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मानकों की अनदेखी कर बिड खोलने पर बिजलीकर्मी गरजे
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ट्रांसपोर्ट चौक पर प्रदर्शन करते बिजली कर्मचारी।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन को नियमों की अनदेखी कर निजीकरण के नोडल अधिकारी की अनुपस्थिति में बिड खोलना महंगा पड़ा है। प्रशासन की इस गैर-कानूनी गतिविधि के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने शनिवार को हल्ला बोल दिया।
उन्होंने कार्य बहिष्कार कर फेज वन स्थित बिजली दफ्तर न्यू पावर हाउस पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। वही ट्रांसपोर्ट चौक के पास केंद्र सरकार और प्रशासन का पुतला फूंका। बिजली कर्मचारी यूनियन ने इसे संघर्ष की शुरुआत बताते हुए 7 अप्रैल को संयुक्त रूप से धरना देते हुए गवर्नर हाउस कूच करने की घोषणा की। इसके साथ ही 20 अप्रैल को सभी शिफ्टों में पूर्णत: हड़ताल पर रहने की घोषणा भी की है।
यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी, संयुक्त सचिव अमरीक सिंह, सुखविंदर सिंह, रणजीत सिंह, पवन सिंह, कश्मीर सिंह, गुरमीत सिंह ने गैर-कानूनी तरीके से बिड खोले जाने पर प्रशासन की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने यह सारी प्रक्रिया अधिकृत नोडल अधिकारी की अनुपस्थिति में करके नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। प्रशासन ने एक बार फिर अपने किए हुए फैसले से पलटते हुए बिडिंग की कार्यवाही समाप्त होने के बाद दोबारा से आरएसपी में बदलाव कर नई कंपनियों को मौका दिया है, जो बिल्डिंग प्रक्रिया में सीधे तौर पर उल्लंघन है। इसके खिलाफ बिजली के संगठनों तथा औद्योगिक संगठनों ने भी विरोध जताया, लेकिन प्रशासन ने सारी आपत्तियों को दरकिनार करके नई कंपनियों को भी बिडिंग प्रक्रिया में शामिल कर 22 मार्च को बिड खोल दी, इसलिए इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा बिडिंग प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की गई है। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन के विरोध में ट्रांसपोर्ट चौक पर पुतला फूंका।
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कर्मचारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर शीघ्र ही बिडिंग की सारी प्रक्रिया रद्द नहीं की गई तो 7 अप्रैल को सभी ट्रेड यूनियन को साथ लेकर धरना देने के साथ ही प्रदर्शन करते हुए गवर्नर हाउस तक मार्च किया जाएगा। इसी क्रम में 20 अप्रैल को पूर्ण हड़ताल की जाएगी। इस दौरान जनता को होने वाली परेशानी के लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
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उन्होंने कार्य बहिष्कार कर फेज वन स्थित बिजली दफ्तर न्यू पावर हाउस पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। वही ट्रांसपोर्ट चौक के पास केंद्र सरकार और प्रशासन का पुतला फूंका। बिजली कर्मचारी यूनियन ने इसे संघर्ष की शुरुआत बताते हुए 7 अप्रैल को संयुक्त रूप से धरना देते हुए गवर्नर हाउस कूच करने की घोषणा की। इसके साथ ही 20 अप्रैल को सभी शिफ्टों में पूर्णत: हड़ताल पर रहने की घोषणा भी की है।
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यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी, संयुक्त सचिव अमरीक सिंह, सुखविंदर सिंह, रणजीत सिंह, पवन सिंह, कश्मीर सिंह, गुरमीत सिंह ने गैर-कानूनी तरीके से बिड खोले जाने पर प्रशासन की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने यह सारी प्रक्रिया अधिकृत नोडल अधिकारी की अनुपस्थिति में करके नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। प्रशासन ने एक बार फिर अपने किए हुए फैसले से पलटते हुए बिडिंग की कार्यवाही समाप्त होने के बाद दोबारा से आरएसपी में बदलाव कर नई कंपनियों को मौका दिया है, जो बिल्डिंग प्रक्रिया में सीधे तौर पर उल्लंघन है। इसके खिलाफ बिजली के संगठनों तथा औद्योगिक संगठनों ने भी विरोध जताया, लेकिन प्रशासन ने सारी आपत्तियों को दरकिनार करके नई कंपनियों को भी बिडिंग प्रक्रिया में शामिल कर 22 मार्च को बिड खोल दी, इसलिए इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा बिडिंग प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की गई है। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन के विरोध में ट्रांसपोर्ट चौक पर पुतला फूंका।
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कर्मचारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर शीघ्र ही बिडिंग की सारी प्रक्रिया रद्द नहीं की गई तो 7 अप्रैल को सभी ट्रेड यूनियन को साथ लेकर धरना देने के साथ ही प्रदर्शन करते हुए गवर्नर हाउस तक मार्च किया जाएगा। इसी क्रम में 20 अप्रैल को पूर्ण हड़ताल की जाएगी। इस दौरान जनता को होने वाली परेशानी के लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।