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Chandigarh News: चंडीगढ़ के नक्शे में बड़े बदलाव की तैयारी, अगले सप्ताह अमित शाह के सामने रखेगा मास्टर प्लान

Sat, 20 Jun 2026 02:28 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 02:28 AM IST
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Preparations underway for major changes to Chandigarh's layout; master plan to be presented to Amit Shah next week.
चंडीगढ़। चंडीगढ़ मास्टर प्लान 2031 में प्रस्तावित बड़े बदलावों पर अगले सप्ताह निर्णायक चर्चा होने जा रही है। चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधनों का विस्तृत खाका पेश करेंगे। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय शहर में हाईराइज इमारतों को अनुमति देने, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने और भवनों की ऊंचाई सीमा में ढील देने का प्रस्ताव होगा।
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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह बैठक डीरिगुलेशन प्रक्रिया के तहत तैयार किए गए संशोधनों पर केंद्रित होगी। प्रशासन का तर्क है कि सीमित भूमि और लगातार बढ़ती आबादी के बीच चंडीगढ़ को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए वर्टिकल ग्रोथ अनिवार्य हो गई है। इसी सोच के तहत फेज-3 सेक्टरों, परिधीय क्षेत्रों और औद्योगिक क्षेत्रों में निर्माण संबंधी नियमों को उदार बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
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प्रस्तावित संशोधनों के तहत फेज-3 सेक्टरों में एफएआर को मौजूदा 1.2 से बढ़ाकर 3.0 तक करने की योजना है। इसके साथ ही भवनों की अधिकतम ऊंचाई 30 मीटर (करीब 98.5 फुट) तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे 8 से 10 मंजिला इमारतों के निर्माण का रास्ता खुल सकता है। ग्राउंड कवरेज को भी 40 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी है।
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औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। प्रशासन ने औद्योगिक प्लॉटों के लिए एफएआर 2.0 तक करने, 60 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज की अनुमति देने और दो कनाल तक के प्लॉटों पर 68 फुट 3 इंच तक ऊंची इमारतें बनाने का सुझाव दिया है। उद्योग संगठनों का मानना है कि इससे एमएसएमई क्षेत्र को विस्तार मिलेगा और निवेश आकर्षित होगा।

मास्टर प्लान में मिक्स्ड लैंड यूज (एमएलयू) क्षेत्र को 252 एकड़ से बढ़ाकर 428 एकड़ करने का प्रस्ताव भी शामिल है। सेक्टर-43 सब-सिटी सेंटर के आसपास 78 एकड़ तथा इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 के लगभग 60 एकड़ क्षेत्र को नए मिक्स्ड यूज जोन में शामिल करने की तैयारी है। विकास मार्ग कॉरिडोर को पंजाब सीमा तक 1.5 किलोमीटर आगे बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है।

इसके अलावा मलोया के पास पॉकेट-7 में हाईराइज आवासीय परियोजनाओं के विकास की योजना है, जहां लगभग 45 हजार लोगों के रहने की व्यवस्था की जा सकती है। वहीं मनीमाजरा के पॉकेट-6 में स्टिल्ट प्लस पांच मंजिला भवनों का प्रस्ताव रखा गया है।

हालांकि इन प्रस्तावों ने शहर में नई बहस छेड़ दी है। ली कॉर्बूजिए का डिजाइन किया गया चंडीगढ़ अपनी कम ऊंचाई वाली इमारतों, हरित क्षेत्रों और सुव्यवस्थित शहरी स्वरूप के लिए विश्वभर में जाना जाता है। शहरी योजनाकारों, वास्तु विशेषज्ञों और विरासत संरक्षण से जुड़े लोगों का मानना है कि हाईराइज इमारतों से शहर की मूल पहचान प्रभावित हो सकती है।


चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी भी प्रस्तावित संशोधनों का विरोध कर चुके हैं। उनका कहना है कि बढ़ा हुआ एफएआर, अधिक ऊंचाई और ज्यादा ग्राउंड कवरेज शहर के मूल सिद्धांत ‘सन, स्पेस एंड वर्ड्योर’ से समझौता होगा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऊंची इमारतों से पानी, सीवरेज, पार्किंग और यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। ऐसे में अब सबकी निगाहें अमित शाह के साथ होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहां चंडीगढ़ के भविष्य की दिशा तय करने वाले इन प्रस्तावों पर महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है।
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