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पीएम मोदी से मुलाकात से पहले पार्टी सांसदों संग कैप्टन की बैठक, एमएसपी को लेकर बनाएंगे दबाव

Wed, 29 Jan 2020 11:17 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 29 Jan 2020 11:17 PM IST
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Punjab Captain Amarinder Singh held meeting with congress MPs
सांसदों संग कैप्टन ने की बैठक। - फोटो : अमर उजाला

केंद्र सरकार के खेती लागत और मूल्य आयोग द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की नीति की समीक्षा करने संबंधी केंद्र सरकार को हाल ही में की गई सिफारिश को पंजाब के किसानों के लिए गंभीर खतरा मानते हुए सूबे के कांग्रेस सांसदों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को प्रधानमंत्री से संपर्क करके इस नीति की समीक्षा न करने की अपील करने को कहा है। 

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सतलुज-यमुना लिंक नहर केस की स्थिति संबंधी सांसदों को जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने सांसदों से अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) बिल -2019 की धारा 12 के उपबंध में संशोधन पर जोर देने को कहा ताकि पंजाब के जल संसाधनों की रक्षा की जा सके।  मीटिंग के दौरान यह भी फैसला किया गया कि पंजाब भवन दिल्ली में राज्य सरकार द्वारा अधिकारी तैनात किये जाएंगे, जो सांसदों के साथ तालमेल करने के अलावा उनके साथ पंजाब से संबंधित मसलों की जानकारी साझा करेंगे।
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मुख्यमंत्री द्वारा बुधवार को पंजाब भवन में यह मीटिंग केंद्र सरकार से जुड़े विभिन्न मसलों और अगले वित्त वर्ष के लिए बजट प्रस्तावों पर विचार करने के लिए बुलाई गई थी। संसद के दोनों सदनों के सदस्यों ने फैसला किया कि मुख्यमंत्री द्वारा खेती लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश को स्वीकार करने के खतरों संबंधी प्रधानमंत्री को अवगत करवाना चाहिए। सांसदों का मानना है कि एमएसपी पर खरीद नीति में किसी भी तरह की तबदीली पंजाब के अर्थतंत्र पर हानिकारक प्रभाव डालेगी। 

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उन्होंने आशंका जताई कि एमएसपी की खरीद का अंत करने के लिए केंद्र सरकार पहले कदम के तौर पर खरीद को सीमित कर रही है। मीटिंग में लोकसभा सांसद सदस्य डॉ. अमर सिंह, जसबीर सिंह गिल, चौधरी संतोख सिंह, परनीत कौर, मनीष तिवारी, गुरजीत सिंह औजला और मोहम्मद सदीक और राज्यसभा सदस्य शमशेर सिंह दुलो और प्रताप सिंह बाजवा भी शामिल थे।

पंजाब के गोदामों से केंद्र तुरंत हटाए सेंट्रल पूल का अनाज
मीटिंग के दौरान एमएसपी और खरीद पर विचार-विमर्श के साथ ही खाद्य एवं सार्वजनिक उपभोक्ता मामले की ओर से केंद्रीय पूल के अनाज भंडार खाली करने बारे खाद्य विभाग के एक नोट का हवाला दिया गया ताकि केंद्रीय एजेंसियों द्वारा गेहूं और धान की ढीली खरीद से राज्य को पेश समस्याओं पर विचार किया जा सके। 

विभाग द्वारा दी गई प्रस्तुति में दिखाया गया कि केंद्रीय पूल से संबंधित 140 लाख टन गेहूं और 95 लाख टन चावल का भंडार इस समय राज्य में है। इसमें से 70 लाख टन गेहूं खुले/सीएपी के अंतर्गत भंडार है। इसमें 2019-20 के रबी मंडीकरण सीजन के दौरान नरम शर्तों (यूआरएस) के अंतर्गत खरीदा 16 लाख टन गेहूं और 2018-19 के रबी मंडीकरण सीजन में खरीदा 10 लाख टन गेहूं शामिल है। हालांकि यूआरएस गेहूं के प्रयोग की समय सीमा (शैल्फ लाइफ) छह महीने है फिर भी गेहूं के आम भंडार को खुले में सिर्फ 9 महीने के लिए रखा जा सकता है। 

अनाज उठाने की गति धीरे होने के कारण पंजाब अपेक्षित जगह की बड़ी कमी से जूझ रहा है जिससे आने वाले महीनों में चावल का वितरण और अगले सीजन में धान की खरीद पर बहुत प्रभाव पड़ेगा। विभाग ने राज्य केंद्रीय पूल के अनाज भंडार को तुरंत खाली करने के लिए भारत सरकार के दखल की मांग की है और इस मसले को प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष भी उठाया जा चुका है।

