Punjab: पंजाब की किसी भी जेल से लॉरेंस ने नहीं दिया इंटरव्यू, डीजीपी गौरव यादव ने फोटो दिखा पेश किया सबूत
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई बठिंडा की हाई सिक्योरिटी जोन में बंद है। वहां पर सीसीटीवी और डबल गार्ड होते हैं। बठिंडा की हाई सिक्योरिटी जोन में आज तक मोबाइल नहीं मिले हैं।
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मूसेवाला हत्याकांड में गिरफ्तार गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल से वीडियो कॉल कर चैनल को दिए इंटरव्यू पर दो दिन के बाद गुरुवार को पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस के हेडक्वार्टर में प्रेस कांफ्रेंस कर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू बठिंडा या पंजाब की किसी भी जेल से नहीं हुआ है। उन्होंने आरोपी की दो तस्वीरे दिखाते हुए कहा जब उसे बठिंडा जेल लाया गया तो इसके बाल कटे थे और दाढ़ी-मूछ नहीं थी।
14 तारीख को इंटरव्यू के समय वह दाढ़ी और बड़े बालों में था। वहीं, उसने पीली टी शर्ट पहनी थी, वह भी उन्हें जेल में नहीं मिली है। वहीं, सोची समझी साजिश के तहत पंजाब पुलिस को बदनाम कर राज्य के माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
बठिंडा जेल में नहीं चलता फोन, रात में भी लाइट बंद नहीं होती
इसके अलावा डीजीपी ने कई चीजें गिनाईं, जिससे यह संभव हो सका कि उसका इंटरव्यू पंजाब से नहीं हुआ है। डीजीपी ने बताया कि आरोपी को 8 मार्च को राजस्थान पुलिस ने रिमांड खत्म होने के बाद बठिंडा जेल पहुंचाया। उसे नौ मार्च को तलवंडी साबो अदालत में पेश कर एक दिन का रिमांड लिया गया। 10 मार्च को दोबारा बठिंडा जेल में लाया गया, जबकि इंटरव्यू 14 मार्च को प्रसारित हुआ। आरोपी को बठिंडा हाई सिक्योरिटी जेल में रखा गया था। वहां पर हार्ड कोर क्रिमिनल रखे जाते हैं। जहां पर एक बैरक में एक कैदी रहता। वहां पर पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के सहयोग से अति आधुनिक उपकरण स्थापित किए हैं। जहां पर फोन बिल्कुल नहीं चलते हैं। कैदी पर 24 घंटे कैमरों से नजर रखी जाती है। वहीं, दोहरा सुरक्षा पहरा रहता है। दिन में तीन से चार बार कैदियों की जांच की जाती है। जेल में रात के समय लाइट बंद नहीं होती है, कैदियों की मूवमेंट पर नजर रहती है।
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डेड जोन में इस तरह की वीडियो संभव नहीं
डीजीपी ने बताया कि इस इंटरव्यू की क्वालिटी बहुत अच्छी थी, जो स्टूडियो की तरह लगी है। बठिंडा जेल कम्युनिकेशन डेड जोन में आती है। यहां पर अति आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया गया है। यहां पर कॉल करना संभव नहीं है। इसके अलावा इंटरव्यू में जग्गू भगवानपुरिया का कोई जिक्र नहीं है जबकि कुछ समय उनमें टकराव चल रहा था। गोइंदवाल जेल के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इससे यह साफ है कि उक्त इंटरव्यू पुराना है। लॉरेंस के इंटरव्यू शुरू होने के 30 सेकेंड के बाद किसी दूसरी जेल का जिक्र होता है जिससे यह साफ होता है कि वह पंजाब में नहीं है।
पंजाब की जेलों से बचता रहा है लॉरेंस
लॉरेंस बिश्नोई ने खुद को पंजाब की जेल से बचाने के लिए लंबी जंग लड़ी थी। इतना ही नहीं वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गया। हालांकि जैसे ही सिद्धू मूसेवाला की हत्या हुई तो पंजाब पुलिस की टीम कानूनी लड़ाई के बाद उसे पंजाब लेकर आई है। आरोपी का नौ साल से अधिक समय पंजाब की बाहरी जेलों में गुजारा है। भले ही उसने यहां पर वारदातों को अंजाम दिया हो।
अभी चिट्ठी नहीं देखी, देंगे जवाब: डीजीपी
जब पत्रकारों ने डीजीपी से सवाल किया कि इंटरव्यू वाली घटना से पंजाब पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं, पंजाब पुलिस की छवि तक खराब हो रही है। क्या इस मामले की उचित जांच के लिए एनआईए या किसी एजेंसी की मदद लेंगे। इस पर उनका जवाब था कि पंजाब पुलिस खुद इस मामले की जांच में सक्षम है। जेल विभाग जांच कर रहा है। वहीं, उनसे पूछा गया कि क्या मुख्य सचिव ने इस मामले में जांच का कोई आदेश दिया है, साथ ही आपसे रिपोर्ट मांगी है। इस पर डीजीपी का जवाब था कि वह जी-20 के चलते अमृतसर में थे। उन्होंने चिट्ठी नहीं देखी है, चिट्ठी देखकर वह जवाब देंगे।