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पानी के मुद्दे पर सदन में जबरदस्त हंगामा, कांग्रेस विधायक निलंबित
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 11 Mar 2016 09:56 AM IST
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पंजाब विधानसभा सत्र
- फोटो : अमर उजाला
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पानी के मुद्दे पर सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई। आखिरकार स्पीकर ने कांग्रेस के सभी विधायकों को दिन भर के लिए निलंबित कर दिया। सरकार ने पानी के मुद्दे पर प्रस्ताव पेश किया, विपक्ष उसमें संशोधन चाहता था।
स्पीकर ने संशोधन को खारिज कर दिया। फिर कांग्रेसी सीएम प्रकाश सिंह बादल के पहले बोलने के खिलाफ अड़ गए। सीएम बादल ने जैसे ही पानी के पानी के मुद्दे पर महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास करने केलिए रखा, सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस पर कुछ संशोधन दिए हैं, इन्हें शामिल किया जाए।
स्पीकर चरणजीत सिंह अटवाल ने कहा कि संशोधन का प्रस्ताव देरी से दिया गया है, उसकी भाषा भी ठीक नहीं है, इसलिए उसे खारिज कर दिया गया। कांग्रेसियों ने कहा कि संशोधन पढ़ा जाए, उसे भी स्पीकर ने नकार दिया।
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स्पीकर ने कहा कि प्रस्ताव सीएम लाए हैं, इसलिए पहले उन्हें बोलने का मौका मिलेगा। सभी पार्टियों को समय अलॉट कर दिया गया है, कांग्रेस अपनी बारी में पक्ष रखे। इस पर कांग्रेसी नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए।
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स्पीकर ने संशोधन को खारिज कर दिया। फिर कांग्रेसी सीएम प्रकाश सिंह बादल के पहले बोलने के खिलाफ अड़ गए। सीएम बादल ने जैसे ही पानी के पानी के मुद्दे पर महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास करने केलिए रखा, सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस पर कुछ संशोधन दिए हैं, इन्हें शामिल किया जाए।
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स्पीकर चरणजीत सिंह अटवाल ने कहा कि संशोधन का प्रस्ताव देरी से दिया गया है, उसकी भाषा भी ठीक नहीं है, इसलिए उसे खारिज कर दिया गया। कांग्रेसियों ने कहा कि संशोधन पढ़ा जाए, उसे भी स्पीकर ने नकार दिया।
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स्पीकर ने कहा कि प्रस्ताव सीएम लाए हैं, इसलिए पहले उन्हें बोलने का मौका मिलेगा। सभी पार्टियों को समय अलॉट कर दिया गया है, कांग्रेस अपनी बारी में पक्ष रखे। इस पर कांग्रेसी नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए।
र्कावाही शुरू होते ही कांग्रेसी करने लगे नारेबाजी
पंजाब विधानसभा सत्र
- फोटो : अमर उजाला
उधर, जवाब में अकालियों ने 1982 में इंदिरा गांधी के स्वागत में लगे कैप्टन अमरिंदर के विज्ञापन की बड़ी फोटो लहराना शुरू कर दिया। 12.26 बजे पहली बार सदन की कार्यवाई एक बजे तक स्थगित की गई। कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेसियों ने फिर नारेबाजी शुरू कर दी।
डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने कहा कि यह ऐतिहासिक प्रस्ताव है, इससे भागने वालों को पंजाब की जनता माफ नहीं करेगी। दोनों पक्षों की ओर से जबरदस्त नारेबाजी शुरू हो गई। 1.06 बजे कार्यवाही फिर 1.20 बजे तक स्थगित कर दी गई।
फिर सीएम बादल ने बोलना शुरू किया कि जो प्रस्ताव से भागेगा, वह पंजाब का दुश्मन है। मुझे बोलने दो कि इस मुद्दे पर सब कुछ कांग्रेसियों ने किया है, अगर साबित न कर सका तो इस्तीफा दे दूंगा। कांग्रेस ने फिर पहले बोलने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने कहा कि यह ऐतिहासिक प्रस्ताव है, इससे भागने वालों को पंजाब की जनता माफ नहीं करेगी। दोनों पक्षों की ओर से जबरदस्त नारेबाजी शुरू हो गई। 1.06 बजे कार्यवाही फिर 1.20 बजे तक स्थगित कर दी गई।
