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सीनेट चुनाव पर पंजाब विश्वविद्यालय गंभीर... बूथ बनाने के लिए छह राज्यों से मांगी अनुमति
Sun, 17 Jan 2021 04:21 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2021 04:21 PM IST
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पंजाब विश्वविद्यालय।
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव को लेकर गंभीर हो गई है। पीयू ने छह राज्यों को पत्र भेजकर सीनेट चुनाव के लिए बूथ बनाने की अनुमति मांगी है। अनुमति आने के बाद पीयू चुनाव की अगली रूपरेखा तय करेगी। अगर इन राज्यों की सरकारों की ओर से जवाब समय पर दे दिया गया तो सीनेट का चुनाव जल्दी भी हो सकता है अन्यथा फिर देरी होगी। पीयू के पास फिर इंतजार करने के अलावा कोई और चारा नहीं होगा।
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पीयू सीनेट चुनाव का मुद्दा जैसे ही हाईकोर्ट पहुंचा तो पीयू अपनी कार्रवाई की ओर आगे बढ़ रही है। वहीं चंडीगढ़ प्रशासन ने भी तेजी दिखाते हुए चुनाव को अनुमति दे दी। सीनेट चुनाव बड़े स्तर पर होता है। स्नातक वर्ग की 15 सीटों के लिए चुनाव देशभर में होता है। इसके लिए हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बूथ बनाए जाते हैं और बड़ी संख्या में स्नातक करने वाले लोग वोट डालने आते हैं।
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स्नातक वर्ग की इन सीटों का अपना अलग ही महत्व है और इन सीटों से चुनाव जीतकर आने वाले सीनेटर बेहतर भी माने जाते हैं, क्योंकि वह सीधे संघर्ष करके आगे बढ़ते हैं। ऐसे में बूथ इन राज्यों में बनाए जाएंगे। वहां की सरकारें कोरोना काल में आपत्तियां तो नहीं जताएंगी, ऐसे में उनसे पूछा गया है, क्योंकि बूथ बनाने से पहले उन सरकारों की अनुमति भी पीयू आवश्यक मानती है।
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एक साथ ही होंगे सीनेट चुनाव
पीयू सीनेट के चुनाव एक साथ ही होंगे। सूत्रों का कहना है कि पीयू कैंपस फैकल्टी के चुनाव पहले नहीं करवाएगी। सभी का कार्यक्रम एक साथ जारी होगा ताकि सीनेट का पूरी तरह एक साथ ही गठन हो। यदि फैकल्टी का चुनाव पहले हो गया तो उसके लिए भी अन्य सदस्यों के चुनकर आने का इंतजार करना पड़ेगा। ऐसे में पीयू एक साथ ही चुनाव करवाने की योजना बना रही है।
जानकार बोले- इस प्रक्रिया में लगेगा समय
पीयू के जानकारों का कहना है कि राज्यों की ओर से अनुमति मांगना ठीक है लेकिन इस प्रक्रिया से देरी होगी। इसका कारण यह है कि सरकारों के पास काम अधिक है। ऐसे में जवाब जल्द मिलने की उम्मीद कम है। सरकारों की ओर से जवाब भी सकारात्मक मिलेगा, क्योंकि हर राज्य में कम ही बूथ बनेंगे। ऐसे में कोई आपत्ति या दिक्कत भी नहीं होगी। सूत्रों का कहना है कि सीनेट के गठन में एक साल तक भी लग सकता है।