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सीएए के विरोध में पंजाब बंद का मिला जुला असर, फतेहगढ़ साहिब में पुलिस ने भांजी लाठियां

Sat, 25 Jan 2020 08:11 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पंजाब
संवाद न्यूज एजेंसी, पंजाब Published by: ajay kumar Updated Sat, 25 Jan 2020 08:11 PM IST
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Punjab Band today, protests against CAA
पंजाब बंद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

दल खालसा, शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) समेत कुछ संगठनों द्वारा सीएए के विरोध में बुलाया गया बंद अधिकतर जगहों पर बेअसर रहा है। हालांकि अमृतसर में दुकानें बंद रहीं। अमृतसर के शहरी इलाकों में दुकानदारों ने दुकानें नहीं खोली। सिख संगठनों ने पुराने व नए शहर को जोड़ने वाले भंडारी पुल पर प्रदर्शन किया। 

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इन संगठनों के सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम भाईचारे के लोग भी शामिल हुए। हाथों में उठाये बैनरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह पर टिप्पणियां की गई थीं। बाद में इन संगठनों के सदस्यों ने बाजार में जाकर दुकानें बंद करवाईं। दल खालसा के प्रवक्ता कंवर पाल सिंह ने कहा की केंद्र सरकार देश में अल्पसंख्यकों को दबाने के लिए उक्त कानून लागू कर रही है। सीमावर्ती गांवों में बंद का असर नहीं हुआ। अजनाला व लोपोके में बाजार खुले रहे। शाम को शहर में भी कई दुकानें खुल गईं।
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जालंधर में बंद बेअसर
सिख संगठन दल खालसा व अकाली दल (अमृतसर) द्वारा बुलाया गया पंजाब बंद जालंधर में भी बेअसर रहा है। जालंधर के सभी बाजार सामान्य दिनों की तरह ही खुले रहे और लोगों चहल पहल दिखाई दी। पुलिस की तरफ से सख्त नाकेबंदी व चौकसी बरती जा रही थी। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दल खालसा व अकाली दल (अमृतसर) ने 25 जनवरी को बंद बुलाया था। 

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इसके लिए सोशल मीडिया पर बाकायदा प्रचार भी किया गया था। इसको शहर में समर्थन बिल्कुल नहीं मिला था, तमाम संगठनों ने किनारा किया। शहर के शिक्षण संस्थान भी सामान्य दिनों की तरह खुले रहे। 

गुरदासपुर में बंद का कोई असर नही, खुले रहे बाजार
 विभिन्न संगठनों द्वारा केंद्र के मोदी सरकार के खिलाफ रोष मार्च निकालने के तहत दी गई बंद की कॉल को शहर में समर्थन नहीं मिला। शहर के बाजार रोजाना की तरह खुले रहे। इस मौके पर सर्वप्रथम सिख संगठन तथा अन्य समुदाय के लोगों के साथ तिबड़ी रोड पर स्थित गुरुद्वारा साहिब में एकत्रित हुए। 

इसके बाद वहां से केंद्र सरकार के खिलाफ रोष मार्च निकालते हुए रास्ते में खुली दुकानों के मालिकों को हाथ जोड़कर उनका समर्थन करने की अपील की गई। रोष मार्च हनुमान चौक लाइब्रेरी चौक डाकखाना चौक पुरानी सब्जी मंडी चौक से होता हुआ परशुराम चौक में पहुंचा जहां उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए जमकर नारेबाजी की।

चप्पे चप्पे पर तैनात रही पुलिस 
इस प्रर्दशन के चलते पुलिस ने शहर में बेहद पुख्ता इंतजाम किए हुए थे। जिसका मुख्य कारण गुरदासपुर में राज्य स्तरीय होने वाले गणतंत्र दिवस पर पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर का आगमन था। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस की ओर से पहले से ही पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बाजारों में जाने से मना किया था ताकि कोई अप्रिय घटना न घट सके। 

बठिंडा में भी निकाला रोष मार्च
सीएए, एनआरसी समेत कश्मीर से धारा 370 हटाने का विरोध कर रहे अकाली दल अमृतसर एवं दल खालसा की ओर से शनिवार को पंजाब बंद का आह्वान बेअसर रहा। जिला प्रशासन की ओर से सुबह से ही शहर के मुख्य बाजारों में भारी पुलिस फोर्स बल तैनात कर दिया गया था। अकाली दल अमृतसर के जिला अध्यक्ष परिमंदर सिंह बालियांवाली और दल खालसा के नेताओं की अगुवाई में शहर के मुख्य बाजारों में से काले झंडे लेकर रोष मार्च निकाला गया। 

