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दलितों पर अपमानजनक टिप्पणी का मामला: एफआईआर रद्द करने संबंधी युवराज सिंह की याचिका पर फैसला सुरक्षित
Thu, 09 Dec 2021 08:46 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 09 Dec 2021 08:46 PM IST
सार
हरियाणा पुलिस ने बताया था कि स्थानीय लोगों के बीच एक सर्वे में सामने आया है कि यह शब्द अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अपमानजनक शब्द के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दलितों पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में क्रिकेटर युवराज सिंह की उनके खिलाफ एफआईआर रद्द करने की मांग पर सभी पक्षों को सुनने के बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए युवराज सिंह ने बताया था कि 1 अप्रैल 2020 को वह सोशल मीडिया पर अपने साथी रोहित शर्मा के साथ लाइव चैट कर रहे थे। इस दौरान लॉक डाउन को लेकर चर्चा के दौरान उन्होंने मजाक में अपने साथी यजुवेंद्र सिंह और कुलदीप यादव को कुछ शब्द कह दिए थे। इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया और इसके साथ यह संदेश जोड़ा गया कि यह दलित वर्ग का अपमान है। यह सब एक मजाक का हिस्सा था और इसका मकसद किसी का अपमान करना नहीं था। युवराज सिंह ने कहा कि वह शब्द उन्होंने अपने दोस्त के पिता के शादी में नाचने पर टिप्पणी के रूप में कहे थे जो मजाकिया अंदाज में थे। इस स्पष्टीकरण के बावजूद याची पर एफआईआर दर्ज की गई।
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हरियाणा पुलिस ने बताया था कि स्थानीय लोगों के बीच एक सर्वे में सामने आया है कि यह शब्द अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अपमानजनक शब्द के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही पुलिस ने दलील दी थी कि गूगल करने पर भी गूगल यह बताता है कि यह सब दलित वर्ग के लिए अपमानजनक टिप्पणी के रूप में इस्तेमाल होता है।
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पिछली सुनवाई के दौरान युवराज के वकील ने बताया था कि तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल की मुनमुन दत्ता के खिलाफ भी ऐसे वीडियो के चलते एफआईआर दर्ज हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने इस पर शिकायतकर्ता को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। सभी पक्षों को सुनने के बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया है।