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ओजोन परत के संरक्षण पर देना होगा ध्यान, एमसीएम डीएवी कॉलेज फॉर वुमेन में ओजोन परत पर ऑनलाइन व्याख्यान पर डॉ. शफिला ने कहा
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चंडीगढ़। मेहरचंद महाजन डीएवी कॉलेज फॉर वुमन सेक्टर-36 में इंटरनेशनल डे फॉर प्रिजर्वेशन ऑफ ओजोन लेयर पर ऑनलाइन व्याख्यान हुआ। इस दौरान ओजोन परत के संरक्षण पर ध्यान देने को कहा गया।
ओजोन परत के महत्व, अभाव और वर्तमान स्थिति विषय पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। कॉलेज की पर्यावरण विज्ञान विभाग की डॉ. शफिला बंसल ने इस ऑनलाइन वार्ता का संचालन करते हुए सभी का परिचय दिया। ओजोन परत, इसके गुणों और प्रकारों से परिचय के साथ शुरुआत करते हुए डॉ. बंसल ने मनुष्यों, जानवरों और पौधों को यूवी-बी विकिरणों के हानिकारक प्रभावों से बचाने में ओजोन परत के महत्व पर विस्तार से बताया। विशेषज्ञों ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि प्राकृतिक प्रक्रियाएं जैसे ज्वालामुखी विस्फोट आदि ओजोन की कमी के केवल दो प्रतिशत हिस्से पर प्रभाव डालती हैं जबकि मानवजनित प्रक्रियाएं जैसे कि जीवाश्म ईंधन जलना, एयर कंडीशनिंग आदि पृथ्वी की सुरक्षात्मक परत पर सबसे गहरा प्रभाव डालती हैं। ओजोन परत की रक्षा के लिए की जा रही कोशिशों के बारे में भी बताया। डॉ. बंसल ने प्रतिभागियों को सीएफसी और अन्य ओजोन को नष्ट करने वाले पदार्थों को चरणबद्ध करने के लिए किए गए महत्वपूर्ण समझौते मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के बारे में बताया।
प्रतिभागियों को बनना होगा समस्या के समाधान का हिस्सा : डॉ. निशा
कॉलेज की प्राचार्या डॉ. निशा भार्गव ने कहा कि इस वार्ता के माध्यम से कॉलेज ने ओजोन परत की कमी की समस्या के बारे में जागरूकता फैलाने व प्रतिभागियों को समस्या के समाधान का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया है। मानव गतिविधि ने पृथ्वी की सुरक्षात्मक परत को नुकसान पहुंचाया है और हमें इस नुकसान की रोकथाम व ओजोन परत के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।
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ओजोन परत के महत्व, अभाव और वर्तमान स्थिति विषय पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। कॉलेज की पर्यावरण विज्ञान विभाग की डॉ. शफिला बंसल ने इस ऑनलाइन वार्ता का संचालन करते हुए सभी का परिचय दिया। ओजोन परत, इसके गुणों और प्रकारों से परिचय के साथ शुरुआत करते हुए डॉ. बंसल ने मनुष्यों, जानवरों और पौधों को यूवी-बी विकिरणों के हानिकारक प्रभावों से बचाने में ओजोन परत के महत्व पर विस्तार से बताया। विशेषज्ञों ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि प्राकृतिक प्रक्रियाएं जैसे ज्वालामुखी विस्फोट आदि ओजोन की कमी के केवल दो प्रतिशत हिस्से पर प्रभाव डालती हैं जबकि मानवजनित प्रक्रियाएं जैसे कि जीवाश्म ईंधन जलना, एयर कंडीशनिंग आदि पृथ्वी की सुरक्षात्मक परत पर सबसे गहरा प्रभाव डालती हैं। ओजोन परत की रक्षा के लिए की जा रही कोशिशों के बारे में भी बताया। डॉ. बंसल ने प्रतिभागियों को सीएफसी और अन्य ओजोन को नष्ट करने वाले पदार्थों को चरणबद्ध करने के लिए किए गए महत्वपूर्ण समझौते मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के बारे में बताया।
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प्रतिभागियों को बनना होगा समस्या के समाधान का हिस्सा : डॉ. निशा
कॉलेज की प्राचार्या डॉ. निशा भार्गव ने कहा कि इस वार्ता के माध्यम से कॉलेज ने ओजोन परत की कमी की समस्या के बारे में जागरूकता फैलाने व प्रतिभागियों को समस्या के समाधान का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया है। मानव गतिविधि ने पृथ्वी की सुरक्षात्मक परत को नुकसान पहुंचाया है और हमें इस नुकसान की रोकथाम व ओजोन परत के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।
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