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भ्रष्टाचारी को मिली 6 साल की सजा और जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Sat, 08 Feb 2014 02:20 PM IST
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जिला अदालत ने कई साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में अहम फैसला सुनाया। इस दौरान एक व्यक्ति पर दोष साबित होने पर दो अलग एक्ट की धाराओं के तहत सजा सुनाई गई।
आईपीसी की धारा 40 के तहत 6 में छह वर्ष की सजा तथा 60 हजार रुपये जुर्मान लगाया है। जबकि करप्शन एक्ट के तहत चार वर्ष की सजा तथा 40 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। फैसला सुनाने के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया।
जिक्रयोग है कि दोषी सुभाष चंद्र पंजाब राज्य गोदाम निगम के जिला गुरदासपुर में स्थित कादियां ऑफिस में तैनात था। वह वहां पर जूनियर सहायक के पद पर काम कर रहा था।
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विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 7 जून 2005 को भ्रष्टाचार एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। उस पर आरोप था जब चेकिंग टीम ने गोदाम में रखे गेहूं की चेकिंग की। उस दौरान जिन गेहूं बैगों का वजन 50 किलोग्राम का होना चाहिए था। उनमें गेहूं की काफी कम मात्रा पाई गई थी।
इसके अलावा बारदाना बोरियों के स्टाक में काफी धोखाधड़ी की बात सामने आई थी। जिससे राज्य सरकार को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ था।
विभाग ने इस गबन के बाद सुभाष चन्द्र को 29 सितंबर 2005 को डिसमिस भी कर दिया था। केस की जांच विजिलेंस द्वारा भी की गई। जिसके बाद विजिलेंस ब्यूरो द्वारा सुभाष चन्द्र के खिलाफ खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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आईपीसी की धारा 40 के तहत 6 में छह वर्ष की सजा तथा 60 हजार रुपये जुर्मान लगाया है। जबकि करप्शन एक्ट के तहत चार वर्ष की सजा तथा 40 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। फैसला सुनाने के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया।
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जिक्रयोग है कि दोषी सुभाष चंद्र पंजाब राज्य गोदाम निगम के जिला गुरदासपुर में स्थित कादियां ऑफिस में तैनात था। वह वहां पर जूनियर सहायक के पद पर काम कर रहा था।
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विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 7 जून 2005 को भ्रष्टाचार एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। उस पर आरोप था जब चेकिंग टीम ने गोदाम में रखे गेहूं की चेकिंग की। उस दौरान जिन गेहूं बैगों का वजन 50 किलोग्राम का होना चाहिए था। उनमें गेहूं की काफी कम मात्रा पाई गई थी।
इसके अलावा बारदाना बोरियों के स्टाक में काफी धोखाधड़ी की बात सामने आई थी। जिससे राज्य सरकार को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ था।
विभाग ने इस गबन के बाद सुभाष चन्द्र को 29 सितंबर 2005 को डिसमिस भी कर दिया था। केस की जांच विजिलेंस द्वारा भी की गई। जिसके बाद विजिलेंस ब्यूरो द्वारा सुभाष चन्द्र के खिलाफ खिलाफ मामला दर्ज किया था।