{"_id":"615226fe8ebc3e09d6726127","slug":"pu-will-get-new-dean-research-on-september-1-chandigarh-news-pkl428233834","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीयू को एक सितंबर को मिल जाएगा नया डीन रिसर्च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीयू को एक सितंबर को मिल जाएगा नया डीन रिसर्च
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी को नया डीन रिसर्च एक अक्तूबर को मिल जाएगा। वर्तमान डीन रिसर्च प्रो. राजेश गिल का कार्यकाल इसी माह में पूरा हो रहा है। डीन रिसर्च वरिष्ठता के आधार पर बनाया जाता है। वरिष्ठता में सबसे आगे प्रो. एसके तोमर हैं। उनके पास वर्तमान में डीएसडब्ल्यू व एचआरडीसी निदेशक का कार्यभार है। सूत्रों का कहना है कि वह डीन रिसर्च बनेंगे तो यह दोनों पद खाली होंगे। इसके लिए चेहरे की तलाश शुरू हो गई।
प्रो. एसके तोमर अनुभवी शिक्षक हैं। वह कई विश्वविद्यालयों के कुलपति की दौड़ में भी रहे और अभी भी उनका नाम चल रहा है। डीएसडब्ल्यू की कुर्सी पर रहते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से बेहतर तारतम्य बैठाया और कार्य किया। जानकारों का कहना है कि प्रो. एसके तोमर डीन रिसर्च बनेंगे तो शोध को गति मिलेगी। पीयू के उच्चाधिकारी उनके अनुभव का लाभ उठाएंगे। यही नहीं प्रो. तोमर ने एचआरडीसी निदेशक के पद के महत्व को भी लोगों को समझाया और कोरोना काल में हजारों शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर ऑनलाइन शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। इस सेंटर ने कई अन्य भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
इनसेट---
प्रो. देवेंद्र बन सकते हैं डीएसडब्ल्यू
पीयू के एसवीसी प्रो. देवेंद्र सिंह डीएसडब्ल्यू बन सकते हैं। उनके नाम का प्रस्ताव वीसी बहुत पहले ही रख चुके थे, लेकिन सिंडिकेट व सीनेट ने स्वीकार नहीं किया। बताया जाता है कि आने वाली सीनेट में उनका बहुमत हो सकता है और इस प्रस्ताव को पास करवाया जा सकता है। हालांकि बहुमत के मामले में कांग्रेसी खेमा भी कम नहीं है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जो भी व्यक्ति डीएसडब्ल्यू बने उसे सीनेट में पदेन सदस्य बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वह हजारों बच्चों का प्रतिनिधित्व करता है। उसे सीनेट फैलो माना जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रो. एसके तोमर अनुभवी शिक्षक हैं। वह कई विश्वविद्यालयों के कुलपति की दौड़ में भी रहे और अभी भी उनका नाम चल रहा है। डीएसडब्ल्यू की कुर्सी पर रहते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से बेहतर तारतम्य बैठाया और कार्य किया। जानकारों का कहना है कि प्रो. एसके तोमर डीन रिसर्च बनेंगे तो शोध को गति मिलेगी। पीयू के उच्चाधिकारी उनके अनुभव का लाभ उठाएंगे। यही नहीं प्रो. तोमर ने एचआरडीसी निदेशक के पद के महत्व को भी लोगों को समझाया और कोरोना काल में हजारों शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर ऑनलाइन शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। इस सेंटर ने कई अन्य भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
विज्ञापन
इनसेट---
प्रो. देवेंद्र बन सकते हैं डीएसडब्ल्यू
पीयू के एसवीसी प्रो. देवेंद्र सिंह डीएसडब्ल्यू बन सकते हैं। उनके नाम का प्रस्ताव वीसी बहुत पहले ही रख चुके थे, लेकिन सिंडिकेट व सीनेट ने स्वीकार नहीं किया। बताया जाता है कि आने वाली सीनेट में उनका बहुमत हो सकता है और इस प्रस्ताव को पास करवाया जा सकता है। हालांकि बहुमत के मामले में कांग्रेसी खेमा भी कम नहीं है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जो भी व्यक्ति डीएसडब्ल्यू बने उसे सीनेट में पदेन सदस्य बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वह हजारों बच्चों का प्रतिनिधित्व करता है। उसे सीनेट फैलो माना जाए।
विज्ञापन