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पीयू सीनेट : असिस्टेंट-एसोसिएट प्रोफेसर शिक्षक भर्ती के एजेंडे पर लड़ रहे चुनाव
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चंडीगढ़। पीयू में यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक विभागों के असिस्टेंट-एसोसिएट प्रोफेसर के सीनेट चुनाव 10 मई को होने हैं। उम्मीदवार नई शिक्षक भर्ती, प्रमोशन, दंत विभाग के शिक्षकों के लिए प्रमोशन पालिसी लागू करने, शोध की ग्रांट में बढ़ावा और गुणवत्ता में सुधार आदि मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं। उम्मीदवारों ने बताया अभी यूनिवर्सिटी में 50 प्रतिशत स्टाफ ही आ रहा है, इसलिए किसी से मुलाकात नहीं कर रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए ही चुनाव प्रचार किया जा रहा है।
उम्मीदवारों ने बताया कि फैकल्टी चुनाव स्थगित होने के बाद तय समय पर चुनाव होने को लेकर थोड़ी अनिश्चितता है। इसलिए चुनाव प्रचार भी थोड़ा धीमा है। शैक्षणिक कार्य खत्म होने के बाद शाम 5 बजे शिक्षकों से फोन और व्हाट्सएप पर चुनाव संबंधी बातचीत होती है। असिस्टेंट-एसोसिएट प्रोफेसर वर्ग के लिए सात उम्मीदवार मैदान में है। इनमें यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज से एसोसिएट प्रो. अजय रंगा, कानून विभाग से एसोसिएट प्रो. दिनेश कुमार, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की एसोसिएट प्रो. नवरीत, यूआईईटी से असिस्टेंट प्रो. परवीन गोयल, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से अस्सिस्टेंट प्रोफेसर प्रवीण कुमार, भौतिक विज्ञान विभाग से एसोसिएट प्रो. समरजीत सिहोत्रा और पर्यावरण विभाग से असिस्टेंट प्रो. सुमन मोर चुनाव लड़ रही हैं। असिस्टेंट-एसोसिएट प्रोफेसर वर्ग में मतदान के 5 बूथ बनाए जाने हैं। इस चुनाव में 439 मतदाता मतदान करेंगे।
क्या कहते हैं उम्मीदवार
समय पर हल करवाएंगे विद्यार्थी-शिक्षकों के मुद्दे
सबसे पहले तो यूनिवर्सिटी में सीनेट - सिंडिकेट का लोकतांत्रिक ढांचा बना रहना चाहिए। पिछले 9 महीने से चुनाव लटके हैं। सीनेट नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों किसी के भी मुद्दे हल नहीं हो पा रहे हैं। विद्यार्थियों, शिक्षकों के शैक्षणिक मुद्दे हल करवाना हमारी प्राथमिकता रहेगी। शिक्षकों के प्रमोशन लटके हैं, इसे जल्द हल करवाया जाएगा। - डॉ प्रवीण कुमार, उम्मीदवार
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शिक्षकों की भर्ती करवाना प्राथमिकता
पीयू में काफी लंबे समय से शिक्षकों की नियमित भर्ती ही नहीं हुई है। 300 से ज्यादा शिक्षण पद खाली पड़े हैं। हमारी प्राथमिकता नियमित शिक्षक भर्ती रहेगी, क्योंकि यह विद्यार्थियों की पढ़ाई, शोध और रैंकिंग सबको ही प्रभावित करती है। इसके अलावा शिक्षकों के समय पर प्रमोशन करवाने के मुद्दे को उठाया जाएगा। - डॉ. समरजीत सिहोत्रा, उम्मीदवार
मेरी प्राथमिकता शिक्षण और शोध में सुधार
मेरी प्राथमिकता शिक्षण और शोध में सुधार रहेगा। शोध के लिए प्रशासन की तरफ से आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए जिससे शोधार्थी और शिक्षक समय पर शोध कार्य पूरा कर सके। शोधार्थियों के छोटे-छोटे मुद्दे हल नहीं होते, जिसका प्रभाव शोध पर भी पड़ता है। अगर ये हल हो तो शोध गुणवत्ता सुधरने पर यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में भी सुधार होगा और शोध के लिए अच्छी ग्रांट मिल सकेगी। - डॉ सुमन मोर , उम्मीदवार
ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एक प्लेटफार्म हो
हमारी प्राथमिकता रहेगी कि डेंटल कॉलेज के शिक्षकों की प्रमोशन पॉलिसी को लागू किया जाए। इसके साथ विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एक प्लेटफार्म बनाया जाए। इसके लिए एक व्यवस्था या सॉफ्टवेयर बनाया जाए जहां सभी विभागों के शिक्षकों के रिकार्डेड लेक्चर सुरक्षित हो। विद्यार्थी किसी भी समय वहां से डाउनलोड कर सकें। इसके साथ ही शिक्षकों के आवास क्षेत्र में ऑनलाइन कक्षाओं के लिए वाईफाई की सुविधा दी जाए। - डॉ दिनेश, उम्मीदवार
समय पर शिक्षको- विद्यार्थी के मुद्दे हल हों
