{"_id":"60d24eca8ebc3e32cb6f6d4a","slug":"pu-may-have-to-take-approval-from-ugc-for-recruitment-of-teachers-chandigarh-news-pkl417611563","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षकों की भर्ती के लिए पीयू को यूजीसी से लेनी पड़ सकती है मंजूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षकों की भर्ती के लिए पीयू को यूजीसी से लेनी पड़ सकती है मंजूरी
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय को अब शिक्षकों की भर्ती के लिए यूजीसी से अनुमति लेनी पड़ सकती है, क्योंकि कोरोना के प्रसार के बाद धन का अभाव हो गया है। ऐसे में एक साथ शिक्षकों की भर्तियां नहीं हो सकेंगी।
पीयू ने दो साल पहले 26 असिस्टेंट प्रोफेसरों की रिक्तियां निकाली थीं। उसके बाद सिंडिकेट ने इस प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में रिक्तियां की जाएंगी, उनमें अधिक आवश्यकता नहीं है। कई ऐसे विभाग हैं, जहां शिक्षकों की जरूरत है। उन विभागों की रिक्तियां निकाली जाएं। इसके लिए सिंडिकेट ने एक कमेटी बनाई। इस कमेटी ने पूरा रिकॉर्ड देखा और नौ शिक्षकों की भर्ती करने की अनुमति दी, लेकिन बाद में यह रिक्तियां घटकर दो ही रह गईं। उसके बाद पीयू ने प्रस्ताव टाल दिया और स्थायी शिक्षकों की रिक्तियां नहीं हो सकीं, जबकि यूजीसी से बमुश्किल इन रिक्तियों के लिए अनुमति ली गई थी। उसके बाद कोरोना आ गया। दो साल से सरकार व संस्थानों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। सूत्रों का कहना है कि अब शिक्षकों की भर्तियां करना आसान नहीं है। इसके लिए यूजीसी से दोबारा अनुमति लेनी होगी। साथ ही पीयू को इसके लिए दोबारा प्रस्ताव तैयार करना होगा और नए सिरे से प्रक्रियाएं शुरू होंगी।
जानकारों का कहना है कि सिंडिकेट चाहती तो यह रिक्तियां पूरी हो जातीं। इससे पीयू का शिक्षक-छात्र अनुपात भी ठीक हो जाता, जो नैक की रैंकिंग के लिए जरूरी है। अन्य रैंकिंग में भी यह मानक जरूरी है। इस कारण पीयू को कम अंक मिलते हैं। इस पर पीयू को जोर देने की आवश्यकता थी।
विज्ञापन
21 अस्थायी शिक्षकों की भर्ती भी नहीं हो सकी
पीयू में जब स्थायी शिक्षकों की भर्तियां नहीं हो पाई तो अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां करने के लिए 21 पद निकाले गए। जैसे ही कुछ लोगों को इसका पता लगा, तो उन्होंने दबाव डालकर इन पर रोक लगवा दी। इससे प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। सूत्रों का कहना था कि यह अस्थायी भर्तियां इसलिए की जा रही थीं कि उन्हें बाद में स्थायी कर दिया जाता। बैकडोर एंट्री का रास्ता इसे बताया गया। हालांकि पीयू ने इसे लेकर कोई सफाई नहीं दी। अब कुछ विभागों में पढ़ाई के लिए जरूरत के हिसाब से गेस्ट फैकल्टी का चयन किया गया है।
विज्ञापन
पीयू ने दो साल पहले 26 असिस्टेंट प्रोफेसरों की रिक्तियां निकाली थीं। उसके बाद सिंडिकेट ने इस प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में रिक्तियां की जाएंगी, उनमें अधिक आवश्यकता नहीं है। कई ऐसे विभाग हैं, जहां शिक्षकों की जरूरत है। उन विभागों की रिक्तियां निकाली जाएं। इसके लिए सिंडिकेट ने एक कमेटी बनाई। इस कमेटी ने पूरा रिकॉर्ड देखा और नौ शिक्षकों की भर्ती करने की अनुमति दी, लेकिन बाद में यह रिक्तियां घटकर दो ही रह गईं। उसके बाद पीयू ने प्रस्ताव टाल दिया और स्थायी शिक्षकों की रिक्तियां नहीं हो सकीं, जबकि यूजीसी से बमुश्किल इन रिक्तियों के लिए अनुमति ली गई थी। उसके बाद कोरोना आ गया। दो साल से सरकार व संस्थानों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। सूत्रों का कहना है कि अब शिक्षकों की भर्तियां करना आसान नहीं है। इसके लिए यूजीसी से दोबारा अनुमति लेनी होगी। साथ ही पीयू को इसके लिए दोबारा प्रस्ताव तैयार करना होगा और नए सिरे से प्रक्रियाएं शुरू होंगी।
विज्ञापन
जानकारों का कहना है कि सिंडिकेट चाहती तो यह रिक्तियां पूरी हो जातीं। इससे पीयू का शिक्षक-छात्र अनुपात भी ठीक हो जाता, जो नैक की रैंकिंग के लिए जरूरी है। अन्य रैंकिंग में भी यह मानक जरूरी है। इस कारण पीयू को कम अंक मिलते हैं। इस पर पीयू को जोर देने की आवश्यकता थी।
विज्ञापन
21 अस्थायी शिक्षकों की भर्ती भी नहीं हो सकी
पीयू में जब स्थायी शिक्षकों की भर्तियां नहीं हो पाई तो अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां करने के लिए 21 पद निकाले गए। जैसे ही कुछ लोगों को इसका पता लगा, तो उन्होंने दबाव डालकर इन पर रोक लगवा दी। इससे प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। सूत्रों का कहना था कि यह अस्थायी भर्तियां इसलिए की जा रही थीं कि उन्हें बाद में स्थायी कर दिया जाता। बैकडोर एंट्री का रास्ता इसे बताया गया। हालांकि पीयू ने इसे लेकर कोई सफाई नहीं दी। अब कुछ विभागों में पढ़ाई के लिए जरूरत के हिसाब से गेस्ट फैकल्टी का चयन किया गया है।