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पीयू के प्रो. वीआर सिन्हा को डीयूआई और प्रो. राजेश गिल को बनाया जा सकता डीन रिसर्च
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में इसी माह दो बड़े पदों पर वरिष्ठ शिक्षकों को जिम्मेदारी मिल सकती है। डीयूआई प्रो. वीआर सिन्हा और डीन रिसर्च प्रो. राजेश गिल को बनाया जा सकता है। यह पदभार 29 जनवरी को ही मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि 30 व 31 जनवरी को पीयू में अवकाश रहेगा। यह भी बताया जा रहा है कि डीन रिसर्च की जिम्मेदारी इस बार बढ़ सकती है। उन्हें सभी फैकल्टी डीन का कार्य भी करना पड़ सकता है। फैकल्टी डीन का कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म हो रहा है।
वीसी के बाद पीयू में वरिष्ठ अफसरों में डीयूआई आते हैं। इस पद पर वरिष्ठ शिक्षक को जगह दी जाती है। अमूमन जो प्रोफेसर डीन रिसर्च बनता है उसे ही आगे डीयूआई बनाया जाता है। वर्तमान में डीन रिसर्च प्रो. वीआर सिन्हा हैं, जिन्हें फरवरी से डीयूआई बनाया जा सकता है, क्योंकि डीयूआई पद पर तैनात प्रो. आरके सिंगला का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है। ऐसे में पीयू को नए डीयूआई बनाने की जरूरत होगी। वहीं दूसरी ओर जब प्रो. वीआर सिन्हा डीयूआई बन जाएंगे तो डीन रिसर्च का पद खाली होगा। इस पद पर वरिष्ठता के मुताबिक प्रोफेसरों की तैनाती होती आ रही है। ऐसे में वरिष्ठता में सबसे आगे प्रो. राजेश गिल का नाम चल रहा है।
इनसेट---
आशंकाओं को पंख लगे तो नजारा बदल भी सकता
इसी माह में पीयू में चर्चा थी कि डीयूआई किसी भी वरिष्ठ शिक्षक को पीयू प्रशासन बना सकता है। इसका विरोध पुटा ने किया और कहा कि नियमों को पीयू प्रशासन न तोड़े। चेतावनी भी दी। सूत्रों का कहना है कि पुटा की चेतावनी के बाद कुछ माहौल जरूर बदलता दिख रहा है, लेकिन यदि पीयू के अफसरों ने किसी दूसरे शिक्षक का चयन इन दोनों पदों में से किसी एक के लिए कर लिया तो फिर नजारा बदल सकता है। हालांकि पीयू प्रशासन ने अपना रुख अभी साफ नहीं किया है। अभी तक बात वरिष्ठता की ही की जा रही है लेकिन कुछ वरिष्ठ शिक्षकों में चर्चा है कि पीयू प्रशासन कुछ नया कर सकता है।
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इनसेट---
वरिष्ठता का पालन न करने पर हटाने पड़े थे डीन रिसर्च
पीयू में पिछले वर्षों में डीन रिसर्च का जिम्मा किसी एक वरिष्ठ शिक्षक को दे दिया गया। उसके बाद पुटा ने इस पर विरोध दर्ज कराया और मामला सिंडिकेट में चला गया। सिंडिकेट ने वरिष्ठता का पालन न होने के कारण डीन रिसर्च को हटा दिया और उसके बाद डीन रिसर्च का जिम्मा प्रो. वीआर सिन्हा को वरिष्ठता के मुताबिक दिया गया।
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वीसी के बाद पीयू में वरिष्ठ अफसरों में डीयूआई आते हैं। इस पद पर वरिष्ठ शिक्षक को जगह दी जाती है। अमूमन जो प्रोफेसर डीन रिसर्च बनता है उसे ही आगे डीयूआई बनाया जाता है। वर्तमान में डीन रिसर्च प्रो. वीआर सिन्हा हैं, जिन्हें फरवरी से डीयूआई बनाया जा सकता है, क्योंकि डीयूआई पद पर तैनात प्रो. आरके सिंगला का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है। ऐसे में पीयू को नए डीयूआई बनाने की जरूरत होगी। वहीं दूसरी ओर जब प्रो. वीआर सिन्हा डीयूआई बन जाएंगे तो डीन रिसर्च का पद खाली होगा। इस पद पर वरिष्ठता के मुताबिक प्रोफेसरों की तैनाती होती आ रही है। ऐसे में वरिष्ठता में सबसे आगे प्रो. राजेश गिल का नाम चल रहा है।
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आशंकाओं को पंख लगे तो नजारा बदल भी सकता
इसी माह में पीयू में चर्चा थी कि डीयूआई किसी भी वरिष्ठ शिक्षक को पीयू प्रशासन बना सकता है। इसका विरोध पुटा ने किया और कहा कि नियमों को पीयू प्रशासन न तोड़े। चेतावनी भी दी। सूत्रों का कहना है कि पुटा की चेतावनी के बाद कुछ माहौल जरूर बदलता दिख रहा है, लेकिन यदि पीयू के अफसरों ने किसी दूसरे शिक्षक का चयन इन दोनों पदों में से किसी एक के लिए कर लिया तो फिर नजारा बदल सकता है। हालांकि पीयू प्रशासन ने अपना रुख अभी साफ नहीं किया है। अभी तक बात वरिष्ठता की ही की जा रही है लेकिन कुछ वरिष्ठ शिक्षकों में चर्चा है कि पीयू प्रशासन कुछ नया कर सकता है।
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वरिष्ठता का पालन न करने पर हटाने पड़े थे डीन रिसर्च
पीयू में पिछले वर्षों में डीन रिसर्च का जिम्मा किसी एक वरिष्ठ शिक्षक को दे दिया गया। उसके बाद पुटा ने इस पर विरोध दर्ज कराया और मामला सिंडिकेट में चला गया। सिंडिकेट ने वरिष्ठता का पालन न होने के कारण डीन रिसर्च को हटा दिया और उसके बाद डीन रिसर्च का जिम्मा प्रो. वीआर सिन्हा को वरिष्ठता के मुताबिक दिया गया।