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छात्रों को मनाएगी पीयू, फिलहाल नहीं कम करेगी मेस व कैंटीन के रेट
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय फिलहाल मेस व कैंटीन में खाने के रेट कम नहीं करेगी। अधिकारी पहले छात्रों के साथ बैठक करके उन्हें समझाने का प्रयास करेंगे। यह बताएंगे कि महंगाई के इस दौर में जो पैसे तय किए गए हैं, वे अधिक नहीं हैं। यदि इसके बाद भी छात्र नहीं मानते हैं तो सात सदस्यीय कमेटी दोबारा बैठक करके छात्रों के हित में निर्णय लेगी। प्रति आइटम एक से दो रुपये तक कम हो सकते हैं।
मंगलवार को मेस व कैंटीन के रेट निर्धारित करने वाली कमेटी की बैठक बुलाई गई, लेकिन इसमें डायटिशियन नहीं पहुंचीं। इस कारण यह बैठक पूरी तरह कारगर नहीं हो सकी, क्योंकि डायटिशियन की ओर से ही खाद्य पदार्थों के सभी सुझाव दिए जाने थे, लेकिन अधिकारियों ने यह तय किया कि जो रेट निर्धारित किए गए हैं, वे जायज हैं। बाजार के रेट से कम हैं और महंगाई के अनुसार ठीक है। यदि कम रेट होंगे तो मेस व कैंटीन संचालक पूरी तरह कार्य करने में अक्षम होंगे, क्योंकि उनकी मांग पर ही रेट बढ़ाए गए थे। कमेटी का तर्क है कि एक से दो रुपये जो मूल्य बढ़ाया गया है, वह अधिक नहीं है और आसानी से दिया जा सकता है। इसके बदले में मेस व कैंटीन संचालक खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता आदि भी मुहैया कराएंगे। खाने का स्वाद भी अलग होगा यानी जितने पैसे लिए जाएंगे, उतने का माल भी दिया जाएगा। आखिर में पूरी बैठक बेनतीजा रही। केवल छात्रों से सलाह करने की बात सामने आई जो जल्द की जाएगी।
सभी छात्र संगठनों ने घेरा था वीसी कार्यालय
पीयू वीसी कार्यालय का घेराव छात्र संगठनों ने किया था। छात्रों ने कड़ा विरोध दायर करते कहा था कि मेस व कैंटीन की ओर से खाने के रेट अधिक बढ़ा दिए गए, जबकि पीयू को राहत देनी चाहिए थी। छात्र कोरोना के कारण परेशान हुए हैं। तमाम परिवारों की नौकरी चली गई तो कुछ का व्यवसाय। पीयू को छात्रों को और राहत देनी चाहिए। छात्रों ने कई सवाल खड़े किए थे। आखिर में पीयू प्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया था लेकिन पीयू ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया। केवल बैठक औपचारिक रूप से ही हुई जबकि अब तक निर्णय हो जाना चाहिए था। छात्रों का कहना है कि विद्यार्थियों को खाने के अधिक पैसे देने पड़ रहे हैं। लगातार उन पर आर्थिक भार बढ़ रहा है, जिससे छात्र परेशान हैं। वे अधिकारियों को फोन आदि करके यह जानकारी दे रहे हैं, लेकिन समुचित समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है और इससे छात्रों में आक्रोश पनप रहा है।
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मंगलवार को मेस व कैंटीन के रेट निर्धारित करने वाली कमेटी की बैठक बुलाई गई, लेकिन इसमें डायटिशियन नहीं पहुंचीं। इस कारण यह बैठक पूरी तरह कारगर नहीं हो सकी, क्योंकि डायटिशियन की ओर से ही खाद्य पदार्थों के सभी सुझाव दिए जाने थे, लेकिन अधिकारियों ने यह तय किया कि जो रेट निर्धारित किए गए हैं, वे जायज हैं। बाजार के रेट से कम हैं और महंगाई के अनुसार ठीक है। यदि कम रेट होंगे तो मेस व कैंटीन संचालक पूरी तरह कार्य करने में अक्षम होंगे, क्योंकि उनकी मांग पर ही रेट बढ़ाए गए थे। कमेटी का तर्क है कि एक से दो रुपये जो मूल्य बढ़ाया गया है, वह अधिक नहीं है और आसानी से दिया जा सकता है। इसके बदले में मेस व कैंटीन संचालक खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता आदि भी मुहैया कराएंगे। खाने का स्वाद भी अलग होगा यानी जितने पैसे लिए जाएंगे, उतने का माल भी दिया जाएगा। आखिर में पूरी बैठक बेनतीजा रही। केवल छात्रों से सलाह करने की बात सामने आई जो जल्द की जाएगी।
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सभी छात्र संगठनों ने घेरा था वीसी कार्यालय
पीयू वीसी कार्यालय का घेराव छात्र संगठनों ने किया था। छात्रों ने कड़ा विरोध दायर करते कहा था कि मेस व कैंटीन की ओर से खाने के रेट अधिक बढ़ा दिए गए, जबकि पीयू को राहत देनी चाहिए थी। छात्र कोरोना के कारण परेशान हुए हैं। तमाम परिवारों की नौकरी चली गई तो कुछ का व्यवसाय। पीयू को छात्रों को और राहत देनी चाहिए। छात्रों ने कई सवाल खड़े किए थे। आखिर में पीयू प्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया था लेकिन पीयू ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया। केवल बैठक औपचारिक रूप से ही हुई जबकि अब तक निर्णय हो जाना चाहिए था। छात्रों का कहना है कि विद्यार्थियों को खाने के अधिक पैसे देने पड़ रहे हैं। लगातार उन पर आर्थिक भार बढ़ रहा है, जिससे छात्र परेशान हैं। वे अधिकारियों को फोन आदि करके यह जानकारी दे रहे हैं, लेकिन समुचित समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है और इससे छात्रों में आक्रोश पनप रहा है।
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