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पीयू शासन सुधार : सीनेट व सिंडिकेट में होगा बड़ा बदलाव, उच्च स्तरीय समिति की सहमति बनीं

Thu, 25 Mar 2021 02:28 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 25 Mar 2021 02:28 AM IST
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PU Governance Reform: Major changes in Senate and Syndicate, high-level committee agreed
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट व सिंडिकेट में आमूलचूल परिवर्तन होगा। उच्चस्तरीय समिति ने इस पर सहमति जताई है। इसके अलावा संकाय डीन, बोर्ड ऑफ स्टडीज व एकेडमिक काउंसिल के सदस्यों के लिए चुनाव नहीं होंगे। यह पद शिक्षकों को रोटेशन आदि प्रकार से दिए जाएंगे। 150 से अधिक आए सुझावों पर मंथन करने के बाद समिति ने कुल मिलाकर इन निर्णयों की ओर कदम बढ़ाया है। हालांकि 14 अप्रैल को होने वाली बैठक में सभी रास्ते साफ हो जाएंगे। समिति ने यह साफ कर दिया है कि 26 मार्च तक आने वाले सुझावों को ही वह स्वीकार करेगी, क्योंकि समिति के पास समय इसके लिए और नहीं है। उन्हें निर्धारित समय के अंदर चांसलर को इसकी रिपोर्ट देनी है।
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एक घंटे तक पीयू समेत कई शिक्षण संस्थानों की शासन व्यवस्था को जाना
पीयू शासन सुधार को लेकर चांसलर कार्यालय की ओर से बनाई गई उच्चस्तरीय समिति की दूसरी बैठक केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा के वीसी प्रो. आरपी तिवारी की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान पीयू रजिस्ट्रार विक्रम नैयर ने लगभग एक घंटे पीयू के संविधान के बारे में सभी सदस्यों को जानकारी दी। सीनेट व सिंडिकेट के संचालन से लेकर डीन संकाय आदि के चयन की प्रक्रियाओं के बारे में बताया। उसके बाद आईआईटी, आईआईएम के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय, जीएनयू, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय आदि की शासन प्रणालियों के बारे में बताया गया। सूत्रों का कहना है कि समिति ने हैरत जताई कि पीयू व अन्य शिक्षण संस्थानों की शासन प्रणाली में बहुत अंतर है। इस पर सहमति निकलकर आई कि सीनेट व सिंडिकेट में आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत है।
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इसलिए नहीं है डीन के लिए चुनाव की आवश्यकता
डीन संकाय, एकेडमिक काउंसिल, बोर्ड ऑफ स्टडीज आदि के चयन पर भी बात की गई। सभी ने इस पर सहमति जताई है कि यह शैक्षिक पद होंगे। ऐसे में इन पदों का संचालन पीयू के शिक्षकों से बेहतर और कोई नहीं कर पाएगा। रोटेशन या अन्य तरीकों से शिक्षकों को बारी-बारी से इन पदों पर कार्य करने का मौका मिलना चाहिए। संकाय डीन के लिए बाहरी लोगों की आवश्यकता महसूस नहीं की गई। कहा कि संकाय डीन का कार्य महत्वपूर्ण है। ऐसे में उसी संकाय के सीनियर शिक्षकों को इस कार्य में लगाया जाना चाहिए ताकि संकाय का कार्य बेहतर हो सके। सूत्रों का कहना है कि यह तय हो गया है कि इन पदों के लिए किसी प्रकार के कोई चुनाव नहीं होंगे। कई अन्य मामलों पर भी चर्चा हुई लेकिन समिति ने अभी फाइनल निर्णय नहीं लिया है।
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पीयू रजिस्ट्रार की मेल पर सुझाव कितने भी शब्द में दे सकते
उच्चस्तरीय समिति के समक्ष ये बात रखी गई कि पोर्टल पर मांगे गए सुझावों के लिए 250 शब्दों की बाध्यता है। इस पर कुछ लोगों ने आपत्ति दायर की है। इस पर समिति ने कहा कि पोर्टल पर शब्दों की बाध्यता करना जरूरी है, क्योंकि पोर्टल तभी तैयार होता है। किसी को अधिक शब्दों में अपने सुझाव देने हैं तो वह पीयू रजिस्ट्रार की मेल आईडी पर सुझाव भेज सकते हैं। उसके लिए कोई शब्द सीमा नहीं है। मेल पर भेजे गए सुझावों को भी समिति स्वीकार करेगी। समिति के पास अब तक 150 सुझाव पहुंचे हैं। इन पर भी बात की गई। बाकी 26 मार्च तक आने वाले सुझावों को दूसरी बैठक में रखा जाएगा और निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सर्वाधिक सुझाव देने वालों में पीयू के शिक्षक हैं। उनमे से तमाम लोगों ने शासन सुधार की मांग रखी है।

ऑनलाइन हुई बैठक में ये सदस्य रहे मौजूद
नैक कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. वीएस चौहान को छोड़कर बाकी सभी 10 सदस्य बैठक में ऑनलाइन रूप से मौजूद रहे। इनमें आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. पीके रैना, पूर्व वीसी पीयू प्रो. केएन पाठक, पीयू वीसी प्रो. राजकुमार, चांसलर के नॉमिनी पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, पंजाब सीएम के नॉमिनी गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के वीसी डॉ. जसपाल सिंह संधू, डीपीआई कॉलेज पंजाब एस परमजीत सिंह, रूबिंदरजीत सिंह बराड़ निदेशक उच्च शिक्षा, रजिस्ट्रार विक्रम नैयर शामिल हैं।
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