी का भी दिख रहा प्रभाव, दामन बाजवा की नामांकन वापसी चर्चा में
संगरूर जिले में कई राजनीतिक दल अपने बागियों से परेशान हैं। यह बागी पार्टी का खेल बिगाड़ सकते हैं। वहीं सुखदेव सिंह ढींडसा की पार्टी शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) का भी प्रभाव देखने को मिल रहा है। अब सभी दल अपनी ताकत झोंकने में लगे हैं।
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लंबे समय तक अकाली दल का गढ़ रहे संगरूर - बरनाला क्षेत्र में नई सियासी तस्वीर बनने के आसार नजर आ रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा का अकाली दल बादल से अलग होकर नई पार्टी (अकाली दल संयुक्त) बनाने का व्यापक असर जिला संगरूर व बरनाला की सियासत पर पड़ता दिखाई दे रहा है। सियासी जानकार मान रहे हैं कि बदले समीकरण से इस इलाके की सियासत नई करवट लेगी। इसके अलावा विभिन्न पार्टियों से निकलने वाले बागी भी नए सियासी समीकरणों को जन्म देंगे।
सियासत पर नजर रखने वालों की मानें तो संगरूर व बरनाला की दसों विधानसभा सीटों पर अकाली दल के प्रत्याशियों को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अकाली वोट बैंक में होने वाले संभावित बिखराव का लाभ विपक्षी दलों को मिल सकता है। कई सीटों पर अकाली दल संयुक्त के प्रत्याशी अकाली दल बादल के मुकाबले बेहतर स्थिति में नजर आ रहे हैं।
बता दें कि संगरूर संसदीय क्षेत्र सुखदेव सिंह ढींडसा का गृह इलाका है और इलाके में उनकी सियासी पकड़ मजबूत है। जानकार मानते हैं कि ढींडसा समर्थक इस इलाके की सीटों का परिणाम बदलने की क्षमता रखते हैं। 2012 विस चुनाव में अकाली दल ने सात में से पांच सीटों और कांग्रेस ने दो पर जीत दर्ज की थी। जबकि 2017 विस चुनाव में अकाली दल को महज एक सीट पर जीत नसीब हुई थी। कांग्रेस ने चार सीटें और आप ने दो सीटें जीती थीं। यहां से अकाली दल को बसपा से गठबंधन का फायदा होने की उम्मीद है।
बागियों की भूमिका रहेगी अहम
विभिन्न सियासी दल बागियों से परेशान हैं और इनकी भूमिका अहम रहने वाली है। सुनाम में कांग्रेस के भीतर बगावत है तो लहरागागा में आम आदमी पार्टी में भीतरघात का खतरा मंडरा रहा है। संगरूर में भी आम आदमी पार्टी के लिए हालात ठीक नहीं हैं। इसी सीट पर कांग्रेस को अपनों की गतिविधियों पर तीखी नजर रखनी पड़ रही है। धूरी में आप ने बागी स्वर शांत कर दिए हैं। बरनाला में कांग्रेस के लिए खुद को एकजुट रखना बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
दामन बाजवा ने नामांकन लिया वापस
उधर, हिमाचल यूथ कांग्रेस के प्रभारी दामन बाजवा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन वापस ले लिया है। उनके कवरिंग प्रत्याशी घनश्याम कांसल ने भी अपना नामांकन वापस लिया है। कांग्रेस ने यहां से जसविंदर धीमान को टिकट दिया है। दोनों नेताओं के चुनाव मैदान से हटने के बाद सुनाम की सियासत में बदलाव आने की अटकलें तेज हो गई हैं।
जानकारों का मानना है कि दामन बाजवा और उनके समर्थकों का रुख यहां की सियासत की तस्वीर तय करेंगे। सुनाम विधानसभा क्षेत्र के अधीन सुनाम व लोंगोवाल नगर परिषद, चीमा नगर पंचायत समेत विभिन्न गांवों की पंचायतों की कमान दामन बाजवा के समर्थकों के हाथों में हैं। ऐसे में दामन के समर्थकों का रुख अहम रहने वाला है। दामन बाजवा ने कहा कि पार्टी ने उनके समर्थकों से संपर्क करके मान-सम्मान देने का भरोसा दिलाया है। हालांकि पार्टी के प्रति उनका भरोसा कमजोर हुआ है।