फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   punjab and haryana highcourt big statement about haryana farmers

किसानों के जख्मों पर हाईकोर्ट का मरहम, आढ़ती सन्न

Sat, 18 Apr 2015 11:46 AM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 18 Apr 2015 11:46 AM IST
विज्ञापन
punjab and haryana highcourt big statement about haryana farmers

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणी से आढ़तियों के चंगुल में फंसे कई किसानों के जख्मों पर मानो मरहम लगा दिया है। हाईकोर्ट ने माना कि आढ़ती किसानों को हमेशा देनदारी में फंसाए रखते हैं ताकि वह अपनी फसल उसे ही बेचें।

विज्ञापन


पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस परमजीत सिंह के फैसले के दौरान यह टिप्पणी की है। अदालत की इस टिप्पणी ने शुक्रवार को हाईकोर्ट ने फाजिल्का केएक किसान को चेक बाउंस होने के केस में सजा माफ कर दी।
विज्ञापन


बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि चेक भरने में गड़बड़ी की गई, लिहाजा बलबीर सिंह को बरी किया जाता है। यदि वह जुर्माना अदा कर चुका है, तो यह उसे वापस दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह है मामला

punjab and haryana highcourt big statement about haryana farmers

अनपढ़ किसान बलबीर सिंह ने बतौर सिक्योरिटी एक ब्लैंक चेक आढ़ती राजकृष्ण को दिया था। इस चेक पर बलबीर सिंह के अंगूठे का निशान था, लेकिन बाद में राजकृष्ण ने फाजिल्का की स्थानीय अदालत में चेक बाउंस का केस दायर किया।

उसने अदालत में दी शिकायत में कहा था कि नौ लाख 45 हजार रुपये का चेक बाउंस हो गया, क्योंकि बलबीर सिंह के खाते में पैसे नहीं थे। इस पर निचली अदालत ने बलबीर सिंह को सजा सुनाई।

इस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील की गई, लेकिन यहां भी बलबीर सिंह को दो साल कैद और 2500 रुपये जुर्माने की सजा बरकरार रखी गई। आखिरकार बलबीर सिंह ने हाईकोर्ट में अपील की।

हाईकोर्ट को यह जानकारी दी गई

punjab and haryana highcourt big statement about haryana farmers

हाईकोर्ट को बताया गया कि यह पोस्ट डेटेड ब्लैंक चेक केवल सिक्योरिटी के लिए दिया गया था, ताकि वह राजकृष्ण को ही अपनी फसल बेचे।

बहीखाते में आढ़ती ने देनदारी निकाल दी और बिना पूछे चेक लगा दिया। जबकि उनके बीच वास्तविक हिसाब-किताब नहीं हुआ और न ही चेक लगाने को लेकर सहमति बनी।

यह भी कहा कि बहीखाते परखे बगैर ही निचली अदालतों ने सजा सुनाई है। लिहाजा सजा माफ होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने पाया कि पंजाब और हरियाणा में रबी की फसल की कटाई अप्रैल से लेकर मई माह तक चलती है।

खरीफ के फसल की कटाई सितंबर से नवंबर तक होती है। साल 2004 के दौरान चेक मई में दिया गया था, लेकिन इसे भुनाने के लिए बैंक में नवंबर में लगाया गया।

अदालत को मिली यह गड़बड़ी

punjab and haryana highcourt big statement about haryana farmers
  • किसान ने चेक केवल सिक्योरिटी के लिए ही दिया था जबकि आढ़ती ने कहा कि चेक कर्ज वापस करने के एवज में दिया गया
  • आढ़ती यह स्पष्ट नहीं कर सका कि किसान ने कर्ज कब लिया
  • लेनदेन का हिसाब कब हुआ, इसका भी कोई जिक्र नहीं
  • चेक भरने में अलग-अलग स्याही का उपयोग किया गया
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed