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चंडीगढ़ः मनमानी पर अड़े स्कूल, बैलेंस शीट संबंधी प्रशासन के आदेश के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट
Fri, 05 Jun 2020 11:43 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 05 Jun 2020 11:43 AM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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चंडीगढ़ के निजी स्कूलों की संस्था ‘इंडिपेंडेंट स्कूल्स एसोसिएशन’ व सौपिंस स्कूल और सेंट सोल्जर्स स्कूल ने प्रशासन के आदेश को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस आरके जैन एवं जस्टिस अशोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने बिना कोई निर्देश जारी किए सुनवाई सोमवार 8 जून तक स्थगित कर दी है।
इंडिपेंडेंट स्कूल्स एसोसिएशन और सौपिंस स्कूल तथा सेंट सोल्जर्स स्कूल ने याचिका में कहा कि पंजाब सरकार ने वर्ष 2016 में अनएडेड निजी स्कूलों की फीस तय करने के लिए पंजाब रेगुलेशन ऑफ़ फीस ऑफ़ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन एक्ट बनाया था। जिसे केंद्र सरकार ने सेक्शन-87 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल कर चंडीगढ़ में लागू कर दिया था।
एक्ट के चंडीगढ़ में लागू होने के बाद सितंबर 2018 में रेगुलेटरी बॉडी गठित कर दी गई। चंडीगढ़ प्रशासन ने 24 अप्रैल को एक्ट में मोडिफिकेशन कर उसके सेक्शन-5 के क्लॉज-4 के तहत निजी स्कूलों को निर्देश जारी किए कि वे अपनी आय और खर्च के पूरे ब्यौरे की बैलेंस शीट वेबसाइट पर अपलोड करें।
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याचिकाकर्ता संस्था का कहना है कि अब चंडीगढ़ प्रशासन इसके तहत ऐसा न करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रहा है। कोविड-19 के कारण स्कूल पहले ही काफी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। ऐसे में अब उन्हें डर है कि प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है जबकि उनके स्कूलों की पूरी अकाउंट स्टेटमेंट पहले ही संबंधित ऑथारिटी के पास है।
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इंडिपेंडेंट स्कूल्स एसोसिएशन और सौपिंस स्कूल तथा सेंट सोल्जर्स स्कूल ने याचिका में कहा कि पंजाब सरकार ने वर्ष 2016 में अनएडेड निजी स्कूलों की फीस तय करने के लिए पंजाब रेगुलेशन ऑफ़ फीस ऑफ़ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन एक्ट बनाया था। जिसे केंद्र सरकार ने सेक्शन-87 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल कर चंडीगढ़ में लागू कर दिया था।
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एक्ट के चंडीगढ़ में लागू होने के बाद सितंबर 2018 में रेगुलेटरी बॉडी गठित कर दी गई। चंडीगढ़ प्रशासन ने 24 अप्रैल को एक्ट में मोडिफिकेशन कर उसके सेक्शन-5 के क्लॉज-4 के तहत निजी स्कूलों को निर्देश जारी किए कि वे अपनी आय और खर्च के पूरे ब्यौरे की बैलेंस शीट वेबसाइट पर अपलोड करें।
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याचिकाकर्ता संस्था का कहना है कि अब चंडीगढ़ प्रशासन इसके तहत ऐसा न करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रहा है। कोविड-19 के कारण स्कूल पहले ही काफी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। ऐसे में अब उन्हें डर है कि प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है जबकि उनके स्कूलों की पूरी अकाउंट स्टेटमेंट पहले ही संबंधित ऑथारिटी के पास है।