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Punjab: प्रताप बाजवा बोले- टाला जा सकता था राज्यपाल-मुख्यमंत्री विवाद, असहमति स्वस्थ लोकतंत्र का लक्षण नहीं

Thu, 16 Feb 2023 01:23 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 16 Feb 2023 01:23 AM IST
सार

बाजवा ने कहा कि पंजाब कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध राज्य की बेहतरी के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इसके अलावा, राज्यपाल का पद सांविधानिक है, इसलिए यह उचित सम्मान का हकदार है।

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Pratap Singh Bajwa said dispute could have been avoided between Governor and Chief Minister
प्रताप सिंह बाजवा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी ( फाइल फोटो)

विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के बीच टकराव पर नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा का कहना है कि इस टकराव को टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के फैसलों के बारे में जानकारी मांगने के राज्यपाल के अधिकार को चुनौती देना दुर्भाग्यपूर्ण है। पंजाब सरकार के लिए राज्यपाल को जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक भी है।

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बुधवार को जारी बयान में कांग्रेस के सीनियर नेता प्रताप बाजवा ने कहा कि अवांछित और अप्रिय विवादों में उलझने के अलावा और भी कई चुनौतियां हैं, जिन पर मुख्यमंत्री को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति, पंजाब के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अनिश्चित वित्तीय संसाधन, बढ़ती बेरोजगारी, कृषि संकट, पर्यावरण संकट और सीमा पार से नार्को-आतंकवाद, विफल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा और उद्योगों का पलायन ऐसे मुद्दे हैं, जो सरकार का पूरा समय ध्यान चाहते हैं।
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बाजवा ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 167, राज्य के प्रशासन से संबंधित जानकारी राज्यपाल को प्रदान करने का मुख्यमंत्री पर एक कर्तव्य डालता है। चूंकि राज्य की कार्यकारी शक्ति राज्यपाल के अनुच्छेद 154 (1) में निहित हैं और प्रत्येक कार्यकारी कार्रवाई राज्यपाल के नाम पर की जाती है, इसलिए यह मुख्यमंत्री का स्वाभाविक दायित्व है कि वह राज्यपाल द्वारा मांगी गई जानकारी प्रस्तुत करें।
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बाजवा ने कहा कि पंजाब कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध राज्य की बेहतरी के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इसके अलावा, राज्यपाल का पद सांविधानिक है, इसलिए यह उचित सम्मान का हकदार है। यदि राज्यपाल सरकार को जवाबदेह ठहराता है या सरकार के कामकाज में कुछ अनियमितताओं को उठाता है, इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसके अलावा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच लगातार असहमति स्वस्थ लोकतंत्र के संकेत नहीं हैं।

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