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मान सराया इंडस्ट्रीज को एक रुपये की भी विदेशी फंडिंग साबित करके दिखाएं: सुखबीर
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-बोले, झूठे केस बना रहे, हमारे पास पक्के सबूत, सरकार बदली तो सभी जाएंगे अंदर
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को यह साबित करने की चुनौती दी कि सराया इंडस्ट्रीज लिमिटेड को 2007 से लेकर अब तक एक रुपये की भी विदेशी फंडिंग प्राप्त की हो। पार्टी के वरिष्ठ नेता बिक्रम मजीठिया को इस कंपनी में विरासत में 11 फीसदी का हिस्सा मिला है। उन्होंने अकाली नेता के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हमारे पास इनके खिलाफ पक्के सबूत हैं। सरकार बदली तो सभी अंदर जाएंगे। वह शनिवार को प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सराया इंडस्ट्रीज को दिसंबर 2005 में एकमात्र विदेशी फंडिंग मिली थी, जब कंपनी में 25 फीसदी शेयरों के बदले अमेरिका स्थित क्लियरवाॅटर काॅरपोरेशन से 35 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। मजीठिया ने 2007 में राजनीति में प्रवेश किया था। इस कंपनी ने एनबीएफसी के माध्यम से सराया इंडस्ट्रीज में निवेश किया गया सारा पैसा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से उचित मंजूरी के बाद किया गया था।
निवेश के दावे राजनीति बदलाखोरी से प्रेरित
बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि सराया इंडस्ट्रीज के सभी लेन-देन की आयकर विभाग ने जांच की और उसे स्वीकार किया गया। उन्होंने कहा कि इससे साफ साबित होता है कि सराया इंडस्ट्रीज में विदेशी फंडिंग के माध्यम से 540 करोड़ रुपये के निवेश के दावे राजनीति बदलाखोरी से प्रेरित है। सुखबीर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य के डीजीपी पर मजीठिया के खिलाफ मामला दर्ज करने पर दबाव डाला था, क्योंकि मजीठिया लगातार सीएम और कैबिनेट सहयोगियों की गलत नीतियों का पर्दाफाश कर रहे थे। डीजीपी ने उसी रात 10.40 पर अकाली नेता के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए सतर्कता विभाग को लिखा। इसके बाद 25 जून की सुबह 4.40 बजे मजीठिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को यह साबित करने की चुनौती दी कि सराया इंडस्ट्रीज लिमिटेड को 2007 से लेकर अब तक एक रुपये की भी विदेशी फंडिंग प्राप्त की हो। पार्टी के वरिष्ठ नेता बिक्रम मजीठिया को इस कंपनी में विरासत में 11 फीसदी का हिस्सा मिला है। उन्होंने अकाली नेता के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हमारे पास इनके खिलाफ पक्के सबूत हैं। सरकार बदली तो सभी अंदर जाएंगे। वह शनिवार को प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सराया इंडस्ट्रीज को दिसंबर 2005 में एकमात्र विदेशी फंडिंग मिली थी, जब कंपनी में 25 फीसदी शेयरों के बदले अमेरिका स्थित क्लियरवाॅटर काॅरपोरेशन से 35 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। मजीठिया ने 2007 में राजनीति में प्रवेश किया था। इस कंपनी ने एनबीएफसी के माध्यम से सराया इंडस्ट्रीज में निवेश किया गया सारा पैसा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से उचित मंजूरी के बाद किया गया था।
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निवेश के दावे राजनीति बदलाखोरी से प्रेरित
बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि सराया इंडस्ट्रीज के सभी लेन-देन की आयकर विभाग ने जांच की और उसे स्वीकार किया गया। उन्होंने कहा कि इससे साफ साबित होता है कि सराया इंडस्ट्रीज में विदेशी फंडिंग के माध्यम से 540 करोड़ रुपये के निवेश के दावे राजनीति बदलाखोरी से प्रेरित है। सुखबीर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य के डीजीपी पर मजीठिया के खिलाफ मामला दर्ज करने पर दबाव डाला था, क्योंकि मजीठिया लगातार सीएम और कैबिनेट सहयोगियों की गलत नीतियों का पर्दाफाश कर रहे थे। डीजीपी ने उसी रात 10.40 पर अकाली नेता के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए सतर्कता विभाग को लिखा। इसके बाद 25 जून की सुबह 4.40 बजे मजीठिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया।
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