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North Regional Council meeting: अमित शाह की मौजूदगी में एसवाईएल पर आमने-सामने आए पंजाब और हरियाणा

Sat, 09 Jul 2022 10:10 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 09 Jul 2022 10:10 PM IST
सार

मनोहर लाल ने बैठक में कहा कि हरियाणा को भाखड़ा मेन लाइन नहर से भी लगभग 700-1000 क्यूसेक पानी कम मिल रहा है। बीबीएमबी के अधिकारियों की एक कमेटी ने भी यह पाया है कि बीएमएल के संपर्क बिंदु पर हरियाणा को पानी का कम वितरण किया गया है।

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Punjab and Haryana governments once again at loggerheads over Sutlej-Yamuna Link water in North Regional Council meeting
बैठक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एसवाईएल (सतलुज-यमुना लिंक) के पानी को लेकर पंजाब और हरियाणा सरकार एक बार फिर से आमने-सामने हैं। कई बार विधानसभा और केंद्र के सामने उठ चुके इस मुद्दे पर अब उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भी सहमति नहीं बन सकी। बैठक में पंजाब ने पानी देने से इनकार कर दिया। उलटा हरियाणा से यमुना के पानी की मांग कर दी। इसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केंद्रीय गृह मंत्री से इस मामले में दखल की मांग की है। जयपुर में हुई उत्तर क्षेत्रीय परिषद की 30वीं बैठक में उन्होंने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की तत्काल बैठक बुलाए जाने की मांग की है।

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बैठक में मनोहर लाल ने कहा कि सतलुज-यमुना लिंक नहर के निर्माण कार्य को पूरा करना हरियाणा और पंजाब के बीच पुराना और गंभीर मसला है। यह नहर न बनने के कारण रावी, सतलुज और ब्यास का अधिशेष, बिना चैनल वाला पानी पाकिस्तान में चला जाता है। हरियाणा को केंद्र सरकार के 24 मार्च, 1976 के आदेश के अनुसार रावी-ब्यास के सरप्लस पानी में भी 3.50 मिलियन एकड़ फुट हिस्सा आवंटित किया गया है। 
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मुख्यमंत्री ने कहा कि एसवाईएल मुद्दे को हल करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ 18 अगस्त, 2020 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार पंजाब आगे कार्रवाई नहीं कर रहा है। एसवाईएल को लेकर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक जल्द आयोजित हो। इस पर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि एसवाईएल पर हमेशा राजनीतिक रोटियां सेंकी जाती रही हैं, लेकिन यह साफ है कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्यों को देने के लिए एक बूंद अतिरिक्त पानी नहीं है। एसवाईएल में पानी छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। एसवाईएल नहर वैसे भी खत्म हो चुकी है। अगर राइपेरियन एक्ट की बात करें तो पंजाब को अभी भी पूरा हिस्सा नहीं मिल रहा है। पानी की रॉयलटी अगर मिले तो पंजाब को आर्थिक संकट दूर करने में सहायता मिल सकती है।

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एसवाईएल पर पंजाब आगे कार्रवाई नहीं कर रहा: मनोहर लाल

मनोहर लाल ने कहा कि एसवाईएल मुद्दे पर चर्चा के लिए उनकी ओर से एक अर्ध-सरकारी पत्र गत छह जून को लिखकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की दूसरे दौर की बैठक जल्द से जल्द बुलाने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस विषय में एक अर्ध-सरकारी पत्र लिखा है, जिसमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले बैठक के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री को भी तीन अर्ध-सरकारी पत्र लिखे, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। अब पंजाब में नई सरकार आ चुकी है। अत: गृहमंत्री से अनुरोध है कि यह बैठक जल्द करवाएं और उसके निष्कर्ष से सर्वोच्च न्यायालय को भी अवगत करवाया जाए।

भाखड़ा मेन लाइन नहर से हरियाणा को मिल रहा कम पानी

मनोहर लाल ने बैठक में कहा कि हरियाणा को भाखड़ा मेन लाइन नहर से भी लगभग 700-1000 क्यूसेक पानी कम मिल रहा है। बीबीएमबी के अधिकारियों की एक कमेटी ने भी यह पाया है कि बीएमएल के संपर्क बिंदु पर हरियाणा को पानी का कम वितरण किया गया है। इस कमेटी ने अब हेड से लेकर भागीदार राज्यों के सभी संपर्क बिंदुओं तक संपूर्ण वितरण प्रणाली के लिए गेज/डिस्चार्ज कर्व लगाने के लिए नवीनतम डिस्चार्ज मेजरमेंट तकनीकों के साथ कोई तीसरी एजेंसी नियुक्त करने का सुझाव दिया है। मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में सदस्य (सिंचाई) हरियाणा से नियुक्त करने की भी मांग की।

पंजाब विश्विद्यालय में हरियाणा के हिस्से को बहाल करने का मुद्दा भी उठा 

हरियाणा की ओर से बैठक में कहा गया कि पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा के हिस्से को बहाल किया जाए। चंडीगढ़ के साथ लगते हरियाणा के कॉलेजों की सम्बद्धता भी इस विश्वविद्यालय से की जाए। पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा का हिस्सा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत प्रदान किया गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 1 नवंबर, 1973 को एक अधिसूचना जारी कर इसे समाप्त कर दिया था। इससे पहले हरियाणा के तत्कालीन अंबाला जिले के कॉलेज इस विश्विद्यालय से संबद्ध थे।

शाह का हरियाणा को चंडीगढ़ में जमीन देने का आश्वासन 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि उनके आग्रह पर केंद्र सरकार ने हरियाणा को बड़ी सौगात दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि हरियाणा के अलग विधानसभा भवन के लिए चंडीगढ़ में जमीन दी जाएगी। इस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट कर कहा है कि पंजाब भी अलग विधानसभा चाहता है, लेकिन अकाली दल और कांग्रेस ने मान के इस स्टैंड का विरोध शुरू कर दिया है। लिहाजा यह मसला भी आसानी से हल होता नजर नहीं आता। अब इन विवादों को सुलझाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह का ही सहारा है।

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