फिर सीएम बादल ने बोलना शुरू किया कि जो प्रस्ताव से भागेगा, वह पंजाब का दुश्मन है। मुझे बोलने दो कि इस मुद्दे पर सब कुछ कांग्रेसियों ने किया है, अगर साबित न कर सका तो इस्तीफा दे दूंगा। कांग्रेस ने फिर पहले बोलने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
विपक्ष की गैर मौजूदगी में पेश किया गया प्रस्ताव
पंजाब विधानसभा सत्र
- फोटो : अमर उजाला
स्पीकर ने कहा कि यह संवैधानिक प्रक्रिया है, प्रस्ताव लाने वाला ही पहले बोलता है। आखिर 1.25 बजे कार्यवाही फिर 1.40 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। फिर चन्नी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार के साथ है, पर प्रस्ताव में संशोधन किया जाए।
सीएम को संशोधन पढ़ा दो, अगर वह कहते हैं कि गलत है तो इनकी बात सुन लेंगे, लेकिन न स्पीकर इस पर राजी हुए, न सत्तापक्ष और फिर दोनों तरफ से नारेबाजी शुरू हो गई। आखिर दो बजे संसदीय कार्यमंत्री मदन मोहन मित्तल के प्रस्ताव के बाद कांग्रेस के बलबीर सिद्धू और सुखजिंदर रंधावा को कार्यवाही में विघ्न डालने पर दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया। 2.03 बजे कार्यवाही फिर 2.20 बजे तक के लिए स्थगित हुई।
स्पीकर ने अनुशासन और मर्यादा की अपील की, पर कांग्रेसियों का रुख नहीं बदला। आखिर 2.35 बजे मित्तल के प्रस्ताव के बाद विघ्न डालने के लिए कांग्रेस केसभी विधायकों को दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया। कांग्रेसियों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में विपक्ष की गैर-मौजूदगी में सीएम ने प्रस्ताव पेश किया।
सीएम को संशोधन पढ़ा दो, अगर वह कहते हैं कि गलत है तो इनकी बात सुन लेंगे, लेकिन न स्पीकर इस पर राजी हुए, न सत्तापक्ष और फिर दोनों तरफ से नारेबाजी शुरू हो गई। आखिर दो बजे संसदीय कार्यमंत्री मदन मोहन मित्तल के प्रस्ताव के बाद कांग्रेस के बलबीर सिद्धू और सुखजिंदर रंधावा को कार्यवाही में विघ्न डालने पर दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया। 2.03 बजे कार्यवाही फिर 2.20 बजे तक के लिए स्थगित हुई।
स्पीकर ने अनुशासन और मर्यादा की अपील की, पर कांग्रेसियों का रुख नहीं बदला। आखिर 2.35 बजे मित्तल के प्रस्ताव के बाद विघ्न डालने के लिए कांग्रेस केसभी विधायकों को दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया। कांग्रेसियों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में विपक्ष की गैर-मौजूदगी में सीएम ने प्रस्ताव पेश किया।
पानी के मुद्दे पर पंजाब सरकार का प्रस्ताव
पंजाब विधानसभा सत्र
- फोटो : अमर उजाला
पानी के मुद्दे पर सरकार की ओर से सदन में पेश किए प्रस्ताव में कहा गया है कि पंजाब एक खेती प्रधान सूबा है। नदियों का पानी इसकी जिंदगी है, पर देश के बंटवारे के बाद इस अहम और गंभीर मुद्दे पर पंजाब के साथ लगातार नाइंसाफी होती आई है। राइपेरियन सिद्धांत के मुताबिक पंजाब की नदियों के पानी पर सूबे का पूरा हक बनता है। इसके बावजूद शुरू से ही अलग-अलग समझौतों और फैसलों के जरिए पंजाब के इस हक पर दिन-दहाड़े डाका मारा जाता रहा है।
दरियाई पानी केमालिक होने केबावजूद पंजाब के किसानों को खेती संबंधी अपनी जरूरतों केलिए 73 फीसदी पानी ट्यूबवेलों से लेना पड़ रहा है, जिससे भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। स्थिति भयानक मोड़ पर पहुंच गई है। इस नाइंसाफी को बर्दाश्त करना पंजाब व पंजाबियों के मौत के वारंट पर दस्तखत करना होगा। पंजाब को किसी को देने केलिए पानी की एक बूंद नहीं है।
यह सदन सर्वसम्मति से संकल्प करता है कि पंजाब के दरियाई पानी पर पंजाब विरोधी फैसला मंजूर नहीं किया जाएगा। देश व दुनिया में प्रचलित राइपेरियन सिद्धांतों का उल्लंघन कर रावी-ब्यास का पानी पंजाब से छीनने केलिए एसवाईएल केनिर्माण का फैसला जबरन पंजाबियों पर थोपने की कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। यह सदन सर्वसम्मति से संकल्प करता है कि सभी पंजाबी व सियासी पार्टियां आपसी विरोध से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर एक मत होकर पंजाबियों केहितों की रक्षा करेंगी।
