सबसे बड़ा योद्धा: 77 लोगों से मिला पॉजिटिव, बाद में हो गई मौत, मास्क की वजह से सब मिले निगेटिव
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कोरोना महामारी के खिलाफ सबसे कारगर हथियार मास्क साबित हुआ है। इसके प्रमाण पंजाब के गुरदासपुर में कई केसों पर अध्ययन करने पर सामने आए है। फेस मास्क पहन कर न सिर्फ खुद बचा जा सकता है बल्कि संक्रमण को फैलने से भी रोका जा सकता है। गुरदासपुर में सबसे पहला केस गांव भैणी पसवाल का आया था, जिसमें एक 60 साल के बुजुर्ग मरीज की मौत हो गई थी।
उक्त मरीज जालंधर के एक अस्पताल से भाई का इलाज करवा कर लौटा था। अस्पताल वालों ने उसे मास्क लगाकर रखने पर जोर दिया था। घर वापस आने पर मरीज ने मास्क नहीं उतारा और शहर के कई अस्पतालों में भी इलाज करवाया। मरीज की मौत अमृतसर में होने के बाद उसके संपर्क में आने वाले करीब 77 लोगों के सैंपल लिए गए। सभी की रिपोर्ट निगेटिव पाई गई।
दूसरा मामले में मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के संक्रमित आने से सबसे बड़ा खतरा उनके संपर्क में आए लोगों को था। बाजवा ने एक उद्घाटन समारोह में शिरकत की थी। उनके सेकेंडरी कॉटेंक्ट में कुल 110 लोगों के सैंपल लिए गए, जिसमें एक पीसीएस अधिकारी संक्रमित पाया गया। बाजवा ने फोन पर बताया मास्क का क्या महत्व है, आज वह महसूस करते है। उन्हें आज इल्म हो रहा है कि अगर उस दिन वह मास्क न लगाते तो कितने लोग संक्रमित हो सकते थे।
क्या कहते हैं एपिडेमियोलॉजिस्ट
इस संबंधी जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. प्रभजोत कलसी का कहना है कि कोरोना वायरस के खिलाफ एक मात्र हथियार मास्क व सामाजिक दूरी है। उन्होंने बताया कि कोई स्वस्थ व्यक्ति संक्रमित के संपर्क में आ जाता है और दोनो ने मास्क नहीं पहना है तो 90 प्रतिशत संक्रमित होने की संभावना होती है। सेहतमंद ने मास्क पहना है और संक्रमित ने नहीं पहना है और छह फुट की दूरी नहीं है तो संक्रमित होने की 30 प्रतिशत उम्मीद है।
संक्रमित व्यक्ति ने मास्क पहना है और स्वस्थ व्यक्ति ने नहीं पहना तो संक्रमित होने के चांस छह फुट की दूर पर पांच प्रतिशत होता है। दोनो मास्क पहना है और सामाजिक दूरी नहीं अपनाई तो 1.5 प्रतिशत चांस होता है। मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने पर कोई खतरा नहीं रहता।