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Pollution: इस राज्य में प्रदूषण से रोज 130 मौत, साल 2023 में हुईं 48 हजार मौतें; स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Sun, 09 Nov 2025 09:21 AM IST
शाहरुख खान राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 09 Nov 2025 09:21 AM IST
सार

पंजाब में रोजाना 130 लोगों की मौत की वजह प्रदूषण बन रहा है। स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2023 में पंजाब में विभिन्न कारणों से लगभग 2,30,000 मौतें हुई हैं जिनमें से 48,000 मौतों में वायु प्रदूषण के जोखिम कारकों की भूमिका है। प्रदूषण के हॉटस्पॉट शहरों की सूची में पंजाब के 9 शहर शामिल हैं।

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Pollution is causing 130 deaths every day in Punjab shocking figures revealed in study
pollution in punjab - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में वायु प्रदूषण अब सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बनता जा रहा है। प्रदेश में हर रोज 130 लोगों की मौत प्रदूषण की वजह से हो रही है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) 2023 के आंकडों के विश्लेषण के आधार पर तैयार रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। 
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पंजाब के 9 शहर पहले ही प्रदूषण के हॉटस्पॉट शहरों की सूची में शामिल हैं। पंजाब विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग की प्रोफेसर सुमन मोर व उनकी रिसर्च टीम ने रिपोर्ट के आधार पर बताया कि वायु प्रदूषण पंजाब के लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सबसे बड़ा जोखिम कारक बनता जा रहा है। 
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वर्ष 2023 में पंजाब में विभिन्न कारणों से लगभग 2,30,000 मौतें हुई हैं जिनमें से 48,000 मौतों में वायु प्रदूषण के जोखिम कारकों की भूमिका है जो प्रदेश में होने वाली कुल मौतों का 21 प्रतिशत है। डॉ. मोर ने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 130 लोग केवल वायु प्रदूषण के जोखिम कारकों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं।
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स्टडी में ये बातें भी आई सामने
-हृदय रोग (कार्डियोवैस्कुलर डिजीज): वायु प्रदूषण से जुड़ी कुल मौतों का लगभग 68 प्रतिशत मौंते हृदय रोग से जुड़ी हैं। इनमें इस्केमिक हृदय रोग एवं स्ट्रोक सबसे मुख्य कारण है।
 

-श्वसन रोग (रेस्पिरेटरी डिजीज): क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज से लगभग 7,000 मौतें सालाना होती हैं। जिसका प्रमुख कारण क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और लोअर रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन है। यह फेफड़े और गले के नीचे वायुमार्ग को प्रभावित करता है।

-फेफड़ों का कैंसर (लंग) से करीब 1,500 और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से 1,700 मौतें वार्षिक वायु प्रदूषण के कारण हो रही हैं।
 

हॉटस्पॉट शहरों में जोखिम अधिक: केंद्र सरकार ने प्रदेश के 9 शहरों को हॉटस्पॉट यानी गैर प्राप्ति शहरों की सूची में शामिल किया हुआ है। गैर-प्राप्ति उन शहरों को कहते हैं जो 5 साल की अवधि में लगातार वायु गुणवत्ता स्तर पीएम-10 के लिए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक को पूरा नहीं करते हैं।

इन शहरों में डेराबस्सी, गोबिंदगढ़, जालंधर, खन्ना, लुधियाना, नया नंगल, पठानकोट, पटियाला और अमृतसर शामिल हैं। इन शहरों में वायु प्रदूषण से जुड़ी मृत्यु दर का जोखिम विशेष रूप से उच्च है।
 

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज जनसंख्या स्तर पर विशिष्ट जोखिम कारकों से जुड़ी मृत्यु दर और रोग दर का वैज्ञानिक अनुमान प्रदान करता है। 2023 के आंकड़े दर्शाते हैं कि वायु प्रदूषण भी अब पंजाब में होने वाली मृत्यु का एक प्रमुख कारण बन गया है। इसमें सामने आ रहा है कि हर पांच में से एक मौत वायु प्रदूषण से जुड़ी है जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। हृदय रोगों और श्वसन रोगों पर इसका प्रभाव विशेष रूप से गंभीर है। हालांकि कई मामलों में व्यक्तियों में मृत्यु का वास्तविक कारण भिन्न हो सकता है।-डॉ. रविंद्र खैवाल, प्रोफेसर, पीजीआईएमईआर।
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