बैठक में इन मुद्दों को संसद में उठाने का भी हुआ फैसला
एजेंडे के हिस्से के तौर पर मीटिंग में कुल 34 मुद्दों को विचार-विमर्श के लिए सूचीबद्ध किया गया था जिनको केंद्र के साथ गंभीरता के साथ विचारने के लिए संसद सदस्यों को हिदायत की गई है। मीटिंग में फैसला लिया गया कि राज्य सरकार संसद सदस्यों के जरिये धान के विकल्प के तौर पर मक्की की काश्त को उत्साहित करने के मामले को लगातार उठाती रहेगी। 

धान की पराली को न जलाने के बदले किसानों को 100 रुपए प्रति क्विंटल मुआवजे की माँग, डेयरी को-ऑपरेटिव के लिए टैक्स दर में कटौती और फ्री ट्रेड नैगोसिएशन से डेयरी उत्पादों को छूट देना, टेक्सटाइल सेक्टर के लिए सरहदी और चुनिंदा जिलों में आयकर एक्ट, 1961 की धारा 80 (1) (बी) अधीन छूट देने की लंबित मांग भी संसद में उठाने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही, 31000 करोड़ रुपए के फूड कैश क्रेडिट एकाउंट के निपटारे के लंबित पड़े मुद्दे को भी सांसद केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे।

सुखना झील का इको-सेंसटिव जोन

मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने संसद सदस्यों को पंजाब की हद में पड़ते इलाकों के लिए सुखना झील वन्य जीव अभयारण्य, चंडीगढ़ के आस-पास इको सेंसिटिव जोन की घोषणा के लिए केंद्र पर दबाव डालने को कहा है। उल्लेखनीय है कि इस मामले पर पंजाब सरकार हाईकोर्ट में भी हार चुकी है।

दूसरा एम्स: फिरोजपुर में पीजीआई सैटेलाइट केंद्र की स्थापना और पंजाब में दूसरा एम्स स्थापित करने के मुद्दों पर भी विस्तार के साथ चर्चा की गई।

एसजीपीसी चुनाव: पीपीसीसी के प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि सभी संसद सदस्यों को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) चुनाव में देरी का मुद्दा संसद में उठाना चाहिए ताकि इस धार्मिक संस्था को अकालियों के शिकंजे से मुक्त किया जा सके। शिरोमणि कमेटी का मौजूदा कार्यकाल साल 2016 में खत्म हो गया था।

पाक ड्रोनों के खिलाफ पुख्ता उपकरण लगाने पर जोर
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस सांसदों ने बुधवार को हुई मीटिंग के दौरान पाकिस्तान द्वारा सरहद पार से हथियारों की तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोनों पर अंकुश लगाने के लिए पुख्ता उपकरण स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया। यह मुद्दा मुख्यमंत्री द्वारा राज्यसभा और लोकसभा से कांग्रेसी संसद सदस्यों के साथ बुलाई गई मीटिंग के दौरान विचार के लिए आगे रखा गया। 

मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में दबाव बढ़ने के मद्देनजर पंजाब की सरहदों पर आईएसआई की बढ़ रही गतिविधियों पर चिंता जाहिर की। कैप्टन ने कहा कि उनकी तरफ से केंद्र के समक्ष यह मुद्दा पहले ही उठाया गया था और इसके बाद अगस्त, 2019 में भी उन्होंने इस संबंधी गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था, जब पहली बार ऐसे ड्रोनों के प्रयोग का मामला सामने आया था। 

उन्होंने भारत-पाक सरहद से ड्रोनों के जरिये हथियारों जैसे कि दूर तक मार करने वाले हथियारों की खेप की तस्करी पर गंभीर चिंता जाहिर की थी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय करार दिया था। उन्होंने अपने पत्र में जिक्र किया था कि ड्रोनों के द्वारा हथियारों, विस्फोटकों और नशों समेत गैर-कानूनी माल को सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है। 

बुधवार को मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने अपेक्षित तकनीक/ढांचा विकसित /स्थापित करने जैसे रडार जो कम उड़ान भरने वाले हवाई यंत्रों जैसे यूएवी और ड्रोनों की हलचल का पता लगा सकते हैं, लाने के लिए रणनीतियां तैयार करने की जरूरत को दोहराया है। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि ऐसे ड्रोनों के प्रयोग के विरुद्ध उचित जवाबी कार्रवाई की जरूरत है। 

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