चंडीगढ़। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी गंभीर बीमारी में अगर इनहेलर का सही तरह से इस्तेमाल किया जाए तो समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है लेकिन ज्यादातर मरीजों को इनहेलर लेने का सही तरीका ही पता नहीं होता। इससे वे अनजाने में गलत तरीके से दवा लेते हैं, जिससे उन पर इलाज का असर नहीं होता लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर इनहेलर सही ढंग से लिया जाए तो ये अन्य माध्यमों से ली जाने वाली दवा की तुलना में बेहद कारगर साबित होता है। यह जानकारी अमेरिकन कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन के फेलो डॉ. सुरेश कुमार गोयल ने विश्व सीओपीडी दिवस के उपलक्ष्य में मंगलवार को प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में दी।
कार्यक्रम में मौजूद पल्मोनोलॉजिस्ट व इंडियन चेस्ट सोसाइटी की सदस्य डॉ. सोनल ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के मरीजों में मर्ज की गंभीरता धीरे-धीरे कम हो रही है। इसका मुख्य कारण, इनमें इनहेलर संबंधी सही जानकारी का पहुंचना है। डॉ. सोनल ने बताया कि इनहेलर से स्टेरायड की कम खुराक से भी कारगर परिणाम प्राप्त होता है। क्योंकि वह सीधे फेफड़े में पहुंचता है। इसका प्रभाव तेज होता है और शारीरिक नुकसान नहीं होता जबकि इंजेक्शन या गोली का असर इसकी तुलना में धीमी गति से होता है। कार्यक्रम में मौजूद डॉ. रणजीत कुमार गोन और डॉ. जगपाल पंढेर ने बताया कि विश्व में कैंसर और हृदय रोग के बाद सीओपीडी से मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है।