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डिजिटल और पेपर लैस होगा हाईकोर्ट, याचिका से ऑर्डर तक सब ऑनलाइन

Sun, 05 Mar 2017 09:20 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 05 Mar 2017 09:20 AM IST
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Punjab and haryana highcourt will be paperless and digital
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
फाइलों के पुलिंदों की जगह अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में वकील टैब और लैपटॉप के जरिये बहस करते नजर आएंगे। वहीं न्यायाधीशों के सामने भी डिजिटल स्क्रीन दिखेगी। इसे पेपर लैस कोर्ट की तरफ बढ़ने का अहम कदम माना जा रहा है। हाईकोर्ट की कंप्यूटर कमेटी के चेयरमैन जस्टिस राजेश बिंदल ने कमेटी की बैठक में निर्णय लिया है कि वकीलों को डिजिटल कोर्ट केलिए तैयार करने के लिए कोर्ट नंबर 64 में रोजाना ट्रेनिंग दी जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से कागज की खपत कम करने का निर्णय लेने के बाद से ही पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी इस दिशा में कदम उठाने की कवायद शुरू की है। हाईकोर्ट में केस दाखिल करने के लिए पेपर बुक के स्थान पर ई-फाइलिंग के जरिए ई-पेपरबुक दाखिल करने की प्रक्रिया पहले ही आरंभ की जा चुकी है।
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अब वकीलों को टैब और लैपटॉप के जरिए बहस करने की ट्रेनिंग देने का हाईकोर्ट की कंप्यूटर कमेटी ने निर्णय लिया है। यहां की कोर्ट नंबर 64 को इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था ई-फाइलिंग सिस्टम के अगले चरण के तौर पर आरंभ करने का निर्णय लिया है। काबिलेगौर है कि हाईकोर्ट के इस निर्णय के चलते वकीलों के साथ घूमती भारी-भरकम फाइलों का स्थान टैब व लैपटॉप ले लेंगे।
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ऐसे होगी कागजों की बचत
हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली प्रत्येक याचिका में नोटिस जारी होने के बाद सभी प्रतिवादियों को फाइल की कॉपी सौंपी जाती है। औसतन प्रतिवादियों की संख्या 7 से 10 के बीच होती है। ऐसे में हर याचिका की करीब 10 से 15 कॉपी तैयार होती है और औसतन याचिका करीब 100 से 150 पन्नों की होती है। हाईकोर्ट द्वारा अब कंप्यूटराइज सिस्टम के चलते प्रतिवादियों और मामले में पार्टी बनने वालों को सॉफ्ट कॉपी भेजी जा सकेगी।

यह हैं चुनौतियां

Punjab and haryana highcourt will be paperless and digital
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
कोर्ट में नहीं लगेंगे फाइलों के पुलिंदे
हाईकोर्ट में सबसे बड़ी समस्या फाइलों का रिकार्ड रखने की है। इसी वजह से यहां रिकार्ड की फाइलों को अन्य स्थान पर भेजने की व्यवस्था भी की गई थी। अब इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद फाइलों का बोझ कम किया जा सकेगा। खाली स्थान को अन्य प्रशासनिक कार्य के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा। अभी तक हाईकोर्ट की वेबसाइट पर केवल आदेशों को ही देखा जा सकता है।

हालांकि नई व्यवस्था के तहत आने वाले कुछ दिनों में याचिका और याचिका में राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामों को भी दिखाने पर विचार किया जा रहा है। अभी तक इंटरनल सर्वर पर इन हलफनामों को देखा जा सकता है, क्योंकि फाइलों को स्कैन कर अपलोड किया जाता है।

नोटिस के लिए भी नई व्यवस्था
अदालती नोटिस के पहुंचने में देरी या पार्टी के नोटिस स्वीकार न करने के चलते न्याय मिलने में देरी न हो, इसके लिए कंप्यूटर कमेटी ने हाईकोर्ट के वकीलों को दिशा निर्देश दिए हैं कि केस फाइल करते समय ज्यूडीशियल फाइल पर अपना, याची का और प्रतिवादियों का ई-मेल आईडी तथा मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लिखें। न्याय प्रक्त्रिस्या में तेजी लाने और नोटिस स्वीकार न करने या डाक से नोटिस पहुंचने में होने वाली देरी से बचने के लिए ई नोटिस प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर होने से नोटिस सर्व होने में देरी की संभावना नहीं रहेगी।

विभागों के लिए पहले ही की जा चुकी है व्यवस्था
हरियाणा, पंजाब और यूटी के सभी सरकारी विभागों के नोडल अधिकारियों के ई-मेल आईडी पहले ही कोर्ट के पास मौजूद हैं। इससे पहले कई साल पहले हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ व केंद्र सरकार को हर विभाग का एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने उस नोडल अधिकारी का ई-मेल आईडी भी बनाने का आदेश दिया था। कोर्ट का यह प्रयोग सफल रहा था, इसलिए अब कोर्ट ने वकीलों व पार्टियों के ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर लेकर समन में होने वाली देरी से बचने के लिए कदम उठाया है।

यह हैं चुनौतियां
हाईकोर्ट में ऐसे वकीलों की संख्या अधिक है, जिन्हें कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है। कुछ ऐसे जज भी हैं जो कंप्यूटर से फ्रेंडली नहीं हैं। ऐसे में वकील और जज इस नई पहल को कितना सराहेंगे यह देखने लायक होगा। '
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