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सभी डैम खाली हो रहे, अब तो बरसात का इंतजार करे सुखना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 20 Apr 2017 09:35 AM IST
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- फोटो : File Photo
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गर्मी के कारण सूखते बांध और पानी की कमी को देखते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि अब बारिश का इंतजार हो। हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल न तो डैम में पानी है और न ही अभी कोई ठोस व्यवस्था है, जिससे किसी अन्य माध्यम से लंबी दूरी तय करवा पानी सुखना में लाया जा सके। ऐसे में अब बरसात ही सुखना को राहत दे सकती है। हालांकि, हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिए कि वह एक अथॉरिटी बनाए, जो सुखना को समर्पित हो और इसमें पानी की कमी न हो। इसके लिए शार्ट टर्म और लॉंग टर्म योजना बनाकर कोर्ट को सौंपे।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में एमिकस क्यूरी तनु बेदी ने बहस आरंभ की। बेदी ने कहा कि सुखना पर स्ट्रे डॉग्स मामले में पिछली सुनवाई पर जो एसएलपी की कॉपी सौंपी गई थी, वह मेन केस नहीं बल्कि अन्य केस था। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि अभी सुखना के सामने सबसे बड़ी समस्या पानी की है और फिलहाल हम पानी पर ही फोकस रहेंगे।
इस दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि अभी तक क्या कदम उठाए गए हैं, जिस पर प्रशासन ने बताया कि जो सुझाव आए हैं, उन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस दौरान कोर्ट मित्र ने कहा कि सुखना को ट्रीटेड वाटर से भरा जा सकता है। विश्व के कई ऐसे देश हैं, जहां पर ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल अधिकतर जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सुझाव कई हैं, लेकिन सुखना के लिए बेहतर सुझाव का चयन सभी कसौटियों पर खरा उतरने के बाद ही होगा।
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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में एमिकस क्यूरी तनु बेदी ने बहस आरंभ की। बेदी ने कहा कि सुखना पर स्ट्रे डॉग्स मामले में पिछली सुनवाई पर जो एसएलपी की कॉपी सौंपी गई थी, वह मेन केस नहीं बल्कि अन्य केस था। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि अभी सुखना के सामने सबसे बड़ी समस्या पानी की है और फिलहाल हम पानी पर ही फोकस रहेंगे।
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इस दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि अभी तक क्या कदम उठाए गए हैं, जिस पर प्रशासन ने बताया कि जो सुझाव आए हैं, उन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस दौरान कोर्ट मित्र ने कहा कि सुखना को ट्रीटेड वाटर से भरा जा सकता है। विश्व के कई ऐसे देश हैं, जहां पर ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल अधिकतर जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सुझाव कई हैं, लेकिन सुखना के लिए बेहतर सुझाव का चयन सभी कसौटियों पर खरा उतरने के बाद ही होगा।
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सफाई व्यवस्था हो भले ही इसके लिए शुल्क लो
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि क्यों नहीं ऐसी अथॉरिटी बनाई जाती जो पूरी तरह से सुखना को समर्पित हो और इसके लिए शॉर्ट एंड लांग टर्म प्लान करे। इस पर एक अन्य एमिकस क्यूरी रीटा कोहली ने कहा कि दुनिया भर में कई बरसाती झील हैं, जो पूरी तरह से बरसात पर निर्भर हैं। इन झीलों का सूख जाना आम बात होती है और ऐसे में इतनी चिंता की कोई बात नहीं है।
इसके साथ ही उन्होंने अगस्त 2011 में हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि सुखना के लिए एक अधिकारी और अथॉरिटी का गठन करने के तब भी आदेश दिए गए थे। इस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन से जवाब मांगा। हाईकोर्ट के इस सवाल पर और अथॉरिटी के गठन पर प्रशासन का पक्ष रखने के लिए स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल ने कुछ समय दिए जाने की अपील की। इसपर हाईकोर्ट ने उनकी अपील मंजूर करते हुए सुनवाई एक मई तक टाल दी।
सफाई व्यवस्था हो भले ही इसके लिए शुल्क लो
हाईकोर्ट ने कहा कि सुखना पर मौजूद शौचालयों में गंदगी की बात सामने आई है। इस प्रकार की स्थिति नहीं हो यह एमसी चंडीगढ़ सुनिश्चित करे। हाईकोर्ट ने कहा कि निश्चित अंतराल में इसकी सफाई हो, इसके लिए इसका ठेका क्यों नहीं दे दिया जाता। इसकी एवज में ठेका लेने वाले प्रसाधन इस्तेमाल करने के लिए भुगतान करने को भी तैयार होंगे। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर एमसी को इस बारे में उनका पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही उन्होंने अगस्त 2011 में हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि सुखना के लिए एक अधिकारी और अथॉरिटी का गठन करने के तब भी आदेश दिए गए थे। इस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन से जवाब मांगा। हाईकोर्ट के इस सवाल पर और अथॉरिटी के गठन पर प्रशासन का पक्ष रखने के लिए स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल ने कुछ समय दिए जाने की अपील की। इसपर हाईकोर्ट ने उनकी अपील मंजूर करते हुए सुनवाई एक मई तक टाल दी।
सफाई व्यवस्था हो भले ही इसके लिए शुल्क लो
हाईकोर्ट ने कहा कि सुखना पर मौजूद शौचालयों में गंदगी की बात सामने आई है। इस प्रकार की स्थिति नहीं हो यह एमसी चंडीगढ़ सुनिश्चित करे। हाईकोर्ट ने कहा कि निश्चित अंतराल में इसकी सफाई हो, इसके लिए इसका ठेका क्यों नहीं दे दिया जाता। इसकी एवज में ठेका लेने वाले प्रसाधन इस्तेमाल करने के लिए भुगतान करने को भी तैयार होंगे। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर एमसी को इस बारे में उनका पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।