दरियाई पानी केमालिक होने केबावजूद पंजाब के किसानों को खेती संबंधी अपनी जरूरतों केलिए 73 फीसदी पानी ट्यूबवेलों से लेना पड़ रहा है, जिससे भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। स्थिति भयानक मोड़ पर पहुंच गई है। इस नाइंसाफी को बर्दाश्त करना पंजाब व पंजाबियों के मौत के वारंट पर दस्तखत करना होगा। पंजाब को किसी को देने केलिए पानी की एक बूंद नहीं है।
यह सदन सर्वसम्मति से संकल्प करता है कि पंजाब के दरियाई पानी पर पंजाब विरोधी फैसला मंजूर नहीं किया जाएगा। देश व दुनिया में प्रचलित राइपेरियन सिद्धांतों का उल्लंघन कर रावी-ब्यास का पानी पंजाब से छीनने केलिए एसवाईएल केनिर्माण का फैसला जबरन पंजाबियों पर थोपने की कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। यह सदन सर्वसम्मति से संकल्प करता है कि सभी पंजाबी व सियासी पार्टियां आपसी विरोध से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर एक मत होकर पंजाबियों केहितों की रक्षा करेंगी।
चन्नी बोले, पंजाब सरकार ने किया लोकतंत्र का कत्ल
पंजाब विधानसभा सत्र
- फोटो : अमर उजाला
सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने कहा है कि सरकार ने लोकतंत्र का कत्ल किया है। पानी के अहम मुद्दे पर बहस के दौरान सारे विपक्ष को बाहर निकाल दिया गया। पत्रकारों से बातचीत में चन्नी ने कहा कि विपक्ष को उकसाया गया कि वाकआउट करें और बहस का हिस्सा न बनें, पर विपक्ष ने ऐसा नहीं किया। हम चाहते थे कि बहस हो। सरकार के प्रस्ताव में ऐसी कोई बात नहीं थी, जिससे पानी के मुद्दे पर कोई नई पहल हो, सिर्फ सियासी पार्टियों से अपील की गई थी। केंद्र के स्टैंड वाली बात ही नहीं है, विपक्ष संशोधन लाया था, पर नहीं माना।
चन्नी ने कहा कि जब एसवाईएल केलिए पहली बार जमीन एक्वायर हुई थी तो बादल ही सीएम थे। राजीव-लोंगोवाल समझौते में भी इन्होंने एसवाईएल को स्वीकार किया था। एसवाईएल निर्माण शुरू करवाने में हरियाणा से दो करोड़ का चेक भी इन्होंने ही लिया। बादल ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं किया, हमेशा लोगों की भावनाओं से खेलते रहे। कांग्रेस की मांग थी कि प्रस्ताव ऐसा लाएं जिससे पानी के मुद्दे पर पंजाब का कोई फायदा हो। विपक्ष की मांग थी कि एसवाईएल केलिए किसानों की जो जमीन एक्वायर की गई थी, उसे वापस कर दिया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि बादल का पीएम नरेंद्र मोदी और चौटाला परिवार के साथ गठजोड़ है। जब से केंद्र का स्टैंड सामने आया है, राज्य सरकार की ओर से न तो कोई पत्र लिखा गया, न बयान जारी हुआ और न ही कोई दिल्ली यह कहने गया कि केंद्र ने गलत किया। अगर बादल पंजाब के हितैषी होते तो हरसिमरत कौर का इस्तीफा दिलवा कर भाजपा से गठबंधन तोड़ लेते। आज का प्रस्ताव दिखावा है। इसमें केंद्र या राज्य सरकारों को कोई निर्देश तक नहीं दिए गए हैं।
चन्नी ने कहा कि जब एसवाईएल केलिए पहली बार जमीन एक्वायर हुई थी तो बादल ही सीएम थे। राजीव-लोंगोवाल समझौते में भी इन्होंने एसवाईएल को स्वीकार किया था। एसवाईएल निर्माण शुरू करवाने में हरियाणा से दो करोड़ का चेक भी इन्होंने ही लिया। बादल ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं किया, हमेशा लोगों की भावनाओं से खेलते रहे। कांग्रेस की मांग थी कि प्रस्ताव ऐसा लाएं जिससे पानी के मुद्दे पर पंजाब का कोई फायदा हो। विपक्ष की मांग थी कि एसवाईएल केलिए किसानों की जो जमीन एक्वायर की गई थी, उसे वापस कर दिया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि बादल का पीएम नरेंद्र मोदी और चौटाला परिवार के साथ गठजोड़ है। जब से केंद्र का स्टैंड सामने आया है, राज्य सरकार की ओर से न तो कोई पत्र लिखा गया, न बयान जारी हुआ और न ही कोई दिल्ली यह कहने गया कि केंद्र ने गलत किया। अगर बादल पंजाब के हितैषी होते तो हरसिमरत कौर का इस्तीफा दिलवा कर भाजपा से गठबंधन तोड़ लेते। आज का प्रस्ताव दिखावा है। इसमें केंद्र या राज्य सरकारों को कोई निर्देश तक नहीं दिए गए हैं।