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पंजाब सरकार करेगी मुबारक मंजिल पैलेस का अधिग्रहण, गौरवशाली है इस इमारत का इतिहास

Mon, 11 Jan 2021 11:13 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 11 Jan 2021 11:13 PM IST
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Punjab Cabinet okay to acquisition of Mubarak Manzil Palace of Malerkotla
कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

पंजाब मंत्रिमंडल ने सोमवार को जिला संगरूर के मालेरकोटला में मुबारिक मंजिल पैलेस के अधिग्रहण, संरक्षण और उपयोग की स्वीकृति दी। मुबारिक मंजिल पैलेस के अधिग्रहण को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार बेगम मुनव्वर-उल-निसा को तीन करोड़ रुपये देगी, जो उक्त संपत्ति की मालिक के रूप में राज्य सरकार को उसके सभी अधिकारों के साथ संपत्ति हस्तांतरित करने पर विचार करेंगी।

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यह निर्णय सोमवार को पंजाब कैबिनेट की बैठक में लिया गया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि यह निर्णय राज्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने और हमारे गौरवशाली अतीत के साथ युवा पीढ़ी को फिर से जोड़ने में सहायक होगा।
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यह है मुबारिक मंजिल पैलेस का इतिहास
उल्लेखनीय है कि मालेरकोटला के नवाब शेर मोहम्मद खान ने सरहिंद के सूबेदार का विरोध करते हुए श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों के पक्ष में अपनी आवाज उठाई थी। इसके चलते पंजाब के इतिहास में उनका एक सम्मानित स्थान है।
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नवाब शेर मुहम्मद खान ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दोनों छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह, जोकि उस समय सात साल और नौ साल की उम्र के थे, को जीवित ही दीवार में चिनवा देने के आदेश का खुलेआम विरोध किया था।

नवाब शेर मुहम्मद खान के इस बहादुरी भरे कदम के बारे में पता लगने पर दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया और मालेरकोटला की सुरक्षा का वचन दिया था। गुरु साहिब जी ने नवाब शेर मुहम्मद खान को श्री साहिब भी भेजा था।

बेगम मुनव्वर उल निसा ने जताई थी पैलेस सौंपने की इच्छा
बेगम मुनव्वर उल निसा ने प्रदेश सरकार को लिखा था कि मुबारक मंजिल पैलेस मालेरकोटला की वह इकलौती मालिक हैं और वे इस संपत्ति को प्रदेश या पर्यटन व सांस्कृतिक मामले विभाग सहित किसी भी व्यक्ति को देने के पूरे अधिकार रखती हैं।

इस संपत्ति की वास्तविक मालिक होने के नाते उन्होंने यह भी बताया कि यह महल बहुमंजिला विरासती संपत्ति है जो 150 साल पुरानी है और यह इमारत 32400 वर्ग फुट में फैली हुई है। इसे मालेरकोटला राज्य और पंजाब के इतिहास के अनकहे हिस्से के तौर पर भविष्य के लिए संभालने की जरूरत है। इस उद्देश्य से उन्होंने अपनी इच्छा के अनुसार कुछ शर्तों के साथ यह महल अधिग्रहण, संरक्षण और उपयोग के लिए राज्य सरकार को सौंपने की इच्छा जताई थी।

पैलेस पर है पांच करोड़ की देनदारी
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार इस प्रस्तावित पैलेस की खरीद और मौजूदा अदालती केसों के निपटारे के लिए वर्तमान संभावित वित्तीय देनदारी करीब पांच करोड़ रुपये बनती है। इसकी जमीन की कीमत का मूल्यांकन डिप्टी कमिश्नर संगरूर से करवाया गया है और पर्यटन विभाग की तरफ से भी अपने कंजरवेशन आर्किटेक्ट और चीफ जनरल मैनेजर कम चीफ इंजीनियर के जरिए मूल्यांकन कराया गया है।

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