पंजाब कैबिनेट की बैठक में जहरीली शराब मामले की गूंज, आठ बिंदुओं पर जांच करेगी पुलिस
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पंजाब में जहरीली शराब से हुई मौतों की गूंज बुधवार को हुई कैबिनेट की ऑनलाइन बैठक में सुनाई दी। सरकार ने सरकारी कामकाज पर फैसले लेने के लिए यह बैठक बुलाई थी, जिसमें मंत्रियों ने तेवर तीखे करते हुए शराब माफिया पर नकेल कसने के लिए कहा है। अंदरखाने यह बात भी उठने लगी है कि जिन क्षेत्रों में यह घटनाएं घटी हैं। उन क्षेत्रों में चेहरा दिखाना मुश्किल हो रहा है।
ऐसे में मंत्रियों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से सख्त कानन बनाने की मांग की है। मकोका की तर्ज पर ऐसे मामलों से निपटने के लिए प्रदेश में बड़ा कानून होना चाहिए, जिससे अपराधी ऐसे मामलों में साधारण तौर पर जमानत पर छूट कर बाहर न आ सकें। इस दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि पड़ोसी राज्य हरियाणा ने भी हरकोका बनाया है। ऐसे में पंजाब को भी पकोका जैसा या उससे मिलता-जुलता कोई कानून बनाना चाहिए।
कैप्टन ने कैबिनेट को आश्वासन दिया है। साथ ही विरोधी दलों को भी चेतावनी दी है कि वे सियासत करने से बाज आएं। मामले में जांच के लिए दो एसआईटी गठित की हैं। यह एसआईटी तय समय सीमा में अपनी रिपोर्ट देंगी और इनकी निगरानी एडीजीपी स्तर का एक अधिकारी करेगा।
शराब का गोरखधंधा रोकने के लिए आठ प्वाइंट बताए
- अंतरराज्यीय तस्करी का नेटवर्क तोड़ा जाए।
- स्पिरिट का कोटा किसका, कितना है इसकी जांच हो।
- शराब की कामर्शियल एक्टिविटी में कितनी खपत है जांची जाए।
- तरनतारन, गुरदासपुर और अमृतसर के साथ लगते क्षेत्रों में तस्करी की घटनाओं की समीक्षा।
- ग्रामीण एवं पंचायत विभाग भी शराब बिक्री पर नजर रखे।
- आबकारी विभाग पर कसी जाए नकेल।
- पुलिस और आबकारी विभाग के गठजोड़ की हो जांच।
- शराब की मात्रा बढ़ाने के लिए किए जाने वाले खेल पर नजर रखी जाए ।
आलाकमान की नजर पंजाब पर
कांग्रेस आलाकमान भी इस मामले में कैप्टन सरकार की कार्यप्रणाली पर नजर रख रहा है। सरकार में अब तक सभी मामलों में फ्रंट फुट पर खेलते आ रहे कैप्टन इस मामले में बैकफुट पर हैं। लिहाजा कैप्टन खुद भी इस मामले में आगबबूला हैं। उन्होंने अंदरखाने अपने अधिकारियों को पूरे मामले की अलग से पड़ताल करने के लिए कहा है।
कैबिनेट की बैठक में निशाने पर आया आबकारी विभाग
बैठक शुरू होते ही जहरीली शराब कांड चर्चा का विषय बन गया। मंत्रियों ने इस मामले में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कुछ मंत्रियों का कहना था कि लॉकडाउन के दौरान जिस तरह शराब की तस्करी और कालाबाजारी हुई। उसके बाद जहरीली शराब का मामला साफ तौर पर विभाग के अफसरों के कामकाज पर सवाल उठाता है। मंत्रियों ने इस बारे में मुख्यमंत्री से यहां तक कहा कि आबकारी विभाग के अफसरों के कामकाज का आंकलन कराया जाए और दागी अफसरों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने आबकारी विभाग के अफसरों के कामकाज की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं। वहीं, डीजीपी से भी कहा है कि जिलों में थाना स्तर पर तैनात पुलिस अफसरों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और ड्यूटी के प्रति उनकी संजीदगी का आंकलन करें ताकि अपराधियों को किसी तरह की शह न मिले।