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डॉक्टरों और अस्पतालों की सुरक्षा के लिए पंजाब की तर्ज पर चंडीगढ़ में एक्ट लागू करने की तैयारी
Tue, 25 Jun 2019 01:06 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 25 Jun 2019 01:06 AM IST
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चंडीगढ़ में अस्पतालों में इलाज कराने आए मरीजों और उनके तीमारदारों को सतर्क रहना होगा। क्योंकि अब शहर में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा, मारपीट या अस्पताल को किसी तरह से नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो एक साल से ज्यादा समय जेल में बिताना पड़ सकता है।
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पंजाब की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी यूटी प्रशासन पंजाब प्रोटेक्शन आफ मेडिकल सर्विसेज पर्संस एंड मेडिकेयर सर्विसेज इंस्टीच्यूशंस प्रीवेंशन आफ वायलेंस एंड डैमेज ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 2008 को लागू करने की तैयारी में है। इस एक्ट को लागू करने के लिए फाइल को केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजा जा रहा है। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही चंडीगढ़ में लागू कर दिया जाएगा।
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पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों पर हमले के बाद देशभर में हुई हड़ताल के बाद प्रशासन ने चंडीगढ़ में भी डॉक्टरों को बड़े स्तर पर राहत देने की कवायद शुरू हो गई है। सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ एक प्रशासनिक मीटिंग हुई, जिसमें यूटी के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की अगुवाई में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद पूर्ण रूप से इसे लागू करने पर सहमति बनी।
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मीटिंग में आईएमए के प्रेसिडेंट डॉ. राजेश धीर और एसोसिएशन के कई रिप्रेजेंटेटिव्स ने हिंसा को लेकर कई बातें प्रशासक के सामने रखीं और पंजाब प्रोटेक्शन आफ मेडिकल सर्विसेज एंड मेडिकेयर सर्विसेज इंस्टीच्यूशंस प्रीवेंशन आफ वायलेंस एंड डैमेज आफ प्रापर्टी एक्ट 2008 को चंडीगढ़ में लागू करने की बात कही।
बैठक में तय हुआ कि डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर पंजाब के इस एक्ट को चंडीगढ़ में भी लागू किया जाना चाहिए, जिसके बाद इसे लागू करने के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजने की संस्तुति की गई। इस मौके पर प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी-कम-हेल्थ सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस संजय बेनीवाल और डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज डॉ. जी दीवान मौजूद रहे।
मेडिकल बोर्ड की जानकारी के बाद ही दर्ज होगी रिपोर्ट
अगर किसी अस्पताल में मरीज की मौत या फिर इलाज में लापरवाही के मामले में डॉक्टरों पर हमला होता है या अस्पताल की प्रॉपर्टी डैमेज की जाती है तो पुलिस मरीज या फिर उसके तीमारदार की शिकायत पर रिपोर्ट नहीं दर्ज कर सकेगी। इसके लिए यूटी प्रशासन डीजीपी को निर्देश जारी करेगा, जिसमें शहर के सभी पुलिस स्टेशनों को सेंसेटाइज करने को कहा जाएगा, जिससे कि डॉक्टरों की सुरक्षा से कोई खिलवाड़ न हो सके।