पंजाब में नई खनन नीतिः अब कोई रसोइया नहीं लगा सकेगा रेत खड्ड की बोली, जानें और क्या हुए बदलाव
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पंजाब में अब किसी ऊंची पहुंच वाले व्यक्ति का रसोइया या नौकर रेत खड्ड के लिए बोली नहीं लगा सकेगा। बुधवार को पंजाब कैबिनेट ने स्टेट सैंड एंड ग्रेवल पालिसी-2018 को मंजूरी देते हुए अवैध खनन पर लगाम लगाने के कई सख्त उपाय किए हैं। इसके तहत प्रावधान कर दिया गया है कि 31 मार्च को खत्म होने वाले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान बोलीकारों का वार्षिक औसतन टर्नओवर, उसके द्वारा जिस माइनिंग ब्लॉक की बोली दी जानी है, की आरक्षित कीमत से 50 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए।
नई पालिसी के तहत मंत्रिमंडल ने पहले अपनाई जा रही व्यक्तिगत खानों की बोली प्रक्रिया की जगह प्रगतिशील बोली के जरिए स्थापित क्लस्टरों में खनन ब्लाकों की बोली करके ठेके देने का फैसला लिया है। इससे सरकारी खजाने को लाभ के साथ-साथ वाजिब कीमतों पर उपभोक्ताओं को सप्लाई हो सकेगी और अवैध खनन पर नकेल लगेगी।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, यह फैसला भी लिया गया कि नई नीति मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद दो माह में अमल में आ जाएगी। इसके लिए पंजाब स्टेट सैंड एंड ग्रेवल नीति -2018 को मंजूरी दी गई है और पंजाब मिनिरल रूल्स -2013 में संशोधन किए गए हैं। यह भी फैसला लिया गया है कि खनन विभाग छोटे या मध्यम उपभोक्ताओं को रेत की बिक्री के लिए पंजाब सैंड पोर्टल जारी करेगा।
सभी तबादले /भुगतान ऑनलाइन रियल टाइम मानीटरिंग सिस्टम द्वारा होंगे। इसके अलावा रेत की बिक्री को एक केंद्रीय निगरानी सुविधा से जुड़े इलेक्ट्रानिक सिस्टम से नियंत्रित किया जाएगा। पोर्टल पर रोजमर्रा की प्रगति रिपोर्ट को अपलोड किया जायेगा और हर एक ब्लाक का ठेकेदार इस पोर्टल पर रेत के भाव को दिखाएगा।
नई नीति में की गई यह व्यवस्था
चुने गए ब्लाकों में रेत और बजरी की मात्रा के लिए माइनिंग अधिकार ई-नीलामी द्वारा दिए जाएंगे। सिर्फ रजिस्टर्ड कंपनियाँ, पार्टनरशिप, सहकारी कमेटियों, इकलौती मलकियत, व्यक्ति और तीन व्यक्तियों के ग्रुप योग्य मापदंडों की पूर्ति के अनुसार खानें प्राप्त कर सकेंगे।31 मार्च में खत्म होने वाले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान बोलीकारों की वार्षिक औसतन टर्नओवर, उसके द्वारा जिस माइनिंग ब्लॉक की बोली दी जानी है, की आरक्षित कीमत से 50 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए।
ग्रुप के मामलों में सभी सदस्यों की संयुक्त तकनीकी और वित्तीय सामर्थ्य को पात्रता के लिए योग्यता के तौर पर माना जाएगा
बोलीकार यह अंडरटेकिंग देगा कि वह सभी खानों पर साइट मैनेजर, जेई स्तर के अधिकारी और सॉफ्टवेयर पेशेवर की हाजिरी यकीनी बनाएगा।
बोलीकार यह अंडरटेकिंग भी देगा कि जिस माइनिंग ब्लाक की वह बोली दे रहा है, उसके लिए अपेक्षित मशीनरी प्राप्त करेगा या अपेक्षित मशीनरी किराये पर लेगा।
ठेकेदारों को रेत और बजरी की वार्षिक मात्रा ही निकालने की मंजूरी दी जाएगी। हर ब्लाक में दिखाई मात्रा सांकेतिक होगी और यह ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी कि वह बोली देने से पहले इसका मूल्यांकन अपने स्तर पर करे।
नदी के बैड में से खनन शुरू करने से सात दिन पहले चीफ इंजीनियर ड्रेनेज़ को जानकारी देनी होगी ताकि नदी के बहाव पर प्रभाव न पड़े या उसके किनारों को नुकसान न हो।
पर्यावरण और अन्य मंजूरियों के लिए हेडक्वार्टर पर तैनात एक्सईएन नोडल अथॉरटी होंगे।
रेत और बजरी की सीमा निर्धारित की गई है। ठेकेदारों द्वारा खनन स्थानों पर रेत और बजरी 9 रुपये प्रति फुट से ज़्यादा कीमत पर नहीं बेची जाएगी।
प्रत्येक ब्लाक के ठेकेदार के लिए यह जरूरी होगा कि वह रेत की दरें विभाग द्वारा जारी किए न्यू पोर्टल पर दर्शाए।
पिछले साल रद हो गई थी बोली
वर्ष 2017-18 के दौरान चार माइनर मिनिरल खानों की उच्च दरों पर बोली हुई थी, जिस कारण रेत और बजरी की सप्लाई में बहुत कमी आ गई थी। इसके नतीजे के तौर पर इन वस्तुओं की मंडी कीमत बहुत ज़्यादा हो गई थी। इस बोली में तत्कालीन बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह के घर में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों, जिनमें रसोईया भी शामिल था, ने खानों की सबसे महंगी बोली लगाई थी। यह मामला इतना गरमाया कि राणा गुरजीत सिंह को आखिरकार इस मामले में मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। खानों की बोली में धांधली रोकने के लिए तब कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने नई खनन नीति लाने का एलान किया था।