बढ़ती समस्या: करियर की चाह से शादियों में हो रही देरी, संतान सुख से वंचित हो रहे दंपती
विवाह के बाद भी दो से तीन साल तक बच्चा करने से परहेज किया जा रहा है। मां बनने में देरी होने से एक ओर जहां गर्भधारण करने में समस्या हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ ये स्तन कैंसर या ओवरी कैंसर का कारण भी बन सकता है।
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प्रतिस्पर्धा के इस दौर में करियर बनाने व दूसरों से आगे निकलने की चाह नव दंपतियों को संतान सुख से वंचित कर रही है। भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान में जंकफूड की अधिकता भी इसका कारण बन रही है। विवाह में विलंब के कारण उन्हें तमाम तरह की शारीरिक व मानसिक परेशानियां हो रही हैं। वे संतान सुख के लिए डॉक्टरों के चक्कर काट रहे हैं। चंडीगढ़ पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओपीडी के आंकड़े इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। कोविड के दौरान भी यहां बांझपन के सैकड़ों मामले आए। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते गंभीरता नहीं दिखाई गई तो आने वाले समय में स्थिति गंभीर होगी।
सैटल होने की चाह में हो रहा विलंब
इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेंड रिप्रोडक्शन की चेयरमैन डॉ. गुरप्रीत कौर बेदी का कहना है कि पहले 20 से 25 साल के दौरान विवाह संस्कार पूरा कर लिया जाता था, लेकिन अब यह सीमा 30 से 35 साल तक पहुंच चुकी है। यह बांझपन की समस्या को बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि 35 साल के बाद 60 प्रतिशत अंडे खराब हो जाते हैं। वहीं पुरुषों में स्पर्म काउंट लगातार कम होता जाता है जिससे उन्हें आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) का सहारा लेना पड़ता है।
यह विलंब करियर बनाने की चाह और नौकरी मिलने के बाद सैटल होने की जिद के कारण हो रहा है। विवाह के बाद भी दो से तीन साल तक बच्चा करने से परहेज किया जा रहा है। इसके साथ ही शादी से पहले बनाए गए यौन संबंध भी विभिन्न प्रकार के संक्रमण को बढ़ा रहे हैं। वैजाइनल ट्यूब बंद होने से गर्भधारण करने में रुकावट होने लगती है।
मां बनने में देरी बन सकती है कैंसर का कारण
प्रदूषण, तनाव और अनियमित दिनचर्या बन रही कारण
स्वास्थ्य निदेशक और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप कंग का कहना है कि बांझपन की बढ़ती समस्या के लिए प्रदूषण और तनाव का बढ़ता स्तर भी काफी हद तक जिम्मेदार है। साथ ही भागदौड़ की जिंदगी में अव्यवस्थित दिनचर्या भी इसे बढ़ावा दे रही है। महिलाओं की तरह पुरुषों में भी विभिन्न प्रकार के संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है, जो गर्भधारण करने में रुकावट का कारण बन रहा है।
इन बातों को गंभीरता से लें
- 25 साल के अंदर शादी करने का निर्णय लें
- शादी के एक से डेढ़ साल के दौरान गर्भधारण हो जाना चाहिए
- उस दौरान किसी भी तरह की परेशानी होने पर इंतजार करने के बजाय तत्काल विशेषज्ञ की राय लें
- गर्भधारण में विलंब होने पर पति-पत्नी दोनों ही अपना चेकअप कराएं
- प्रतिदिन 25 से 30 मिनट योग, व्यायाम या आसन जरूर करें
- तनाव प्रबंधन के लिए मेडिटेशन बेहतर माध्यम हो सकता है
- शादी से पहले यौन संबंधों को लेकर सावधान रहें
- खानपान में पोषक तत्व युक्त आहार शामिल करें
वर्ष कुल ओपीडी बांझपन के मामले
2017-18 37115 12386
2018-19 39761 13550
2019-20 37908 13118
(नोट : पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के आंकड़े)
बांझपन के इलाज के लिए मौजूदा समय में कई आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। आईवीएफ उनमें से एक है। फिर भी युवाओं को इस समस्या के समाधान के लिए इलाज के बजाय समय पर विवाह का निर्णय अपनाना होगा जिससे उनके साथ ही उनकी संतान स्वस्थ जीवन जी सके। -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक