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प्रदीप कासनी ने थामा कांग्रेस का दामन, भिवानी के किसी क्षेत्र से लड़ सकते हैं चुनाव
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 15 Jun 2018 10:33 AM IST
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प्रदीप कासनी
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सिस्टम की खामियों व कमियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले हरियाणा के रिटायर्ड आईएएस प्रदीप कासनी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डा. अशोक तंवर ने कासनी को राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करवाकर उन्हें औपचारिक रूप से कांग्रेस ज्वाइन करवाई। कासनी के साथ सोनीपत के प्रदीप नरवाल (जेएनयू में स्टूडेंट लीडर एवं दलित एक्टिविस्ट) ने भी कांग्रेस ज्वाइन की।
आईएएस प्रदीप कासनी हाल ही में रिटायर्ड हुए हैं और हरियाणा में 34 साल की सेवा के दौरान 70 से अधिक तबादले झेल चुके हैं। उनकी रिटायरमेंट भी बकाया वेतन अदायगी के चक्कर में विवादस्पद रही। केंद्रीय प्रशासनिक अभिकरण (कैट) के हस्तक्षेप के बाद हरियाणा सरकार ने उन्हें बकाया वेतन मिला था। यानी रिटायर होते-होते भी कासनी सरकार से बेहद खफा थे।
अपनी बेबाक और ईमानदार छवि केलिए पहचाने जाने वाले कासनी ने रिटायर होते ही यह दावा किया था कि वे जल्द ही अपनी एक पुस्तक के जरिए ये उजागर करेंगे कि सिस्टम में ईमानदारी से काम करते हुए उन्हें कैसे-कैसे संघर्ष का सामना करना पड़ा और कैसे वे सरकारों के निशानों पर रहे। अभी कासनी की पुस्तक तो प्रकाशित नहीं हुई, मगर उससे पहले ही प्रदीप कासनी ने अपनी अगली पारी राजनीति को समर्पित करते हुए कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।
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कासनी की राजनीति में एंट्री को लेकर जहां अब सियासी गलियारे में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। वहीं यह भी अटकलें लगाई जा रही है कि वे जिला भिवानी के किसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक के चुनाव के लिए दावा कर सकते हैं, क्योंकि कासनी मूल रूप से भिवानी के ही रहने वाले हैं।
उधर, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डा. अशोक तंवर ने बताया कि कासनी और नरवाल को राहुल गांधी ने औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल करवा दिया है। उन्होंने कहा कि इससे साबित होता है कि धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोग भी कांग्रेस और राहुल गांधी में अपनी आस्था जता रहे हैं। तंवर ने कहा कि दोनों ही लोगों को पार्टी में पूरा मान- सम्मान दिया जाएगा।
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आईएएस प्रदीप कासनी हाल ही में रिटायर्ड हुए हैं और हरियाणा में 34 साल की सेवा के दौरान 70 से अधिक तबादले झेल चुके हैं। उनकी रिटायरमेंट भी बकाया वेतन अदायगी के चक्कर में विवादस्पद रही। केंद्रीय प्रशासनिक अभिकरण (कैट) के हस्तक्षेप के बाद हरियाणा सरकार ने उन्हें बकाया वेतन मिला था। यानी रिटायर होते-होते भी कासनी सरकार से बेहद खफा थे।
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अपनी बेबाक और ईमानदार छवि केलिए पहचाने जाने वाले कासनी ने रिटायर होते ही यह दावा किया था कि वे जल्द ही अपनी एक पुस्तक के जरिए ये उजागर करेंगे कि सिस्टम में ईमानदारी से काम करते हुए उन्हें कैसे-कैसे संघर्ष का सामना करना पड़ा और कैसे वे सरकारों के निशानों पर रहे। अभी कासनी की पुस्तक तो प्रकाशित नहीं हुई, मगर उससे पहले ही प्रदीप कासनी ने अपनी अगली पारी राजनीति को समर्पित करते हुए कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।
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कासनी की राजनीति में एंट्री को लेकर जहां अब सियासी गलियारे में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। वहीं यह भी अटकलें लगाई जा रही है कि वे जिला भिवानी के किसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक के चुनाव के लिए दावा कर सकते हैं, क्योंकि कासनी मूल रूप से भिवानी के ही रहने वाले हैं।
उधर, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डा. अशोक तंवर ने बताया कि कासनी और नरवाल को राहुल गांधी ने औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल करवा दिया है। उन्होंने कहा कि इससे साबित होता है कि धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोग भी कांग्रेस और राहुल गांधी में अपनी आस्था जता रहे हैं। तंवर ने कहा कि दोनों ही लोगों को पार्टी में पूरा मान- सम्मान दिया जाएगा।