पंजाब बजट: वित्तमंत्री ढींडसा की रणनीति, 6 अहम बातें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्ष 2014-15 के दौरान राजस्व प्राप्ति उम्मीद से कम रहने और केंद्र से आशानुरूप आर्थिक सहायता प्राप्त न होने के बावजूद पंजाब के वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा सभी सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 2015-16 का बजट पेश करने जा रहे हैं। पंजाब विधानसभा का सत्र वीरवार से शुरू हो रहा है और बजट आगामी 18 मार्च को पेश होना है।
पंजाब को केंद्र से उम्मीद के मुताबिक आर्थिक सहायता प्राप्त न होने की वजह से ढींडसा कुछ निराश तो हैं, लेकिन उम्मीद उन्होंने नहीं छोड़ी है। उनका कहना है कि वह उपलब्ध स्त्रोतों का सही इस्तेमाल करके आगे बढ़ रहे हैं तथा अभी भी आशावान हैं कि 2015-16 के बजट अनुमान फाइनल होने तक केंद्र से कुछ सकारात्मक संकेत मिल जाएंगे। इस दिशा में उनकी कोशिशें जारी हैं।
बहरहाल, बजट अनुमानों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और सभी की निगाहें वित्त मंत्री की ओर से एक हफ्ते बाद पंजाब विधानसभा में पेश किए जाने वाले बजट पर टिकी हैं। इसके विभिन्न पहलुओं पर ‘अमर उजाला’ ने वित्त मंत्री ढींडसा के साथ विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं, इस बातचीत के प्रमुख अंश :-
कैसे सभी वर्गों के साथ न्याय कर पाएंगे?
हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है कि एक बार घुमाएं और सब कुछ सही हो जाए। फिर भी चीजों को सही रास्ते की पर लाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसमें काफी हद तक कामयाबी मिली है।
हम राजस्व घाटे को पिछले वर्षों की तुलना में काफी नीचे ले आए हैं तथा विकास निरंतर जारी है। वर्ष 2014-15 की वार्षिक योजना वित्त वर्ष की समाप्ति तक 70 फीसदी लागू हो जाएगी।
अगले साल के लिए कोशिश रहेगी कि यह आंकड़ा 90 प्रतिशत को पार करे। इसके लिए राजस्व प्राप्तियां बढ़ाने पर ज्यादा ध्यार केंद्रित किया जाएगा। इस बार प्लान के केवल 70 फीसदी लागू होने का कारण राजस्व प्राप्तियों का उम्मीद से कम रहना रहा।
किन-किन सेक्टरों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित होगा?
यूं तो सभी सेक्टरों को जरूरत के मुताबिक तवज्जो दी जाएगी, लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि तथा उद्योगों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित रहेगा। इसके अलावा आधारभूत ढांचे और सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र हमेशा ही प्राथमिकता सूची में रहे हैं तथा इस बार भी होंगे।
सड़कों तथा अन्य निर्माण कार्यों के लिए अधिक से अधिक राशि उपलब्ध करवाने की कोशिश की जाएगी। वहीं, स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के साथ आधुनिकीकरण को ध्यान में रखते हुए कंप्यूटर लैब्स के मजबूतीकरण पर जोर रहेगा। छात्रों को टैब्स देने या न देने का फैसला शिक्षा विभाग की इच्छा पर निर्भर करेगा।
इस बार वार्षिक योजना का आकार क्या रहेगा?
जैसा कि मैंने पहले कहा हमारी कोशिश यह है कि वार्षिक योजना 90 फीसदी से ज्यदा लागू हो। इसलिए 2015-16 में आकार की बजाय इसकी इंप्लीमेंटेशन पर हमारा अधिक जोर है।
2014-15 के लिए 2013-14 के मुकाबले योजना में 25 फीसदी इजाफा किया गया था और यह 20100 करोड़ी की थी। इस बार इसमें 5 से 10 फीसदी की वृद्धि की जाएगी। मैं योजना का सही आकार तो इस वक्त नहीं बता सकता, लेकिन यह 21 से 22 हजार करोड़ के आसपास रहेगी।
क्या प्रदेश में ग्रोथ आपकी उम्मीद के मुताबिक रही?
हमने 15 फीसदी ओवरऑल ग्रोथ का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन यह नौ फीसदी तक ही पहुंच पाई। इसकी मुख्य वजह फिर वही राजस्व का उम्मीद से कम रहना ही रहा।
इसके अलावा 14वें वित्तायोग ने निराश किया। कर्ज के बोझ तले दबे राज्यों की सूची से बाहर हो जाने की वजह से पंजाब को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हो पाई।
चालू वित्त वर्ष के दौरान केंद्रीय स्कीमों की 100 फीसदी इंप्लीमेंटेशन और वैट कलेक्शन 20 फीसदी बढ़ाने का हमारा लक्ष्य था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। केंद्र के पास रुके हुए करोड़ों रुपये भी हमें नहीं मिल पाए। यह सब ग्रोथ का टार्गेट हासिल न होने में बाधक रहा।
क्या अगले वित्त वर्ष में गाड़ी पटरी पर आ जाएगी?
उम्मीद पर दुनिया कायम है। हमने केंद्र सरकार के पास फिर से अपना पक्ष रखा है। केंद्रीय वित्त मंत्री से विस्तृत बात हुई है। उम्मीद है कि वह हमें विशेष आर्थिक मदद उपलब्ध करवाएंगे। इसके अलावा 2015-16 में हमारी कोशिश रहेगी कि राजस्व प्राप्तियां 10-12 फीसदी तक रहें, ताकि पंजाब सरकार राज्य में विकास की गति को निरंतर कायम रख सके।
वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले यह आपका सेकंड लास्ट बजट है। अगले वर्ष आपको चुनाव को ध्यान में रखते हुए लोकलुभावन बजट देना होगा। इन परिस्थितियों में पंजाब की जनता अपने युवा वित्त मंत्री से 2015-16 के बजट में क्या उम्मीद कर सकती है?
समय कोई भी हो, हमारी कोशिश हमेशा जनपक्षीय रहने की होती है। 2015-16 के बजट में भी ऐसा ही होगा। सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए, बहुत ही संतुलित बजट पेश किया जाएगा।