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पंजाब कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले, नई दिव्यांगजन शक्ति योजना को भी मंजूरी

Wed, 18 Nov 2020 05:04 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 18 Nov 2020 05:04 PM IST
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Punjab cabinet news : Many important decisions taken by Punjab cabinet
पंजाब कैबिनेट - फोटो : फाइल फोटो

दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘पंजाब दिव्यांगजन शक्तिकरण योजना’ (पीडीएसवाई) को राज्य में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मंजूरी दे दी। इस योजना के पहले चरण में मौजूदा कार्यक्रमों को मजबूती दी जाएगी। वहीं, दूसरे चरण में ऐसे व्यक्तियों के सशक्तीकरण के लिए 13 अन्य नई योजनाएं बनाने का प्रस्ताव है। यह फैसला बुधवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल कैबिनेट मीटिंग में लिया गया। 

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सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से बनाई इस योजना का उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक इमारतों, परिवहन और वेबसाइटों तक पहुंच बनाकर दिव्यांगों को रुकावट रहित माहौल मुहैया करवाना है। इसके साथ ही पीडीएसवाई का लक्ष्य सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के पदों के बैकलॉग को भरना है। 
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रोजगार सृजन विभाग अगले छह महीनों के दौरान दिव्यांगों के रिक्त पदों को भरने पर और ज्यादा जोर देगा। इसके अलावा एक सलाहकार समूह के गठन का प्रस्ताव है। सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग एक संगठित वार्षिक योजना भी तैयार करेगा, जिसकी समीक्षा प्रमुख सचिव के नेतृत्व वाली योजना और निगरानी कमेटी (पीएमसी) करेगी।

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पंजाब कृषि एक्ट लागू करने का फैसला जून 2021 तक स्थगित

कोविड -19 के कारण पंजाब मंत्रिमंडल ने पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर एजुकेशन एक्ट -2017 को लागू करने का फैसला आगामी 30 जून, 2021 तक स्थगित कर दिया है। कृषि शिक्षा संबंधी प्रांतीय काउंसिल का मुख्य उद्देश्य राज्य में कालेजों/विश्वविद्यालयों की तरफ से दी जाने वाली कृषि शिक्षा व प्रशिक्षण के लिए न्यूनतम मापदंडों और दिशा-निर्देशों को निर्धारित करना है। इस एक्ट को जनवरी, 2018 में नोटीफाई किया गया था और कृषि शिक्षा दे रही संस्थाओं की तरफ से न्यूनतम दिशा-निर्देशों को एक जनवरी, 2020 तक पूरा किया जाना था।

टेलीकॉम कंपनियों को जल्द मिलेगी टावर और केबल बिछाने की अनुमति
सूचना प्रौद्योगिकी, ई-गवर्नेंस और ई-कॉमर्स को प्रोत्साहित और दूरसंचार के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए पंजाब कैबिनेट ने बुधवार को अपनी ‘सिंगल विंडो नीति’ में नए दिशा-निर्देशों को मंजूर कर लिया। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि नए दिशा-निर्देश 5 दिसंबर, 2013 और 11 दिसंबर, 2015 को नोटीफाई हुई टेलीकॉम नीति की जगह लेंगे। इसके साथ ही संशोधित नीति को ‘राइट ऑफ वे रूल्ज, 2016’ के साथ जोड़ा गया है। इस फैसले से रजिस्टर्ड टेलीकॉम ऑपरेटरों /बुनियादी ढांचा मुहैया करने वालों को सरकारी/प्राइवेट इमारतों और जमीनों पर टेलीकॉम टावर/मस्तूल/खंबे आदि लगाने के लिए मंजूरी मिलने में तेजी आएगी।

अंतराज्यीय प्रवासी कामगार नियमों में संशोधन को मंजूरी
जीएसडीपी का 2 प्रतिशत अतिरिक्त उधार लेने संबंधी केंद्र सरकार की तरफ से लगाई शर्त को पूरा करने के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने बुधवार को अंतराज्यीय प्रवासी कामगार (रोजगार के नियम और सेवा की शर्तें) पंजाब नियम, 1983 के नियम 14 में संशोधन करने और नया नियम 53-ए शामिल करने की मंजूरी दे दी। 

पंजाब जेल विकास बोर्ड नियम-2020 को मंजूरी

कैबिनेट ने पंजाब जेल विकास बोर्ड नियम, 2020 को मंजूरी दे दी है। पंजाब जेल विकास बोर्ड एक्ट 2020 (पंजाब एक्ट नंबर 10 ऑफ 2020) के अंतर्गत बोर्ड का उद्देश्य रोजमर्रा के कामकाज को आसान बनाना है। तेलंगाना की तर्ज पर यह एक्ट 17 अप्रैल 2020 को नोटीफाई किया गया था, जिसका उद्देश्य कैदियों को रचनात्मक कामों में लगाकर कैदियों पर आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाते स्व:निर्भरता के मॉडल को अपनाना है। 

ओएसडी (लिटिगेशन) की फिक्स तनख्वाह बढ़ाकर 60 हजार की
एक अन्य फैसले में कैबिनेट ने अलग-अलग विभागों में काम करते ओएसडी (लिटिगेशन) की फिक्स तनख्वाह /रिटेनरशिप में वृद्धि को मंजूरी दे दी। यह विस्तार 20 प्रतिशत करते हुए 50000 से बढ़ाकर 60000 रुपये कर दिया है। गौरतलब है कि पंजाब सिविल सचिवालय में मुख्य सचिव दफ्तर, आम राज प्रबंध, गृह मामले व न्याय, जल स्रोत, सामाजिक न्याय, सशक्तीकरण और अल्पसंख्यक, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, खाद्य एवं सिविल सप्लाई और उपभोक्ता मामले, लोक निर्माण, जल सप्लाई और सैनिटेशन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और शिक्षा विभागों में ओएसडी (लिटीगेशन) के 11 अस्थायी पदों की रचना की गई थी। शुरुआत में ओएसडी (लिटिगेशन) को 35000 रुपये निश्चित वेतन दिया जाता था। बाद में 5 दिसंबर, 2016 को कैबिनेट मीटिंग में लिए फैसले के अनुसार वेतन बढ़ाते हुए 50000 रुपये प्रति महीना कर दिया गया था। साल 2016 के बाद इस निश्चित वेतन /रिटेनरशिप में कोई विस्तार नहीं किया गया था।

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