हमारा लक्ष्य यूनिवर्सिटी में पारदर्शक व्यव्यस्था बनाने का होगा। यूनिवर्सिटी में शिक्षकों व विद्यार्थियों के छोटे छोटे मुद्दे लटकते रहते हैं, जिसकी वजह से परेशानी होती है। डेंटल कॉलेज के लिए प्रमोशन पॉलिसी को लागू करवाया जाएगा। यह पिछले काफी सालों से लटक रही है। - डॉ अजय रंगा, उम्मीदवार
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उम्मीदवारों ने बताया कि फैकल्टी चुनाव स्थगित होने के बाद तय समय पर चुनाव होने को लेकर थोड़ी अनिश्चितता है। इसलिए चुनाव प्रचार भी थोड़ा धीमा है। शैक्षणिक कार्य खत्म होने के बाद शाम 5 बजे शिक्षकों से फोन और व्हाट्सएप पर चुनाव संबंधी बातचीत होती है। असिस्टेंट-एसोसिएट प्रोफेसर वर्ग के लिए सात उम्मीदवार मैदान में है। इनमें यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज से एसोसिएट प्रो. अजय रंगा, कानून विभाग से एसोसिएट प्रो. दिनेश कुमार, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की एसोसिएट प्रो. नवरीत, यूआईईटी से असिस्टेंट प्रो. परवीन गोयल, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से अस्सिस्टेंट प्रोफेसर प्रवीण कुमार, भौतिक विज्ञान विभाग से एसोसिएट प्रो. समरजीत सिहोत्रा और पर्यावरण विभाग से असिस्टेंट प्रो. सुमन मोर चुनाव लड़ रही हैं। असिस्टेंट-एसोसिएट प्रोफेसर वर्ग में मतदान के 5 बूथ बनाए जाने हैं। इस चुनाव में 439 मतदाता मतदान करेंगे।
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क्या कहते हैं उम्मीदवार
समय पर हल करवाएंगे विद्यार्थी-शिक्षकों के मुद्दे
सबसे पहले तो यूनिवर्सिटी में सीनेट - सिंडिकेट का लोकतांत्रिक ढांचा बना रहना चाहिए। पिछले 9 महीने से चुनाव लटके हैं। सीनेट नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों किसी के भी मुद्दे हल नहीं हो पा रहे हैं। विद्यार्थियों, शिक्षकों के शैक्षणिक मुद्दे हल करवाना हमारी प्राथमिकता रहेगी। शिक्षकों के प्रमोशन लटके हैं, इसे जल्द हल करवाया जाएगा। - डॉ प्रवीण कुमार, उम्मीदवार
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शिक्षकों की भर्ती करवाना प्राथमिकता
पीयू में काफी लंबे समय से शिक्षकों की नियमित भर्ती ही नहीं हुई है। 300 से ज्यादा शिक्षण पद खाली पड़े हैं। हमारी प्राथमिकता नियमित शिक्षक भर्ती रहेगी, क्योंकि यह विद्यार्थियों की पढ़ाई, शोध और रैंकिंग सबको ही प्रभावित करती है। इसके अलावा शिक्षकों के समय पर प्रमोशन करवाने के मुद्दे को उठाया जाएगा। - डॉ. समरजीत सिहोत्रा, उम्मीदवार
मेरी प्राथमिकता शिक्षण और शोध में सुधार
मेरी प्राथमिकता शिक्षण और शोध में सुधार रहेगा। शोध के लिए प्रशासन की तरफ से आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए जिससे शोधार्थी और शिक्षक समय पर शोध कार्य पूरा कर सके। शोधार्थियों के छोटे-छोटे मुद्दे हल नहीं होते, जिसका प्रभाव शोध पर भी पड़ता है। अगर ये हल हो तो शोध गुणवत्ता सुधरने पर यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में भी सुधार होगा और शोध के लिए अच्छी ग्रांट मिल सकेगी। - डॉ सुमन मोर , उम्मीदवार
ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एक प्लेटफार्म हो
हमारी प्राथमिकता रहेगी कि डेंटल कॉलेज के शिक्षकों की प्रमोशन पॉलिसी को लागू किया जाए। इसके साथ विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एक प्लेटफार्म बनाया जाए। इसके लिए एक व्यवस्था या सॉफ्टवेयर बनाया जाए जहां सभी विभागों के शिक्षकों के रिकार्डेड लेक्चर सुरक्षित हो। विद्यार्थी किसी भी समय वहां से डाउनलोड कर सकें। इसके साथ ही शिक्षकों के आवास क्षेत्र में ऑनलाइन कक्षाओं के लिए वाईफाई की सुविधा दी जाए। - डॉ दिनेश, उम्मीदवार
समय पर शिक्षको- विद्यार्थी के मुद्दे हल हों
हमारा लक्ष्य यूनिवर्सिटी में पारदर्शक व्यव्यस्था बनाने का होगा। यूनिवर्सिटी में शिक्षकों व विद्यार्थियों के छोटे छोटे मुद्दे लटकते रहते हैं, जिसकी वजह से परेशानी होती है। डेंटल कॉलेज के लिए प्रमोशन पॉलिसी को लागू करवाया जाएगा। यह पिछले काफी सालों से लटक रही है। - डॉ अजय रंगा, उम्मीदवार