जत्थेबंदियों के नेताओं ने शहर में खुली दुकानों को बंद करने के लिए अपील भी की लेकिन किसी भी व्यापारी ने उक्त जत्थेबंदी के नेताओं की कोई बात नहीं सुनी। इस मौके मुस्लिम समाज के लोग जत्थेबंदियों के साथ नहीं दिखे। अकाली दल अमृतसर के नेता बालियांवाली ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश विरोधी निर्णय लेकर देश के व्यापारियों को बर्बाद कर दिया। सीएए एवं एनआरसी से देश में लगातार माहौल खराब हो रहा है। अगर कोई भी अनहोनी घटना हुई तो उसकी जिम्मेदारी केंद्र की होगी।

फतेहगढ़ साहिब में सीएए का विरोध, पुलिस ने भांजी लाठियां

Punjab Band today, protests against CAA
पंजाब बंद

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) ने फतेहगढ़ साहिब में भी बंद बुलाया था। बंद का असर पार्टी के हेड क्वार्टर फतेहगढ़ साहिब में देखने को मिला। सुबह होते ही शिअद अमृतसर के कार्यकर्ता भारी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों को साथ लेकर सरहिंद भट्टी चौक पर रोड जाम करके बैठ गए। 

नारेबाजी करते हुए रोष मार्च के रूप में प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे पुल पर जैसे ही जाम लगाने के लिए वाहन रोके तो भारी संख्या में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ दिया और उन पर लाठियां भांजीं। इस मौके पर शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के हलका इंचार्ज कुलदीप सिंह पहलवान को भी पुलिस ने धक्कामुक्की करते हुए पुल से नीचे उतार दिया और दोबारा पुल पर चढ़ने की कोशिश की तो पुलिस का उग्र रवैया देख सभी प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए। 

जैसे ही सरहिंद ओवरब्रिज पर प्रदर्शनकारियों ने ट्रैफिक रोकना चाहा तो पुलिस ने खूब डंडे बरसाए और चंद मिनट में प्रदर्शनकारी वहां से चलते बने। पुलिस की मुस्तैदी से बंद की काल का असर कुछ ही पलों में फीका पड़ गया। इसके अलावा जिले के अन्य शहरों मंडी गोबिंदगढ़, अमलोह, सरहिंद, बस्सी पठाना व खमाणो में बंद का असर नाममात्र रहा। 

संगरूर में बंद बेअसर, मालेरकोटला मुकम्मल बंद

बंद का असर संगरूर में देखने को नहीं मिला। शहर के सभी बाजार आम दिनों की तरह खुले रहे। वहीं मालेरकोटला दिनभर मुकम्मल तौर पर बंद रहा। इस दौरान जगह-जगह प्रदर्शन भी हुए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार अपने बनाए सीएए और एनआरसी कानूनों को वापस नहीं लेती तब तक संघर्ष जारी रखा जाएगा। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने काली झंडियां, सिर पर काली पट्टियां और हाथों में झंडे पकड़े हुए थे।
 
होशियारपुर में बंद समर्थक और विरोधी आमने-सामने 
बंद के दौरान शनिवार को होशियारपुर में स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। दिनभर बंद समर्थकों और विरोधियों की आंख मिचौली चलती रही। दुकानदार कभी दुकानें बंद करते तो कभी खोलते। शनिवार को तनाव उस समय बढ़ जब बंद समर्थकों की तरफ से निकाले जा रहे विरोध मार्च को रोकने के लिए घंटा घर चौक पर सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के बाहर भाजपाई आ डटे। 

जहां बंद समर्थक मार्च निकालने पर अड़ गए वहीं भाजपाई मार्च न निकालने देने पर अड़े रहे। पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह स्थिति को संभाला। सुबह से ही दोनों पक्ष अपने अपने स्तर पर बंद को कामयाब और नाकाम बनाने की कोशिशों में जुटे थे। भाजपाई मंडल अध्यक्ष विजय पठानिया और महासचिव पार्षद निपुण शर्मा के नेतृत्व में दुकानें खुलवाने में जुटे थे तो विभिन्न सिख संगठनों और दलित जत्थेबंदियों के लोग बंद कराने में जुटे थे। 

हालांकि घंटाघर चौक पर हुए तनाव के चलते सुबह से ही दुकानें खुलवाने में जुटे भाजपाइयों का दांव उल्टा पड़ता दिखा। विवाद पांच घंटे तक चला। शनिवार सुबह दल खालसा, शिरोमणिअकाली दल (अमृतसर), अम्बेडकर फोर्स, श्री गुरू रविदास फोर्स, भगवान वाल्मीकि धर्म रक्षा संघ, क्रिश्चियन नेशनल फ्रंट और मुस्लिम भाईचारे के नेताओं की तरफ से प्रभात चौक से मार्च निकाला गया और जो दुकानों खुलीं हुई थीं उन्हें बंद कराया गया। दूसरी तरफ बंद का विरोध करने वालों में शामिल पूर्व कैबिनेट मंत्री तीक्ष्ण सूद ने कहा कि यह जत्थेबंदियां जानबूझ कर लोगों को गुमराह कर रही हैं। केंद्र सरकार की तरफ से जो भी कानून के पास किया है वह देश वासियों के हित में है। 

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