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बिना शिक्षक भर्ती के नैक ग्रेडिंग में पिछड़ सकती है पीयू

Thu, 22 Jul 2021 02:00 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 22 Jul 2021 02:00 AM IST
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PU may behind in NAAC grading without teacher recruitment
चंडीगढ़। पीयू में नैक का दौरा अगले साल है, लेकिन अब तक शिक्षकों की भर्तियां करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। न ही विभागों का विलय किया गया। शिक्षकों को चिंता है कि इससे नैक की ग्रेडिंग गिर सकती है। इससे पीयू को नुकसान होगा। ग्रांट आदि जो शोध के लिए मिलती है, उस पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। कुछ वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि पीयू को इस साल में यह काम पूरे कर लेने चाहिएं। अधिकारियों को इसके लिए कदम उठाने होंगे।
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2015 में नैक की टीम ने पीयू का दौरा किया था। उस समय पीयू में छोटे-छोटे विभाग देखकर टीम ने आपत्ति दायर की थी। साथ ही छोटे विभागों का विलय संबंधित बड़े विभागों में करने की सलाह दी थी। वहीं छात्र-शिक्षक अनुपात कम मिला। छात्रों की संख्या के मुताबिक शिक्षक न होने से शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। इस पर भी नैक की टीम ने काम करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि यह बिंदु महत्वपूर्ण है। कम शिक्षकों से केवल काम तो चल सकता है, लेकिन गुणवत्ता बेहतर नहीं हो सकती।
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इसके अलावा छात्रों की संख्या को देखते हुए छात्रावासों की संख्या कम मिलने पर सुझाव दिया था कि छात्रावास बनाए जाएं। उसके बाद पीयू ने एक छात्रावास का निर्माण तो शुरू किया, लेकिन वह आज पूरी तरह पूरा नहीं हो सका। नैक ने मानकों की जांच के लिए 2020 तक का समय दिया था, लेकिन पीयू ने दो साल अतिरिक्त मांगे और 2022 तक मानकों की पूर्ति करने को कहा और नैक ने इसे स्वीकार कर लिया। अतिरिक्त समय मिलने के बाद भी मानक अब तक पूरे नहीं हो सके।
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यह आई बाधा
पीयू ने विभागों के विलय के लिए कई कमेटियां बनाईं, लेकिन सब बैठकों तक ही सीमित रहा। पिछले साल कमेटी ने विलय का प्रस्ताव फाइनल किया था, लेकिन उर्दू को विदेशी भाषा में शामिल करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। पंजाब के सीएम ने भी इस पर आपत्ति दायर की थी। आखिरकार विलय का प्रस्ताव टाल दिया गया, जो आज तक नहीं हो पाया। सूत्रों का कहना है कि छोटे विभागों के शिक्षक भी नहीं चाहते हैं कि उनके विभागों का विलय हो, क्योंकि उनका भी बारी-बारी से चेयरमैन बनने का समय आएगा।

इस तरह भर्तियां टाली गई
पीयू ने 26 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए रिक्तियां निकालीं। इसके लिए एक हजार से अधिक आवेदन भी मांगे गए, लेकिन सिंडिकेट ने इस पर रोक लगा दी। इसका कारण बताया कि रिक्तियां सही नहीं निकाली गई। इसकी जांच हुई और रिकॉर्ड देखे गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। अस्थायी शिक्षकों की भी 21 रिक्तियां निकाली गई थीं, लेकिन इन पर भी रोक लगा दी गई। कुल मिलाकर प्रस्ताव लटका हुआ है।
वर्जन---
विभागों के विलय का प्रस्ताव तैयार करके कमेटी ने उच्चाधिकारियों को भेज दिया है। वहां से मंजूरी के बाद काम शुरू हो जाएगा। -प्रो. वीआर सिन्हा, डीयूआई
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