अगले आदेश तक बंद रहेगी जालंधर की लेदर इंडस्ट्री, हाईकोर्ट ने कहा-हमें लोगों के स्वास्थ्य की चिंता
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जालंधर की लेदर इंडस्ट्री को दूषित पानी को सही ढंग से ट्रीट न करने पर अगले आदेश तक बंद करने के आदेश जारी किए हैं। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि हमें लाखों लोगों के स्वास्थ्य की चिंता है न की कुछ कारोबारियों की।
जब तक दूषित पानी को मानकों के तहत ट्रीट नहीं किया जाएगा, लेदर इंडस्ट्री को बंद रखा जाएगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जालंधर के डीसी को आदेश लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि लेदर इंडस्ट्री से निकलने वाले एमिशन और दूषित जल को पर्यावरण संरक्षण कानून और जल संरक्षण कानून के मानकों के तहत ट्रीट किया जाए।
पंजाब लेदर फेडरेशन और पंजाब एफल्युएंट ट्रीटमेंट सोसाइटी के एक विवाद में हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में सुनवाई करते हुए कहा था कि यह मामला यहां के निवासियों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, लिहाजा अब इस मामले में जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई की जाएगी।
इसके बाद हाईकोर्ट ने लेदर इंडस्ट्री से निकलने वाले दूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए चल रहे कॉमन एफल्युएंट ट्रीटमेंट प्लांट को सरकार को अंतरिम तौर पर एक कमेटी गठित कर चलाने के आदेश दिए थे।
कमेटी को चेयर करने की जिम्मेदारी हाईकोर्ट ने जालंधर के डीसी को सौंपी थी। हाईकोर्ट ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चीफ इंजीनियर को इस प्लांट की समय-समय पर जांच के आदेश दिए थे। पिछली सुनवाई पर भी हाईकोर्ट ने इस प्लांट की रिपोर्ट मांगी थी।
अब हाईकोर्ट को बताया गया कि लेदर इंडस्ट्री से निकलने वाले दूषित पानी का ट्रीटमेंट तय मानकों के तहत नहीं किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा से जवाब मांगा तो उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेशों के तहत डीसी की अध्यक्षता में जो कमेटी गठित की थी, उसे पांच वर्ष हो चुके हैं।
ऐसे में अब इसका काम सोसाइटी के हवाले किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों में बहस के बाद हाईकोर्ट ने यहां की सभी लेदर इंडस्ट्री को बंद करने के आदेश दिए और कहा कि जब तक तय मानकों के तहत यहां के दूषित पानी का ट्रीटमेंट नहीं होता तब ये बंद रहेंगी।