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दो साल बाद पीयू सिंडिकेट का गठन, 2 जुलाई को करवाए जाएंगे चुनाव
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में दो साल बाद सिंडिकेट का गठन होने जा रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रार की ओर से शुक्रवार को सभी सीनेट सदस्यों को सूचना दी गई है। इसके अनुसार 2 जुलाई को सुबह 9 बजे सीनेट हॉल में सिंडिकेट के लिए चुनाव करवाए जाएंगे। इससे एक दिन पहले देर रात सीनेटरों को फैकल्टी अलॉट करने की सूचना भेजी गई थी। हालांकि इसको लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। कुछ सीनेटरों और पीयू के पूर्व वीसी ने आपत्ति जाहिर की थी कि कुलपति को फैकल्टी चयन का फैसला लेने का अधिकार नहीं है।
पीयू में सिंडिकेट के सदस्य सीनेट के सदस्यों में से ही चुने जाते हैं। पिछले सिंडिकेट का एक साल का कार्यकाल दिसंबर 2020 में समाप्त हो गया था। वर्तमान में सीनेट चुनाव में देरी के कारण यूनिवर्सिटी में निर्वाचित सिंडिकेट नहीं है। हालांकि इस साल की शुरुआत में सीनेट ने सिंडिकेट की सभी शक्तियों को वीसी राज कुमार को सौंप दिया था। पीयू की सर्वोच्च शासी निकाय सीनेट का चुनाव 2021 में दो साल के अंतराल के बाद हुआ था। 15 सदस्यीय निकाय में चुने गए भाषा, कानून और चिकित्सा विज्ञान संकायों से दो सदस्य और कला, विज्ञान और संयुक्त संकायों से तीन-तीन सदस्य शामिल हैं। पीयू की ओर से 5 जुलाई को सीनेट की बैठक भी बुलाई गई है।
सिंडिकेट पीयू की कार्यकारी सरकार
पीयू कैलेंडर के अनुसार यूनिवर्सिटी की कार्यकारी सरकार सिंडिकेट में निहित होती है। जिसके पास कक्षा ए के अधिकारियों की नियुक्ति, कॉलेजों की संबद्धता और असंबद्धता, वार्षिक बजट, अनुदान और अन्य वित्त बोर्ड संबंधित सिफारिशों पर विचार करने की शक्तियां होती हैं। कैलेंडर सिंडिकेट को यूनिवर्सिटी के विभिन्न मामलों पर आदेश पारित करने की शक्ति भी देता है जिसमें कॉलेज, अकादमिक परिषद, संकायों से संबंधित और एक विशेष सीमा तक नए खर्च के प्रस्तावों को मंजूरी देना शामिल है।
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फैकल्टी कांस्टीट्यूएंसी के बिना हो रहे सिंडिकेट चुनाव
पहली बार पीयू में सिंडिकेट चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब सीनेट में फैकल्टी कांस्टीट्यूएंसी से निवार्चित सदस्य नहीं है। पिछले साल सिंतबर में सीनेट की फैकल्टी कांस्टीट्यूएंसी से छह सदस्यों ने जीत हासिल की थी लेकिन चांसलर वैंकेया नायडू की ओर से छह उम्मीदवारों की नोटिफिकेशन रद्द कर दी गई थी। फैकल्टी के ये जीते गए छह उम्मीदवार गोयल ग्रुप से हैं। उम्मीदवारों की ओर से चांसलर के आदेश को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है अभी मामला कोर्ट में लंबित है।
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पीयू में सिंडिकेट के सदस्य सीनेट के सदस्यों में से ही चुने जाते हैं। पिछले सिंडिकेट का एक साल का कार्यकाल दिसंबर 2020 में समाप्त हो गया था। वर्तमान में सीनेट चुनाव में देरी के कारण यूनिवर्सिटी में निर्वाचित सिंडिकेट नहीं है। हालांकि इस साल की शुरुआत में सीनेट ने सिंडिकेट की सभी शक्तियों को वीसी राज कुमार को सौंप दिया था। पीयू की सर्वोच्च शासी निकाय सीनेट का चुनाव 2021 में दो साल के अंतराल के बाद हुआ था। 15 सदस्यीय निकाय में चुने गए भाषा, कानून और चिकित्सा विज्ञान संकायों से दो सदस्य और कला, विज्ञान और संयुक्त संकायों से तीन-तीन सदस्य शामिल हैं। पीयू की ओर से 5 जुलाई को सीनेट की बैठक भी बुलाई गई है।
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सिंडिकेट पीयू की कार्यकारी सरकार
पीयू कैलेंडर के अनुसार यूनिवर्सिटी की कार्यकारी सरकार सिंडिकेट में निहित होती है। जिसके पास कक्षा ए के अधिकारियों की नियुक्ति, कॉलेजों की संबद्धता और असंबद्धता, वार्षिक बजट, अनुदान और अन्य वित्त बोर्ड संबंधित सिफारिशों पर विचार करने की शक्तियां होती हैं। कैलेंडर सिंडिकेट को यूनिवर्सिटी के विभिन्न मामलों पर आदेश पारित करने की शक्ति भी देता है जिसमें कॉलेज, अकादमिक परिषद, संकायों से संबंधित और एक विशेष सीमा तक नए खर्च के प्रस्तावों को मंजूरी देना शामिल है।
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फैकल्टी कांस्टीट्यूएंसी के बिना हो रहे सिंडिकेट चुनाव
पहली बार पीयू में सिंडिकेट चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब सीनेट में फैकल्टी कांस्टीट्यूएंसी से निवार्चित सदस्य नहीं है। पिछले साल सिंतबर में सीनेट की फैकल्टी कांस्टीट्यूएंसी से छह सदस्यों ने जीत हासिल की थी लेकिन चांसलर वैंकेया नायडू की ओर से छह उम्मीदवारों की नोटिफिकेशन रद्द कर दी गई थी। फैकल्टी के ये जीते गए छह उम्मीदवार गोयल ग्रुप से हैं। उम्मीदवारों की ओर से चांसलर के आदेश को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है अभी मामला कोर्ट में लंबित है।